इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कानपुर देहात के एक किसान को करीब छह साल तक प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की किस्तों से वंचित रखने पर कड़ी टिप्पणी करते हुए बकाया राशि का भुगतान मय ब्याज के 30 नवंबर 2026 तक करने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज और 5,000 रुपये हर्जाना देने का भी निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ल की खंडपीठ ने विश्राम सिंह की रिट याचिका को स्वीकार करते हुए यह आदेश दिया। याचिकाकर्ता ने खुद ही पैरवी की याचिकाकर्ता विश्राम सिंह ने खुद पैरवी करते हुए कहा कि उनके बैंक शाखा का आई एफ एस सी कोड गलत दर्ज हो गया था। इस गलती के कारण वे योजना की 23 किस्तों से वंचित रहे। उन्होंने 8 जनवरी 2020 को उप कृषि निदेशक, कानपुर देहात को प्रार्थना पत्र देकर समस्या सुधारने की मांग की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उप कृषि निदेशक ने व्यक्तिगत हलफनामे में प्रार्थना पत्र मिलने से इन्कार नहीं किया। उनका कहना था कि उस समय वे इस पद पर नहीं थे, इसलिए शिकायत समय पर नहीं निपट सकी। विभाग के मुताबिक अब योजना का भुगतान आधार आधारित डीबीटी प्रणाली से होता है और केवल आई एफ एस सी कोड व खाता विवरण पर निर्भर नहीं है। पोर्टल रिकॉर्ड में याचिकाकर्ता की भूमि सीडिंग 29 अगस्त 2022 को और आधार सीडिंग 31 दिसंबर 2023 को सत्यापित दर्ज थी। भुगतान इसलिए रुका था क्योंकि ई-केवाईसी की स्थिति “नहीं” थी। कोर्ट ने दिया था अंतरिम आदेश कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद अधिकारियों ने कार्रवाई की और 18 सितंबर 2026 को ई-केवाईसी तथा फार्मर रजिस्ट्री की औपचारिकताएं पूरी कर दी गईं। डेटा उसी दिन पोर्टल के जरिए भारत सरकार को भेजा गया। विभाग ने बताया कि अगली किस्त नवंबर 2026 में जारी होने की उम्मीद है और बकाया व नियमित किस्त उसी समय खाते में आएगी। पीठ ने कहा कि भले ही यह मान लिया जाए कि लाभ ई-केवाईसी लंबित होने से रुका, फिर भी विभाग के पास इसका कोई औचित्य नहीं है कि 8 जनवरी 2020 के प्रार्थना पत्र पर तत्परता से कार्रवाई कर औपचारिकताएं क्यों पूरी नहीं कराई गईं। कोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता को बिना किसी गलती के कोर्ट आने को मजबूर होना पड़ा और वह लगभग छह साल तक परेशान रहा। बकाया किश्तों के साथ हर्जाना दें कोर्ट ने कहा बकाया किस्तों का भुगतान 30 नवंबर 2026 तक किया जाए और आगे की किस्तें नियमित रूप से देय होने पर दी जाएं। हर किस्त पर उसकी देय तिथि से वास्तविक भुगतान की तारीख तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज मिलेगा। 5,000 रुपये हर्जाना बकाया किस्तों के साथ याचिकाकर्ता को दिया जाए।

