Team India ने Women’s Asia Cup 2026 का खिताब तो अपने नाम कर लिया, लेकिन ट्रॉफी को लेकर एक बार फिर ऐसा विवाद खड़ा हो गया, जिसने पूरे क्रिकेट जगत का ध्यान खींच लिया। आखिर बीसीसीआई के प्रस्ताव को क्यों ठुकराया गया और हरमनप्रीत कौर एंड कंपनी ने प्रेजेंटेशन सेरेमनी का बहिष्कार क्यों किया?
Mohsin Naqvi Rejects BCCI Proposal: वूमेंस एशिया कप 2026 के खिताबी मुकाबले में एक बार फिर से ट्रॉफी का विवाद खड़ा हो गया। टीम इंडिया ने खिताब जीता, लेकिन मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने से मना कर दिया। एक साल के भीतर यह दूसरा मौका है, जब टीम इंडिया ने खिताब जीता, लेकिन ट्रॉफी से नहीं मिली। फाइनल के दौरान एसीसी और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के प्रमुख मोहसिन नकवी, बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया और उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला के साथ मैच देखते हुए नजर आए थे। इसके बाद से लगा कि इस बार मामला सब ठीक हो जाएगा। बीसीसीआई ने मोहसिन नकवी के सामने प्रस्ताव भी रखा कि इस बार ट्रॉफी एशियाई क्रिकेट काउंसिल के डिप्टी चेयरमैन खालिद अल-जरीनी को सौंपने दिया जाए। हालांकि, नकवी ने बीसीसीआई के प्रस्ताव को ठुकरा दिया और फिर से ट्रॉफी देने के लिए प्रेजेंटेशन सेरेमनी में चले गए। इसके बाद हरमनप्रीत कौर एंड कंपनी ने उनका बहिष्कार किया और मैदान छोड़ दिया।
BCCI ने रखा था ये प्रस्ताव
इसके बाद बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने कहा है कि हमें पूरी उम्मीद है कि बहुत जल्द हमें दोनों ट्रॉफी मिल जाएंगी, यानी 2025 में जीती गई मेंस एशिया कप की ट्रॉफी और 14 सितंबर 2026 को जीती गई वूमेंस एशिया कप की ट्रॉफी। सेकंड, बताएं कि हमारा रुख बिल्कुल साफ था। हम ऐसे व्यक्ति से ट्रॉफी नहीं लेने वाले थे, जो हमारे देश के हित में काम नहीं कर रहा है। हमारा सुझाव था कि एशियाई क्रिकेट बोर्ड के डिप्टी चेयरमैन खालिद अल-जरीनी ट्रॉफी सौंपें, लेकिन इस सुझाव को ठुकरा दिया गया। इसीलिए हमने प्रेजेंटेशन सेरेमनी का बहिष्कार कर दिया।
आपको बता दें कि दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में खेले गए खिताबी मुकाबले में भारतीय टीम ने श्रीलंका को 72 रन से हरा दिया। पहले बल्लेबाजी करते हुए टीम इंडिया ने 20 ओवर में 5 विकेट गंवाकर 183 रन बनाए। जवाब में श्रीलंका की पूरी टीम 111 रन पर ढेर हो गई, जिससे भारतीय टीम ने आठवीं बार खिताब पर नाम कर लिया।
टीम इंडिया ने 10वीं बार फाइनल में जगह बनाई थी और 8 बार खिताब जीत चुकी है। वूमेंस एशिया कप के इतिहास में सिर्फ 2 बार ऐसा हुआ है कि टीम इंडिया फाइनल हारी है।
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