भाजपा विधायक उमाकांत शर्मा ने सनातनी परिवारों से अपने बच्चों को क्रिश्चियन कॉन्वेंट परंपरा के विद्यालयों और मुस्लिम मदरसों से हटाने की अपील की है। सिरोंज विधायक ने फेसबुक पोस्ट के जरिए यह बात कही। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने संबंधित पत्र सोशल मीडिया पर साझा किया है। इसी बीच विदिशा जिले के सिरोंज में विद्यार्थियों की संख्या कम होने के कारण 11 मदरसों के संचालकों ने संस्थान बंद करने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग को आवेदन दिए हैं। विधायक ने फेसबुक पोस्ट में क्या लिखा? सिरोंज से भाजपा विधायक उमाकांत शर्मा ने अपनी पोस्ट में लिखा, “सच्चे सनातनी बंधु माता और बहन को अपने बच्चे क्रिश्चियन कॉन्वेंट परंपरा के विद्यालयों से तत्काल हटा लेना चाहिए। साथ ही यदि किसी मुस्लिम मदरसे में पढ़ रहे हो, तो वहां से भी हटा लेना चाहिए। इसी में समाज का हित है।” विधायक ने अपनी अपील में कॉन्वेंट विद्यालयों और मदरसों, दोनों से बच्चों को हटाने की बात कही है। उन्होंने इसे समाज के हित से जोड़ा है। हालांकि, पोस्ट में किसी विशेष स्कूल या मदरसे का नाम नहीं लिया गया है। 11 मदरसों के बंद करने के आवेदन विदिशा जिले के सिरोंज में विद्यार्थियों की संख्या कम होने के कारण 11 मदरसों के संचालकों ने इन्हें बंद करने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग को आवेदन दिए हैं। जनपद शिक्षा केंद्र (सर्व शिक्षा अभियान), सिरोंज ने इन संस्थानों को एजुकेशन पोर्टल 3.0 और यूडाइज पोर्टल पर बंद दर्ज करने के लिए जिला शिक्षा केंद्र को पत्र लिखा है। इस पत्र पर 31 जनवरी 2026 की तारीख दर्ज है। इसमें कहा गया है कि सूची में शामिल मदरसों के संचालकों ने विद्यार्थियों की संख्या कम होने के कारण संस्थान बंद करने के लिए आवेदन दिए हैं। पत्र में सभी 11 मदरसों के नाम और उनकी यूडाइज पहचान संख्या भी दर्ज हैं। उपलब्ध दस्तावेज के मुताबिक, मदरसों को बंद दर्ज करने की प्रक्रिया संचालकों के आवेदन के बाद शुरू की गई। पत्र में पोर्टल पर इन संस्थानों को बंद दर्ज करने के लिए कहा गया है। कानूनगो का दावा- मदरसों में हिंदू बच्चे भी पढ़ रहे थे राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने पत्र सोशल मीडिया पर साझा करते हुए लिखा, “शुभ समाचार! मेरे गृह जिले विदिशा मध्य प्रदेश में पिछले एक वर्ष में 11 मदरसे बंद करने की कार्यवाही हुई है, विदिशा के मदरसों में हिंदू बच्चों को रखने के मामले भी थे।” कानूनगो ने दावा किया कि जिला प्रशासन ने स्कूली शिक्षा के प्रति जागरूकता अभियान चलाया और शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) का पालन कराया। उनके मुताबिक, इससे बच्चों के सामान्य स्कूलों में दाखिले हो सके और मदरसे खाली हो गए। उन्होंने जिला कलेक्टर और शिक्षा विभाग को बधाई देते हुए कहा कि इससे बच्चों को उनका अधिकार मिलेगा और करदाताओं के पैसे की बर्बादी रुकेगी। हालांकि, कानूनगो की सोशल मीडिया पोस्ट में हिंदू बच्चों की संख्या, उनके दाखिले और सूची में शामिल 11 मदरसों में से प्रत्येक के बंद होने की स्थिति का अलग-अलग ब्योरा नहीं दिया गया है। उपलब्ध विभागीय पत्र में संस्थानों को बंद करने के लिए संचालकों की ओर से आवेदन दिए जाने की बात कही गई है।

