खून में कैल्शियम कम या ज्यादा होने का ऐसे चलता है पता, जानें Calcium Blood Test कब कराया जाता है

खून में कैल्शियम कम या ज्यादा होने का ऐसे चलता है पता, जानें Calcium Blood Test कब कराया जाता है

Calcium Blood Test: जब भी कैल्शियम का नाम आता है, तो हममें से ज्यादातर लोग केवल मजबूत हड्डियों और दांतों के बारे में ही सोचते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कैल्शियम हमारे दिल को सही तरीके से धड़काने, मांसपेशियों को सुचारू रूप से चलाने और नसों के जरिए दिमाग तक मैसेज पहुंचाने के लिए भी बेहद जरूरी होता है? हमारे शरीर में मौजूद ज्यादातर कैल्शियम हड्डियों में जमा होता है, लेकिन इसका एक छोटा और बेहद जरूरी हिस्सा हमारे खून में लगातार बहता रहता है। खून में कैल्शियम का स्तर न तो बहुत ज्यादा होना अच्छा होता है और न ही बहुत कम। अगर शरीर में इसका संतुलन बिगड़ जाए, तो कई तरह की सेहत संबंधी परेशानियां सामने आने लगती हैं। इसी संतुलन या स्तर की जांच करने के लिए डॉक्टर कैल्शियम ब्लड टेस्ट (Calcium Blood Test) कराने की सलाह देते हैं। आइए समझते हैं कि यह टेस्ट क्या है, यह कब कराया जाता है और इसके नतीजे क्या बताते हैं।

कैल्शियम ब्लड टेस्ट आखिर क्या होता है?

वेबएमडी के मुताबिक, कैल्शियम ब्लड Test एक साधारण सा खून का परीक्षण है, जिससे यह पता चलता है कि आपके रक्त में कैल्शियम की मात्रा सही है या नहीं। प्रयोगशाला (Lab) में यह टेस्ट मुख्य रूप से दो तरीकों से किया जाता है;

  • टोटल कैल्शियम टेस्ट (Total Calcium Test)- यह सबसे आम टेस्ट है। यह आपके खून में मौजूद कुल कैल्शियम को मापता है। इसमें वह कैल्शियम भी शामिल होता है जो खून में मौजूद प्रोटीन (मुख्य रूप से एल्ब्यूमिन) से जुड़ा होता है और वह भी जो अलग रहता है।
  • आयोनाइज्ड कैल्शियम टेस्ट (Ionized Calcium Test)- यह टेस्ट खून में मौजूद ‘फ्री’ या स्वतंत्र कैल्शियम का सटीक स्तर बताता है, जो किसी प्रोटीन से बंधा नहीं होता। यह जांच तब की जाती है जब मरीज को किडनी, लिवर या थायरॉइड से जुड़ी कोई गंभीर बीमारी हो।

डॉक्टर आपको यह टेस्ट कराने की सलाह कब देते हैं?

क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, डॉक्टर रुटीन हेल्थ चेकअप के दौरान या जब शरीर में कुछ खास तरह की दिक्कतें दिखने लगती हैं, तब यह टेस्ट लिखते हैं। अगर आपको नीचे दिए गए लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो कैल्शियम ब्लड टेस्ट कराने की जरूरत पड़ सकती है;

  • हाथ-पैरों की उंगलियों या होठों के आसपास अजीब सी झनझनाहट या सुन्नपन महसूस होना।
  • मांसपेशियों में बार-बार खिंचाव, दर्द या ऐंठन (Cramps) होना।
  • बहुत ज्यादा कमजोरी, थकान या सुस्ती लगना।
  • त्वचा का बहुत ज्यादा सूखा या रुखा होना।
  • अचानक दिल की धड़कन का अनियंत्रित या तेज हो जाना।
  • जब खून में कैल्शियम ज्यादा होने (Hypercalcemia) के लक्षण दिखें:
  • हर समय बहुत ज्यादा प्यास लगना और बार-बार पेशाब जाना।
  • पेट में दर्द होना, जी मिचलाना, उल्टी आना या लगातार कब्ज (Constipation) बने रहना।
  • बहुत ज्यादा सुस्ती, भ्रम की स्थिति या मिजाज में चिड़चिड़ापन रहना।
  • हड्डियों और जोड़ों में लगातार दर्द महसूस होना।
  • भूख कम लगना और अकारण वजन घटना।

किन बीमारियों का पता लगाने में मदद करता है यह टेस्ट?

कैल्शियम का स्तर सिर्फ हड्डियों से नहीं जुड़ा होता, बल्कि यह शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों के काम करने के तरीके को भी दर्शाता है। यह टेस्ट कई बीमारियों की पहचान करने में मदद करता है, जैसे;

  • पैराथायराइड ग्रंथि की समस्याएं।
  • किडनी की बीमारी।
  • विटामिन D की कमी।
  • हड्डियों की कमजोरी (Osteoporosis)।
  • कैंसर या अन्य गंभीर स्थितियां।

टेस्ट के नतीजे क्या दर्शाते हैं?

  • कैल्शियम का स्तर सामान्य से कम होना (Low Level)।
  • कैल्शियम का स्तर सामान्य से ज्यादा होना (High Level)।

टेस्ट कराने से पहले रखें इन बातों का ध्यान

यह एक बहुत ही साधारण ब्लड टेस्ट है, जिसके लिए लैब में सिर्फ आपकी बांह से थोड़ा सा खून लिया जाता है। ज्यादातर मामलों में इसके लिए खाली पेट (Fasting) रहने की जरूरत नहीं होती, लेकिन अगर डॉक्टर ने कोई अन्य टेस्ट भी साथ में लिखा है, तो वे खाली पेट आने की सलाह दे सकते हैं। अगर आप कोई दवा, एंटासिड या कैल्शियम/विटामिन D के सप्लीमेंट्स ले रहे हैं, तो टेस्ट से पहले अपने डॉक्टर को जरूर बताएं। कई बार कुछ दवाएं टेस्ट के नतीजों पर असर डाल सकती हैं।

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