राजस्थान हाईकोर्ट ने समान तथ्यों और घटनाक्रम को लेकर पहले खारिज की गई एफआईआर के बावजूद दोबारा एफआईआर दर्ज करने के मामले में अंतरिम आदेश दिया है। कोर्ट ने इस नई एफआईआर में आगे की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। न्यायाधीश कुलदीप माथुर की एकलपीठ ने डॉ. विनोद शैली और डॉ. जितेंद्र खेतावत की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किए। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से आग्रह किया था कि समान आधार पर दोबारा केस दर्ज करना अनुचित है। अगले आदेश तक लगाई रोक याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट धीरेन्द्र सिंह ने कोर्ट को बताया कि चोपासनी हाउसिंग बोर्ड थाने में दर्ज वर्तमान एफआईआर उन्हीं तथ्यों से संबंधित है, जिनके आधार पर 2024 में एफआईआर संख्या 388/2024 दर्ज हुई थी। एफआईआर को दोनों डॉक्टरों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने 5 मई 2025 को विस्तृत आदेश पारित करते हुए उस एफआईआर को रद्द कर दिया था। इसके बाद शिकायतकर्ता ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 4 सितंबर 2025 को दोनों एसएलपी (विशेष अनुमति याचिकाएं) खारिज कर दी थीं। हालांकि, शिकायतकर्ता को कानून के तहत उपलब्ध सिविल उपाय अपनाने की स्वतंत्रता दी गई थी। याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में दलील दी कि इन न्यायिक आदेशों के बावजूद, मृतका प्रियंका बिश्नोई के पिता रक्षपाल बिश्नोई की शिकायत पर मेट्रोपोलिटन संख्या-8, जोधपुर मेट्रोपोलिटन ने पुलिस को दोबारा एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया। पूर्व एफआईआर के खारिज होने की जानकारी होने के बावजूद यह निर्देश दिया गया, जिसके बाद नई एफआईआर दर्ज हुई। एकलपीठ ने मामले को विचारणीय मानते हुए याचिका स्वीकार कर नोटिस जारी किए। राज्य की ओर से लोक अभियोजक ने नोटिस स्वीकार किया, जबकि दूसरे प्रतिवादी को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए। कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में स्पष्ट किया कि एफआईआर के संबंध में आगे की कार्यवाही अगले आदेश तक रोक दी गई है।


