सीतामढ़ी में शुक्रवार को ‘नीतीश संवाद-जीविका के 20 साल बेमिसाल’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। गायघाट विधायक कोमल सिंह ने कहा कि एक समय था, जब महिलाओं को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी पुरुषों पर निर्भर रहना पड़ता था। 10 रुपए की जरूरत होने पर भी पति या घर के पुरुष सदस्य से मांगना पड़ता था। घर से बाहर निकलने में भी डर लगता था। अब तस्वीर बदली है। महिलाएं घर से बाहर निकलकर स्वरोजगार कर रही हैं और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। कार्यक्रम शहर के एक निजी होटल के सभागार में आयोजित किया गया था। इसमें विधायक पंकज मिश्रा, विधायक कोमल सिंह, एमएलसी रेखा देवी समेत जदयू के कई नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। कोमल सिंह बोलीं- 1980 के दशक में अलग थी महिलाओं की स्थिति कोमल सिंह ने कहा कि 1980 के दशक के दौर को याद करें तो महिलाओं की स्थिति बिल्कुल अलग थी। महिलाओं को अपने खर्च के लिए भी पुरुषों के सामने हाथ फैलाना पड़ता था। घर से बाहर निकलने में असुरक्षा का भाव रहता था। उन्होंने कहा कि उनके अनुसार, नीतीश कुमार के नेतृत्व में हुए बदलावों ने महिलाओं को घर की चारदीवारी से बाहर निकलकर आगे बढ़ने का अवसर दिया। जीविका से जुड़कर महिलाएं कर रहीं स्वरोजगार विधायक ने कहा कि जीविका से जुड़ने के बाद महिलाएं अब किसी पर आश्रित रहने के बजाय खुद पर निर्भर हो रही हैं। वे समूहों के माध्यम से आर्थिक गतिविधियों से जुड़ रही हैं, स्वरोजगार कर रही हैं और दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर रही हैं। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने महिलाओं के लिए सबसे अधिक काम किया है और जीविका के माध्यम से बेटियों और महिलाओं को आगे बढ़ाने का काम किया गया। पंकज मिश्रा बोले- अधिक से अधिक महिलाओं को योजनाओं से जोड़ें विधायक पंकज मिश्रा ने भी जीविका दीदियों को महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण की महत्वपूर्ण कड़ी बताया। उन्होंने सरकार की योजनाओं से अधिक से अधिक महिलाओं को जोड़ने पर जोर दिया। कार्यक्रम में एमएलसी रेखा देवी समेत अन्य नेताओं ने भी जीविका के 20 वर्षों के सफर और महिला सशक्तीकरण पर अपने विचार रखे। सीतामढ़ी में शुक्रवार को ‘नीतीश संवाद-जीविका के 20 साल बेमिसाल’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। गायघाट विधायक कोमल सिंह ने कहा कि एक समय था, जब महिलाओं को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी पुरुषों पर निर्भर रहना पड़ता था। 10 रुपए की जरूरत होने पर भी पति या घर के पुरुष सदस्य से मांगना पड़ता था। घर से बाहर निकलने में भी डर लगता था। अब तस्वीर बदली है। महिलाएं घर से बाहर निकलकर स्वरोजगार कर रही हैं और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। कार्यक्रम शहर के एक निजी होटल के सभागार में आयोजित किया गया था। इसमें विधायक पंकज मिश्रा, विधायक कोमल सिंह, एमएलसी रेखा देवी समेत जदयू के कई नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। कोमल सिंह बोलीं- 1980 के दशक में अलग थी महिलाओं की स्थिति कोमल सिंह ने कहा कि 1980 के दशक के दौर को याद करें तो महिलाओं की स्थिति बिल्कुल अलग थी। महिलाओं को अपने खर्च के लिए भी पुरुषों के सामने हाथ फैलाना पड़ता था। घर से बाहर निकलने में असुरक्षा का भाव रहता था। उन्होंने कहा कि उनके अनुसार, नीतीश कुमार के नेतृत्व में हुए बदलावों ने महिलाओं को घर की चारदीवारी से बाहर निकलकर आगे बढ़ने का अवसर दिया। जीविका से जुड़कर महिलाएं कर रहीं स्वरोजगार विधायक ने कहा कि जीविका से जुड़ने के बाद महिलाएं अब किसी पर आश्रित रहने के बजाय खुद पर निर्भर हो रही हैं। वे समूहों के माध्यम से आर्थिक गतिविधियों से जुड़ रही हैं, स्वरोजगार कर रही हैं और दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर रही हैं। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने महिलाओं के लिए सबसे अधिक काम किया है और जीविका के माध्यम से बेटियों और महिलाओं को आगे बढ़ाने का काम किया गया। पंकज मिश्रा बोले- अधिक से अधिक महिलाओं को योजनाओं से जोड़ें विधायक पंकज मिश्रा ने भी जीविका दीदियों को महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण की महत्वपूर्ण कड़ी बताया। उन्होंने सरकार की योजनाओं से अधिक से अधिक महिलाओं को जोड़ने पर जोर दिया। कार्यक्रम में एमएलसी रेखा देवी समेत अन्य नेताओं ने भी जीविका के 20 वर्षों के सफर और महिला सशक्तीकरण पर अपने विचार रखे।

