क्या करने वाले हैं किम जोंग उन? चीन-उत्तर कोरिया को जोड़ने वाला पुल लगभग बनकर तैयार, सैटेलाइट तस्वीर से खुला राज

क्या करने वाले हैं किम जोंग उन? चीन-उत्तर कोरिया को जोड़ने वाला पुल लगभग बनकर तैयार, सैटेलाइट तस्वीर से खुला राज

Kim Jong Un News: उत्तर कोरिया ने चीन के साथ लंबे समय से अधूरे पड़े नए यालू नदी पुल पर अपनी तरफ का काम अचानक तेज कर दिया है। दक्षिण कोरिया की सैटेलाइट इमेज कंपनी एसआई एनालिटिक्स ने यह जानकारी दी है।

एसआई एनालिटिक्स ने यह भी बताया कि तेजी से चल रहे काम को देखते हुए यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि नए सीमा शुल्क और इमिग्रेशन भवन का ढांचा सितंबर की शुरुआत तक लगभग पूरा हो जाएगा।

12 साल से रुका था काम

एसआई एनालिटिक्स ने बताया कि 12 साल से रुका पड़ा प्रोजेक्ट महज चार महीनों में आगे बढ़ गया। कंपनी ने सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर बताया कि सड़क पर पक्का काम, चारों तरफ बाड़ और अतिरिक्त अस्थायी इमारतों को हटाने जैसे काम भी अंतिम चरण में हैं। उत्तर कोरिया की तरफ पुल के प्रवेश द्वार पर बड़ा गेट बनाया गया है। उस पर देश का पूरा नाम और बड़ा राष्ट्रीय झंडा भी लगाया गया है।

चीन ने 2014 में पुल बना लिया था, फिर क्यों रुका काम?

यह करीब तीन किलोमीटर लंबा दो तरफा पुल है, जिसे चीन ने 2014 में ही पूरा कर लिया था। मकसद था डांडोंग के फ्री ट्रेड जोन को उत्तर कोरिया के सिनुइजू शहर से जोड़ना।

उस समय उम्मीद थी कि इससे दोनों देशों के व्यापारिक रिश्ते मजबूत होंगे और उत्तर कोरिया कुछ आर्थिक सुधार की राह पर बढ़ेगा। लेकिन उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षणों के कारण रिश्ते बिगड़े और पुल की उत्तर कोरिया वाली तरफ का काम अधूरा रह गया।

अब चीन-उत्तर कोरिया के अच्छे हुए रिश्ते

अब हालात बदलते दिख रहे हैं। जून में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के उत्तर कोरिया दौरे के बाद दोनों देशों के बीच यात्री ट्रेन सेवा और सीधी उड़ानें दोबारा शुरू हुईं। मई में चीन वाली तरफ पुल पर ट्रक और यात्री वाहन के लिए लेन के निशान भी लगाए गए।

रूस के साथ भी नया सड़क संपर्क

इसी हफ्ते उत्तर कोरिया और रूस ने अपना पहला सड़क पुल भी खोल दिया। एसआई एनालिटिक्स का कहना है कि पूर्वी और पश्चिमी दोनों तरफ बड़े परिवहन संपर्क बनाने से उत्तर कोरिया महाद्वीप से जुड़ने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ा रहा है।

कोविड के बाद रिश्ते ठंडे पड़ गए थे। उत्तर कोरिया ने रूस को यूक्रेन युद्ध में हथियार और सैनिक भेजकर मॉस्को के करीब जाने की कोशिश की। अब चीन फिर से उसे अपनी तरफ खींचने की कोशिश कर रहा है।

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