कौशांबी मेडिकल कॉलेज में स्टेमी केयर कार्यक्रम के तहत 22 वर्षीय युवक की समय पर इलाज मिलने से जान बच गई। सीने में तेज दर्द, सांस लेने में परेशानी और अत्यधिक पसीने की शिकायत के बाद युवक को सुबह करीब 8:15 बजे मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया था। जांच में एसटी उन्नयन वाला हृदयाघात (STEMI) सामने आया। कड़ा धाम क्षेत्र से आए युवक के इमरजेंसी में पहुंचते ही डॉक्टरों ने तत्काल ईसीजी कराया। ईसीजी रिपोर्ट प्रयागराज स्थित हृदय रोग विशेषज्ञ केंद्र के हब पर भेजी गई। वहां विशेषज्ञ चिकित्सकों ने रिपोर्ट देखकर तत्काल परामर्श दिया और रक्त का थक्का घोलने के लिए थ्रोम्बोलाइसिस की सलाह दी। ईसीजी के बाद तुरंत शुरू हुआ इलाज बिना समय गंवाए इमरजेंसी में ही मरीज को जीवनरक्षक दवाएं दी गईं और थ्रोम्बोलाइसिस की प्रक्रिया शुरू की गई। करीब एक घंटे तक चिकित्सकीय निगरानी में रखने के बाद मरीज की हालत में सुधार देखा गया। इसके बाद आगे के विशेषज्ञ उपचार के लिए मरीज को 108 एंबुलेंस से प्रयागराज स्थित एसआरएन हब रेफर कर दिया गया। इमरजेंसी टीम ने तेजी से किया उपचार मरीज के इलाज में आकस्मिक चिकित्सा अधिकारी डॉ. जयप्रकाश, चिकित्सक डॉ. संध्या खरे, स्टाफ नर्स शिखा और वार्ड बॉय समेत पूरी इमरजेंसी टीम की भूमिका रही। टीम ने मरीज के पहुंचने से लेकर ईसीजी, विशेषज्ञ परामर्श, दवाएं, थ्रोम्बोलाइसिस और रेफरल तक की प्रक्रिया तेजी से पूरी की। प्राचार्य की निगरानी में चल रहा स्टेमी केयर कार्यक्रम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. हरिओम कुमार सिंह के मार्गदर्शन और निगरानी में स्टेमी केयर कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। इसके तहत गंभीर हृदयाघात के मरीजों को स्थानीय स्तर पर तत्काल ईसीजी और प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने के साथ विशेषज्ञों से तुरंत परामर्श लिया जाता है। इस मामले में भी समय पर ईसीजी, विशेषज्ञों की तत्काल सलाह और थ्रोम्बोलाइसिस से मरीज की हालत में सुधार हुआ। इसके बाद उसे उच्च केंद्र पर आगे के इलाज के लिए रेफर किया गया।

