भागलपुर में गंगा की धार बदलने से राघोपुर-शंकरपुर तटबंध पर खतरा बढ़ गया। नदी का बहाव तटबंध की तरफ खिसक गया, जिससे 35 से 45 मीटर गहरी धारा और 5 मीटर प्रति सेकंड की रफ्तार ने जल संसाधन विभाग की परेशानी बढ़ा दी। 26 जुलाई को छोटी हलालपुर गांव के पास गंगा का कटाव शुरू हुआ। मुख्य अभियंता जय प्रकाश के नेतृत्व में 4 दर्जन से ज्यादा इंजीनियरों और कर्मचारियों ने मोर्चा संभाला। करीब 700 मीटर के इलाके में बचाव कार्य चला। नदी का मुख्य तल तटबंध की ओर खिसकने और चौड़ाई कम होने से पानी का दबाव बहुत बढ़ गया था। टीम ने तीन शिफ्टों में दिन-रात निगरानी की और फ्लड फाइटिंग सामग्री का इस्तेमाल किया। लगातार काम के बाद फिलहाल तटबंध को सुरक्षित कर लिया गया है और अब स्थायी समाधान की तैयारी है। ग्रामीण बोले- ‘बांध बचा, लेकिन अब पक्का इलाज चाहिए’ छोटी हलालपुर की ग्रामीण चमेली देवी ने कहा कि विभागीय मंत्री, इंजीनियर और मजदूर लगातार मौके पर डटे रहे। अधिकारियों की निगरानी में मजदूरों ने रात-दिन काम किया और बांध को टूटने से बचाया। उन्होंने कहा कि फिलहाल खतरा टल गया है, लेकिन सिर्फ अभी के लिए बांध बचाना पर्याप्त नहीं है। गांव को भविष्य के कटाव और बाढ़ से सुरक्षित करने के लिए तटबंध को और मजबूत और स्थायी तरीके से पक्का किया जाना चाहिए। वहीं शंकरपुर निवासी राजेश कुमार ने भी इंजीनियरों और कर्मचारियों की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 से इस इलाके में कटाव का दौर देखा जा रहा है, लेकिन इस बार जिस तरह इंजीनियर और कर्मचारी 24 घंटे तटबंध पर डटे रहे, वैसी सक्रियता पहले देखने को नहीं मिली। राजेश कुमार के मुताबिक, जलस्तर में कमी आने के बावजूद अधिकारी अभी भी तटबंध की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इंजीनियर अपना घर-परिवार छोड़कर लगातार मौके पर डटे हैं। ग्रामीणों ने जल संसाधन विभाग की पूरी टीम के प्रति आभार जताया। गंगा की ‘चाल’ समझकर इंजीनियरों ने संभाला मोर्चा मुख्य अभियंता इंजीनियर जय प्रकाश ने बताया कि राघोपुर-शंकरपुर तटबंध के पास गंगा की बहाव प्रवृत्ति यानी नदी की चाल में बदलाव के कारण फ्लड फाइटिंग का काम बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। नदी जिस दिशा में दबाव बना रही थी, उसी हिसाब से बचाव सामग्री और सुरक्षात्मक उपाय किए गए। उन्होंने कहा कि विभागीय स्तर पर युद्धस्तर पर काम किया गया और फिलहाल तटबंध सुरक्षित है। इस पूरे अभियान में बिहार सरकार, विभागीय मंत्री तथा इलाके के दोनों मंत्रियों का सहयोग मिला। जिला प्रशासन, पुलिस बल और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी बचाव कार्य में पूरा सहयोग किया। अगले 10 दिन भी अहम, बढ़ सकता है जलस्तर अधिकारियों के अनुसार आने वाले करीब 10 दिनों में गंगा के जलस्तर में आधा से एक मीटर तक बढ़ोतरी की संभावना है। इसलिए खतरा पूरी तरह खत्म मानकर विभाग अभी आराम के मूड में नहीं है। तटबंध की लगातार निगरानी जारी रहेगी। अधिकारियों का कहना है कि पानी का स्तर सामान्य होने के बाद विभाग के चेयरमैन और विशेषज्ञों