नवरात्रि में होने वाले गरबा आयोजनों में मुस्लिम युवाओं के शामिल होने को भोपाल में मुफ्ती मोहम्मद गुफरान खान नदवी ने हराम बताया है। उनका कहना है कि मुस्लिम युवाओं का दूसरी कौम के धार्मिक त्योहार या रस्म में शामिल होना जायज नहीं है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति दूसरी कौम की मुशाबहत (अनुकरण) इख्तियार करता है, वह उसी के तौर-तरीकों में शामिल माना जाता है। शिरकत करना क्या जायज है? मुफ्ती गुफरान खान नदवी ने कहा, आज के दौर में जो गरबा या हिंदू रस्म होती है, उसमें मुस्लिम लड़कों की शिरकत करना क्या जायज है? बिल्कुल हराम है। इतना ही कहूं बस जो फतवा होता है, हराम के फितने से खाली नहीं है। उन्होंने कहा कि कुछ मुस्लिम युवक अपने दोस्तों के साथ गरबा आयोजनों में जाना बेहतर समझते हैं, लेकिन उन्हें इस तरह की शामिल होने से बचना चाहिए। दूसरी कौम की धार्मिक पहचान और रस्मों का अनुसरण करना उचित नहीं है। बता दें, इससे पहले 6 अक्टूबर को मुस्लिम त्योहार कमेटी ने भी एक पत्र जारी किया था। जिसमें लोगों से गरबा आयोजनों में जाने से परहेज करने की अपील की थी। धार्मिक पहचान और परंपरा के प्रति जागरूक रहें मुफ्ती गुफरान खान नदवी ने कहा कि मुस्लिम युवाओं को अपनी धार्मिक पहचान और परंपराओं के प्रति जागरूक रहना चाहिए। उन्होंने दूसरी कौम की मुशाबहत को लेकर कहा कि इस तरह का अनुकरण मुस्लिम समाज के लिए फितने का कारण बन सकता है। दूसरे धर्मों के त्योहारों की ओर आकर्षित होने की जरूरत नहीं मुफ्ती ने मुस्लिम समाज के धार्मिक जीवन और मस्जिदों को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा कि मुसलमानों का अपना धर्म और उसकी परंपराएं इतनी खूबसूरत और पाकीजा हैं कि उन्हें दूसरे धर्मों के त्योहारों की ओर आकर्षित होने की जरूरत नहीं है। मुसलमान तो खुद इतना खूबसूरत है और इसका दीन इतना पाकीजा है। मस्जिद के गेट तक आए हैं तो अंदर भी आ जाएंगे मुफ्ती गुफरान खान नदवी ने मस्जिदों के गेट तक दूसरे समुदाय के लोगों के पहुंचने का जिक्र करते हुए कहा कि अगर कोई वहां तक आया है तो संभव है कि आगे चलकर मस्जिद के अंदर भी आए। उन्होंने कहा, जिसको वजू करके अंदर आना है, गुसल करके अंदर ही आ जाओ। अल्लाह तुम्हें नमाज पढ़वा दे। गेट तक तो आ ही गए हो, इंशाल्लाह अंदर भी आ जाओगे। उन्होंने कहा कि जो लोग पहले मस्जिद के गेट तक भी नहीं आते थे, वे अब वहां तक पहुंच रहे हैं। उनके मुताबिक, यह इस बात का संकेत है कि लोग मुस्लिमों की नमाज और धार्मिक परंपराओं को लेकर सवाल कर रहे हैं। मुस्लिम त्योहार कमेटी भी कर चुकी अपील आगामी नवरात्रि और गरबा आयोजनों को लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी ने मुस्लिम युवाओं और समुदाय के लोगों से गरबा आयोजनों में जाने से परहेज करने की अपील की है। कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शेख इस्माइल खान ने 6 अक्टूबर को जारी अपील में कहा कि यह किसी धर्म या धार्मिक आयोजन के विरोध में नहीं है, बल्कि सामाजिक सौहार्द और विवाद से बचने के उद्देश्य से की गई है। कमेटी ने कहा है कि हाल के दिनों में गरबा आयोजनों में मुस्लिम युवाओं की मौजूदगी को लेकर सार्वजनिक तौर पर आपत्तियां सामने आई हैं। भाजपा के कुछ मंत्रियों और विधायकों ने भी गरबा आयोजनों में मुस्लिमों के शामिल होने पर नाराजगी जताई है। जिलों में अभियान चलाएगी कमेटी शमशुल हसन ने कहा कि कमेटी अपने प्रदेश, संभाग और जिला स्तर के पदाधिकारियों के माध्यम से अभियान चलाएगी। पदाधिकारियों से कहा जाएगा कि वे अपने क्षेत्रों के उलेमा और सामाजिक संगठनों से संपर्क करें और मीडिया तथा सोशल मीडिया के माध्यम से मुस्लिम समाज के युवाओं को गरबा आयोजनों से दूर रहने की अपील करें। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन से भी संपर्क कर उन्हें कमेटी की पहल के बारे में बताया जाएगा। उद्देश्य किसी धार्मिक आयोजन का विरोध करना नहीं, बल्कि विवाद की स्थिति से बचना और शांति बनाए रखना है। यह खबर भी पढ़ें… विधायक बोलीं-गरबे के बाद विधर्मियों के साथ जाती हैं लड़कियां महू से भाजपा विधायक उषा ठाकुर ने गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर रोक लगाने की मांग की है। ठाकुर ने कहा- हर साल गरबे के बाद करीब साढ़े 4 लाख हिंदू लड़कियां विधर्मियों के साथ चली जाती हैं और अगले साल करीब 9 लाख बच्चों को जन्म देती हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…

