क्या Meta केवल एक Intermediary है? Deepfake विवाद के बीच IT Act की समीक्षा करेगी सरकार

क्या Meta केवल एक Intermediary है? Deepfake विवाद के बीच IT Act की समीक्षा करेगी सरकार

केंद्र सरकार ने वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनी मेटा से ‘डीपफेक पर कार्रवाई करने को कहा है और कंपनी के साथ हुई बैठकों के नतीजों की समीक्षा के बाद आगे उठाए जाने वाले कदमों को लेकर कानूनी राय ली जाएगी। सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी।
सूत्रों ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि मूल सवाल यह है कि मेटा भारतीय कानून के तहत मध्यस्थों के लिए निर्धारित प्रावधानों का पालन कर रहा है या उनका उल्लंघन कर रहा है और सरकार इस पहलू की जांच कर रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार अन्य ऑनलाइन मंचों को भी बुलाएगी और यह जांच करेगी कि क्या वे भारतीय कानून के तहत ‘मध्यस्थ’ की परिके दायरे में आते हैं।

सूत्रों ने आगे कहा कि यह मुद्दा इस बात पर केंद्रित है कि क्या कोई ऐसा मंच जो सक्रिय रूप से यह तय करता है कि उपयोगकर्ता क्या देखें, वह सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम के तहत मध्यस्थ के दर्जे का दावा जारी रख सकता है।
यह मुद्दा इसलिए महत्व रखता है क्योंकि आईटी अधिनियम की धारा 79 कानून के प्रावधानों के पालन और उचित सावधानी की आवश्यकताओं के अधीन, मध्यस्थों को तीसरे पक्ष की सामग्री के दायित्व से सुरक्षा प्रदान करती है।

सूत्रों के अनुसार, यदि मेटा और अन्य ऑनलाइन मंच यह तय करते हैं कि उपयोगकर्ताओं को कौन-सी सामग्री दिखाई जाएगी तो यह एक तरह से ‘प्रकाशन’ के समान है और ऐसे में उन्हें अपने कदमों की जिम्मेदारी भी लेनी होगी।
उन्होंने कहा कि जब किसी मंच की अनुशंसा प्रणाली यह तय करती है कि किस व्यक्ति को कौन-सी सामग्री दिखाई जाए और जब वह भुगतान वाली सामग्री को बढ़ावा देती है तो उसके ‘मध्यस्थ’ के दर्जे को लेकर सवाल उठते हैं।

सूत्रों ने कहा कि सरकार ने मेटा को डीपफेक से निपटने के लिए ठोस कार्रवाई करने को कहा है। कंपनी के साथ अब तक हुई बैठकों के परिणामों की समीक्षा के बाद यह तय करने के लिए कानूनी राय ली जाएगी कि आगे क्या कार्रवाई की जा सकती है।
केंद्र सरकार ने वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनी मेटा की टीम से दो दिन की कड़ी पूछताछ के बाद शुक्रवार को तीसरे दिन तकनीकी स्तर पर विस्तृत चर्चा की, जिसमें डीपफेक, बाल यौन शोषण सामग्री (सीएसएएम) और बिना लेबल वाली एआई-जनित सामग्री के संबंध में कंपनी की कार्ययोजना पर विशेष ध्यान रहा।

मेटा के साथ सरकार की यह बैठक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के फेसबुक पोस्ट पर अस्थायी रोक के बाद बुलाई गई थी। हालांकि मेटा ने प्रधानमंत्री की पोस्ट को एआई आधारित ‘कंटेंट फिल्टर’ की गलती मानते हुए बहाल कर दिया था और माफी मांगी थी।
यह मुद्दा महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि मध्यस्थों को निर्धारित शर्तों के अनुपालन के अधीन, अधिनियम के तहत कुछ कानूनी सुरक्षा प्राप्त होती है। ऐसे में, सोशल मीडिया मंचों सहित मध्यस्थों के लिए आईटी नियम, 2021 के तहत अपने मंच पर या उसके माध्यम से अपलोड, प्रकाशित, होस्ट, साझा या प्रसारित की गई तीसरे पक्ष की जानकारी के संबंध में दायित्व से छूट प्राप्त करने की शर्त के रूप में उचित सावधानी बरतना कानूनी रूप से अनिवार्य है।

इन उचित सावधानी दायित्वों का पालन करने में विफल रहने पर आईटी अधिनियम की धारा 79 के तहत दायित्व से छूट समाप्त हो सकती है, और ऐसे मध्यस्थ आईटी अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता सहित किसी भी कानून के तहत प्रदान की गई परिणामी कार्रवाई के लिए भी उत्तरदायी हो सकते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि सरकार यह तय करने से पहले कि कानूनी सलाह ली जाए या नहीं, इन वार्ताओं के परिणामों की समीक्षा करेगी।
आगामी सप्ताह में एक और बैठक होने की संभावना है।

सरकारी सूत्रों ने कहा कि इसका उद्देश्य सेंसरशिप नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि कंपनी भारतीय कानूनों का पालन करे।
सूत्रों ने पहले कहा था कि मेटा ने स्वीकार किया कि गंभीर मुद्दे थे और भरोसा दिया कि वह उन्हें हल करने के लिए निरंतर कार्रवाई करेगी।

उन्होंने कहा कि सरकार कंपनी पर अपनी विभिन्न चिंताओं को दूर करने के लिए निरंतर उपाय, कार्रवाई और सुधार करने का दबाव बनाती रहेगी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हालिया फेसबुक पोस्ट को अस्थायी रूप से प्रतिबंधित करने पर सरकार द्वारा भेजे गए समन के बाद, मेटा के वैश्विक मामलों के प्रमुख जोएल कापलन के नेतृत्व में मेटा की टीम ने बुधवार और बृहस्पतिवार को आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव और आईटी सचिव एस कृष्णन से मुलाकात की थी।

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