के साथ बैठक की जाएगी। नदी की मौजूदा चाल, कटान की दिशा और तटबंध की स्थिति का तकनीकी अध्ययन करने के बाद स्थायी समाधान पर फैसला लिया जाएगा। इस्माइलपुर मॉडल से मिल सकता है राघोपुर को स्थायी सुरक्षा कवच जल संसाधन विभाग अब राघोपुर तटबंध के लिए भी ऐसा तकनीकी समाधान तलाश रहा है, जिससे हर साल गंगा के बढ़ते दबाव के समय आपात स्थिति पैदा न हो। अधिकारियों के अनुसार इस्माईलपुर इलाके में जिस तरह शीट पाइलिंग के जरिए बांध को सुरक्षित किया गया है, उसी तरह राघोपुर में भी जरूरत के अनुसार शीट पाइलिंग, रिवेटमेंट और तटबंध के अलाइनमेंट में बदलाव जैसे विकल्पों पर विचार किया जाएगा। यानी फिलहाल गंगा के वार से बांध बच गया है, लेकिन विभाग अब ऐसी तैयारी में जुटना चाहता है कि अगली बार नदी अपनी चाल बदले तो राघोपुर का तटबंध सिर्फ बोरी और फ्लड फाइटिंग सामग्री के भरोसे न रहे। ग्रामीणों की उम्मीद- अब ‘मरम्मति’ नहीं, स्थायी सुरक्षा चाहिए राघोपुर और शंकरपुर के ग्रामीणों ने कहा कि संकट के समय जिस तरह इंजीनियरों और कर्मचारियों ने मोर्चा संभाला, वह सराहनीय है। ग्रामीणों के मुताबिक तटबंध को बचाने में अधिकारियों और मजदूरों की मेहनत ने गांव को बड़े खतरे से बाहर निकाला है। लेकिन ग्रामीणों की सबसे बड़ी मांग अब यही है कि तटबंध की ऐसी स्थायी मरम्मति और मजबूती की जाए, जिससे हर साल बाढ़ और कटाव के समय ग्रामीणों की सांसें न अटकें।फिलहाल गंगा का दबाव संभाल लिया गया है, तटबंध सुरक्षित है और इंजीनियरों की नजर अभी भी नदी पर टिकी है। भागलपुर में गंगा की धार बदलने से राघोपुर-शंकरपुर तटबंध पर खतरा बढ़ गया। नदी का बहाव तटबंध की तरफ खिसक गया, जिससे 35 से 45 मीटर गहरी धारा और 5 मीटर प्रति सेकंड की रफ्तार ने जल संसाधन विभाग की परेशानी बढ़ा दी। 26 जुलाई को छोटी हलालपुर गांव के पास गंगा का कटाव शुरू हुआ। मुख्य अभियंता जय प्रकाश के नेतृत्व में 4 दर्जन से ज्यादा इंजीनियरों और कर्मचारियों ने मोर्चा संभाला। करीब 700 मीटर के इलाके में बचाव कार्य चला। नदी का मुख्य तल तटबंध की ओर खिसकने और चौड़ाई कम होने से पानी का दबाव बहुत बढ़ गया था। टीम ने तीन शिफ्टों में दिन-रात निगरानी की और फ्लड फाइटिंग सामग्री का इस्तेमाल किया। लगातार काम के बाद फिलहाल तटबंध को सुरक्षित कर लिया गया है और अब स्थायी समाधान की तैयारी है। ग्रामीण बोले- ‘बांध बचा, लेकिन अब पक्का इलाज चाहिए’ छोटी हलालपुर की ग्रामीण चमेली देवी ने कहा कि विभागीय मंत्री, इंजीनियर और मजदूर लगातार मौके पर डटे रहे। अधिकारियों की निगरानी में मजदूरों ने रात-दिन काम किया और बांध को टूटने से बचाया। उन्होंने कहा कि फिलहाल खतरा टल गया है, लेकिन सिर्फ अभी के लिए बांध बचाना पर्याप्त नहीं है। गांव को भविष्य के कटाव और बाढ़ से सुरक्षित करने के लिए तटबंध को और मजबूत और स्थायी तरीके से पक्का किया जाना चाहिए। वहीं शंकरपुर निवासी राजेश कुमार ने भी इंजीनियरों और कर्मचारियों की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 से इस इलाके में कटाव का दौर देखा जा रहा है, लेकिन इस बार जिस तरह