‘किसानों को 2 नहीं,6 या 12 हजार की किस्त मिले’:गया में मांझी बोले-9.34 करोड़ किसानों के खाते में पहुंचे 18,690 करोड़; PM के सामने रखेंगे मांग

‘किसानों को 2 नहीं,6 या 12 हजार की किस्त मिले’:गया में मांझी बोले-9.34 करोड़ किसानों के खाते में पहुंचे 18,690 करोड़; PM के सामने रखेंगे मांग

किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत सालाना मिलने वाली 6 हजार रुपए की सहायता राशि बढ़ाकर 12 हजार रुपए की जाए। किसानों को हर किस्त में 2 हजार रुपए देने की जगह 6 या 12 हजार रुपए एक साथ दिए जाएं। यह मांग केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने गया जी में उठाई है। उन्होंने कहा, किसानों को खेती-किसानी के लिए अधिक आर्थिक मदद की जरूरत है। इस मुद्दे को वे खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने रखेंगे। मांझी शुक्रवार को गया जी के मानपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 24वीं किस्त जारी होने के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने किसानों को मिलने वाली आर्थिक सहायता बढ़ाने की जरूरत बताई। उनका कहना था कि मौजूदा समय में खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में किसानों को मिलने वाली सहायता राशि भी बढ़नी चाहिए, ताकि उन्हें खेती के जरूरी कामों में आर्थिक मदद मिल सके। अभी साल में तीन बार मिलते हैं 2-2 हजार रुपए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत पात्र किसानों को साल में 6 हजार रुपए दिए जाते हैं। यह राशि तीन किस्तों में सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाती है। हर किस्त में 2 हजार रुपए मिलते हैं। केंद्रीय मंत्री मांझी का सुझाव है कि इस व्यवस्था में बदलाव किया जाए। किसानों को मिलने वाली सालाना राशि बढ़ाकर 12 हजार रुपए की जाए। साथ ही, किस्त की रकम भी बढ़ाई जाए, ताकि किसानों को एक साथ अधिक पैसे मिल सकें। मांझी ने कहा कि वे किसानों के हित में यह मांग प्रधानमंत्री के सामने रखेंगे। हालांकि, यह उनकी ओर से रखा गया सुझाव है। योजना की राशि बढ़ाने को लेकर सरकार की ओर से फिलहाल किसी फैसले की घोषणा नहीं की गई है। 9.34 करोड़ किसानों के खाते में भेजे गए 18,690 करोड़ कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योजना की 24वीं किस्त जारी की। इसके तहत देश के 9.34 करोड़ से अधिक किसानों के बैंक खातों में 18,690 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि भेजी गई। यह पैसा सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया, ताकि किसानों को बिना किसी बिचौलिए के आर्थिक सहायता मिल सके। योजना का उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों समेत पात्र किसान परिवारों को खेती से जुड़े खर्चों में मदद देना है। इस राशि का इस्तेमाल किसान बीज, खाद, कीटनाशक और खेती के दूसरे जरूरी सामान खरीदने में कर सकते हैं। हालांकि, मौजूदा महंगाई और खेती की बढ़ती लागत के बीच सहायता राशि बढ़ाने की मांग भी लगातार उठती रही है। 521 कृषि इकाइयां देश को समर्पित, 12 हॉर्टिकल्चर क्लस्टर शुरू कार्यक्रम में किसानों के लिए कृषि क्षेत्र से जुड़ी दूसरी पहलों की भी शुरुआत की गई। कृषि अवसंरचना कोष के तहत आर्थिक मदद से तैयार 521 इकाइयों को राष्ट्र को समर्पित किया गया। इसके साथ ही 12 हॉर्टिकल्चर क्लस्टर यानी बागवानी समूहों की भी शुरुआत की गई। इन पहलों का उद्देश्य खेती से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं को बढ़ाना और किसानों को बागवानी के क्षेत्र में नए अवसर देना है। कृषि से जुड़ी इकाइयों के विकसित होने से फसल के रखरखाव, भंडारण और दूसरे जरूरी कामों में मदद मिल सकती है। वहीं, हॉर्टिकल्चर क्लस्टर के जरिए बागवानी करने वाले किसानों को एक जगह पर बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की पहल की गई है। वैज्ञानिक तरीके से खेती करने की दी गई जानकारी मानपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में जिला कृषि पदाधिकारी संजीव कुमार, कृषि वैज्ञानिक एवं मृदा संरक्षण विशेषज्ञ मनोज कुमार राय समेत कृषि विभाग के अधिकारी, वैज्ञानिक और किसान मौजूद रहे। कार्यक्रम में किसानों को खेती की आधुनिक तकनीकों और फसल उत्पादन बढ़ाने के तरीकों की जानकारी दी गई। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को वैज्ञानिक तरीके से खेती करने की सलाह दी। साथ ही, खेती में नई तकनीक अपनाकर लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने के बारे में बताया। किसानों को केंद्र और राज्य सरकार की कृषि योजनाओं का लाभ लेने के लिए भी जागरूक किया गया। कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि खेती को लाभकारी बनाने के लिए किसानों को आधुनिक तकनीक, बेहतर कृषि सुविधाओं और सरकारी योजनाओं से जोड़ना जरूरी है। वहीं, केंद्रीय मंत्री मांझी की ओर से किसान सम्मान निधि की राशि बढ़ाने की मांग ने किसानों को मिलने वाली आर्थिक सहायता पर नई चर्चा शुरू कर दी है। किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत सालाना मिलने वाली 6 हजार रुपए की सहायता राशि बढ़ाकर 12 हजार रुपए की जाए। किसानों को हर किस्त में 2 हजार रुपए देने की जगह 6 या 12 हजार रुपए एक साथ दिए जाएं। यह मांग केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने गया जी में उठाई है। उन्होंने कहा, किसानों को खेती-किसानी के लिए अधिक आर्थिक मदद की जरूरत है। इस मुद्दे को वे खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने रखेंगे। मांझी शुक्रवार को गया जी के मानपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 24वीं किस्त जारी होने के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने किसानों को मिलने वाली आर्थिक सहायता बढ़ाने की जरूरत बताई। उनका कहना था कि मौजूदा समय में खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में किसानों को मिलने वाली सहायता राशि भी बढ़नी चाहिए, ताकि उन्हें खेती के जरूरी कामों में आर्थिक मदद मिल सके। अभी साल में तीन बार मिलते हैं 2-2 हजार रुपए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत पात्र किसानों को साल में 6 हजार रुपए दिए जाते हैं। यह राशि तीन किस्तों में सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाती है। हर किस्त में 2 हजार रुपए मिलते हैं। केंद्रीय मंत्री मांझी का सुझाव है कि इस व्यवस्था में बदलाव किया जाए। किसानों को मिलने वाली सालाना राशि बढ़ाकर 12 हजार रुपए की जाए। साथ ही, किस्त की रकम भी बढ़ाई जाए, ताकि किसानों को एक साथ अधिक पैसे मिल सकें। मांझी ने कहा कि वे किसानों के हित में यह मांग प्रधानमंत्री के सामने रखेंगे। हालांकि, यह उनकी ओर से रखा गया सुझाव है। योजना की राशि बढ़ाने को लेकर सरकार की ओर से फिलहाल किसी फैसले की घोषणा नहीं की गई है। 9.34 करोड़ किसानों के खाते में भेजे गए 18,690 करोड़ कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योजना की 24वीं किस्त जारी की। इसके तहत देश के 9.34 करोड़ से अधिक किसानों के बैंक खातों में 18,690 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि भेजी गई। यह पैसा सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया, ताकि किसानों को बिना किसी बिचौलिए के आर्थिक सहायता मिल सके। योजना का उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों समेत पात्र किसान परिवारों को खेती से जुड़े खर्चों में मदद देना है। इस राशि का इस्तेमाल किसान बीज, खाद, कीटनाशक और खेती के दूसरे जरूरी सामान खरीदने में कर सकते हैं। हालांकि, मौजूदा महंगाई और खेती की बढ़ती लागत के बीच सहायता राशि बढ़ाने की मांग भी लगातार उठती रही है। 521 कृषि इकाइयां देश को समर्पित, 12 हॉर्टिकल्चर क्लस्टर शुरू कार्यक्रम में किसानों के लिए कृषि क्षेत्र से जुड़ी दूसरी पहलों की भी शुरुआत की गई। कृषि अवसंरचना कोष के तहत आर्थिक मदद से तैयार 521 इकाइयों को राष्ट्र को समर्पित किया गया। इसके साथ ही 12 हॉर्टिकल्चर क्लस्टर यानी बागवानी समूहों की भी शुरुआत की गई। इन पहलों का उद्देश्य खेती से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं को बढ़ाना और किसानों को बागवानी के क्षेत्र में नए अवसर देना है। कृषि से जुड़ी इकाइयों के विकसित होने से फसल के रखरखाव, भंडारण और दूसरे जरूरी कामों में मदद मिल सकती है। वहीं, हॉर्टिकल्चर क्लस्टर के जरिए बागवानी करने वाले किसानों को एक जगह पर बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की पहल की गई है। वैज्ञानिक तरीके से खेती करने की दी गई जानकारी मानपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में जिला कृषि पदाधिकारी संजीव कुमार, कृषि वैज्ञानिक एवं मृदा संरक्षण विशेषज्ञ मनोज कुमार राय समेत कृषि विभाग के अधिकारी, वैज्ञानिक और किसान मौजूद रहे। कार्यक्रम में किसानों को खेती की आधुनिक तकनीकों और फसल उत्पादन बढ़ाने के तरीकों की जानकारी दी गई। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को वैज्ञानिक तरीके से खेती करने की सलाह दी। साथ ही, खेती में नई तकनीक अपनाकर लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने के बारे में बताया। किसानों को केंद्र और राज्य सरकार की कृषि योजनाओं का लाभ लेने के लिए भी जागरूक किया गया। कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि खेती को लाभकारी बनाने के लिए किसानों को आधुनिक तकनीक, बेहतर कृषि सुविधाओं और सरकारी योजनाओं से जोड़ना जरूरी है। वहीं, केंद्रीय मंत्री मांझी की ओर से किसान सम्मान निधि की राशि बढ़ाने की मांग ने किसानों को मिलने वाली आर्थिक सहायता पर नई चर्चा शुरू कर दी है।  

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