इंजीनियर और कर्मचारी 24 घंटे तटबंध पर डटे रहे, वैसी सक्रियता पहले देखने को नहीं मिली। राजेश कुमार के मुताबिक, जलस्तर में कमी आने के बावजूद अधिकारी अभी भी तटबंध की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इंजीनियर अपना घर-परिवार छोड़कर लगातार मौके पर डटे हैं। ग्रामीणों ने जल संसाधन विभाग की पूरी टीम के प्रति आभार जताया। गंगा की ‘चाल’ समझकर इंजीनियरों ने संभाला मोर्चा मुख्य अभियंता इंजीनियर जय प्रकाश ने बताया कि राघोपुर-शंकरपुर तटबंध के पास गंगा की बहाव प्रवृत्ति यानी नदी की चाल में बदलाव के कारण फ्लड फाइटिंग का काम बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। नदी जिस दिशा में दबाव बना रही थी, उसी हिसाब से बचाव सामग्री और सुरक्षात्मक उपाय किए गए। उन्होंने कहा कि विभागीय स्तर पर युद्धस्तर पर काम किया गया और फिलहाल तटबंध सुरक्षित है। इस पूरे अभियान में बिहार सरकार, विभागीय मंत्री तथा इलाके के दोनों मंत्रियों का सहयोग मिला। जिला प्रशासन, पुलिस बल और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी बचाव कार्य में पूरा सहयोग किया। अगले 10 दिन भी अहम, बढ़ सकता है जलस्तर अधिकारियों के अनुसार आने वाले करीब 10 दिनों में गंगा के जलस्तर में आधा से एक मीटर तक बढ़ोतरी की संभावना है। इसलिए खतरा पूरी तरह खत्म मानकर विभाग अभी आराम के मूड में नहीं है। तटबंध की लगातार निगरानी जारी रहेगी। अधिकारियों का कहना है कि पानी का स्तर सामान्य होने के बाद विभाग के चेयरमैन और विशेषज्ञों के साथ बैठक की जाएगी। नदी की मौजूदा चाल, कटान की दिशा और तटबंध की स्थिति का तकनीकी अध्ययन करने के बाद स्थायी समाधान पर फैसला लिया जाएगा। इस्माइलपुर मॉडल से मिल सकता है राघोपुर को स्थायी सुरक्षा कवच जल संसाधन विभाग अब राघोपुर तटबंध के लिए भी ऐसा तकनीकी समाधान तलाश रहा है, जिससे हर साल गंगा के बढ़ते दबाव के समय आपात स्थिति पैदा न हो। अधिकारियों के अनुसार इस्माईलपुर इलाके में जिस तरह शीट पाइलिंग के जरिए बांध को सुरक्षित किया गया है, उसी तरह राघोपुर में भी जरूरत के अनुसार शीट पाइलिंग, रिवेटमेंट और तटबंध के अलाइनमेंट में बदलाव जैसे विकल्पों पर विचार किया जाएगा। यानी फिलहाल गंगा के वार से बांध बच गया है, लेकिन विभाग अब ऐसी तैयारी में जुटना चाहता है कि अगली बार नदी अपनी चाल बदले तो राघोपुर का तटबंध सिर्फ बोरी और फ्लड फाइटिंग सामग्री के भरोसे न रहे। ग्रामीणों की उम्मीद- अब ‘मरम्मति’ नहीं, स्थायी सुरक्षा चाहिए राघोपुर और शंकरपुर के ग्रामीणों ने कहा कि संकट के समय जिस तरह इंजीनियरों और कर्मचारियों ने मोर्चा संभाला, वह सराहनीय है। ग्रामीणों के मुताबिक तटबंध को बचाने में अधिकारियों और मजदूरों की मेहनत ने गांव को बड़े खतरे से बाहर निकाला है। लेकिन ग्रामीणों की सबसे बड़ी मांग अब यही है कि तटबंध की ऐसी स्थायी मरम्मति और मजबूती की जाए, जिससे हर साल बाढ़ और कटाव के समय ग्रामीणों की सांसें न अटकें।फिलहाल गंगा का दबाव संभाल लिया गया है, तटबंध सुरक्षित है और इंजीनियरों की नजर अभी भी नदी पर टिकी है।

