किशनगंज जिले की शिक्षा व्यवस्था में नामांकन आंकड़ों की विश्वसनीयता को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां सरकारी स्कूलों में कई ऐसे छात्र-छात्राएं नामांकित पाए गए हैं, जो वास्तव में निजी विद्यालयों या मदरसों में पढ़ रहे हैं। इस दोहरे नामांकन का खुलासा जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुई एक समीक्षा बैठक के दौरान हुआ। इसके बाद शिक्षा विभाग ने ऐसे विद्यार्थियों की पहचान कर रिकॉर्ड अपडेट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। शिक्षा विभाग द्वारा 12 अगस्त 2026 को जारी निर्देशों के अनुसार, 7 अगस्त को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह तथ्य सामने आया। इसमें बताया गया कि जिले में बड़ी संख्या में बच्चे एक साथ दो अलग-अलग शिक्षण संस्थानों – सरकारी विद्यालय और निजी विद्यालय या मदरसे – में नामांकित हैं। तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई का लिया निर्णय हालांकि, उनकी नियमित पढ़ाई केवल एक ही संस्थान में हो रही है। विभाग ने इस स्थिति को गंभीर मानते हुए तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई का निर्णय लिया है। इस खुलासे के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं। यदि छात्र वास्तव में निजी विद्यालय या मदरसे में पढ़ रहे हैं, तो सरकारी स्कूलों के नामांकन रजिस्टर में उनका नाम क्यों दर्ज है? यह स्थिति विभागीय योजनाओं का लाभ लेने, नामांकन संख्या बढ़ाने, या विद्यालय परिवर्तन के बाद रिकॉर्ड अपडेट न होने के कारण उत्पन्न हो सकती है। पंजीकृत छात्रों और वास्तविक उपस्थिति के बीच का अंतर भी सरकारी स्कूलों के नामांकन आंकड़ों की सटीकता पर सवाल उठा रहा है। निजी विद्यालयों के प्राचार्यों को निर्देश जारी विभाग ने सभी सरकारी विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों, मदरसों के प्रधान मौलवियों और निजी विद्यालयों के प्राचार्यों को निर्देश जारी किए हैं। उन्हें ऐसे सभी विद्यार्थियों की प्राथमिकता के आधार पर पहचान करने को कहा गया है। पहचान के बाद, संबंधित छात्रों का विवरण U-DISE+ पोर्टल के ‘ड्रॉप बॉक्स’ में दर्ज किया जाएगा। जिस संस्थान में छात्र वास्तव में अध्ययनरत है, वह विद्यालय या मदरसा छात्र के रिकॉर्ड को अपने U-DISE+ पोर्टल पर ‘इंपोर्ट’ कर सकेगा। शिक्षा विभाग का मानना है कि इस प्रक्रिया से जिले में वास्तविक नामांकन और उपस्थिति का सही आंकड़ा सामने आएगा। रिकॉर्ड की सफाई पूरी होने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि कितने छात्र दोहरे नामांकन की श्रेणी में थे और सरकारी विद्यालयों के रजिस्टरों से कितने नाम हटाए गए। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य शिक्षा संबंधी आंकड़ों को पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना है, ताकि भविष्य की योजनाएं वास्तविक छात्र संख्या के आधार पर तैयार की जा सकें। किशनगंज जिले की शिक्षा व्यवस्था में नामांकन आंकड़ों की विश्वसनीयता को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां सरकारी स्कूलों में कई ऐसे छात्र-छात्राएं नामांकित पाए गए हैं, जो वास्तव में निजी विद्यालयों या मदरसों में पढ़ रहे हैं। इस दोहरे नामांकन का खुलासा जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुई एक समीक्षा बैठक के दौरान हुआ। इसके बाद शिक्षा विभाग ने ऐसे विद्यार्थियों की पहचान कर रिकॉर्ड अपडेट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। शिक्षा विभाग द्वारा 12 अगस्त 2026 को जारी निर्देशों के अनुसार, 7 अगस्त को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह तथ्य सामने आया। इसमें बताया गया कि जिले में बड़ी संख्या में बच्चे एक साथ दो अलग-अलग शिक्षण संस्थानों – सरकारी विद्यालय और निजी विद्यालय या मदरसे – में नामांकित हैं। तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई का लिया निर्णय हालांकि, उनकी नियमित पढ़ाई केवल एक ही संस्थान में हो रही है। विभाग ने इस स्थिति को गंभीर मानते हुए तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई का निर्णय लिया है। इस खुलासे के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं। यदि छात्र वास्तव में निजी विद्यालय या मदरसे में पढ़ रहे हैं, तो सरकारी स्कूलों के नामांकन रजिस्टर में उनका नाम क्यों दर्ज है? यह स्थिति विभागीय योजनाओं का लाभ लेने, नामांकन संख्या बढ़ाने, या विद्यालय परिवर्तन के बाद रिकॉर्ड अपडेट न होने के कारण उत्पन्न हो सकती है। पंजीकृत छात्रों और वास्तविक उपस्थिति के बीच का अंतर भी सरकारी स्कूलों के नामांकन आंकड़ों की सटीकता पर सवाल उठा रहा है। निजी विद्यालयों के प्राचार्यों को निर्देश जारी विभाग ने सभी सरकारी विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों, मदरसों के प्रधान मौलवियों और निजी विद्यालयों के प्राचार्यों को निर्देश जारी किए हैं। उन्हें ऐसे सभी विद्यार्थियों की प्राथमिकता के आधार पर पहचान करने को कहा गया है। पहचान के बाद, संबंधित छात्रों का विवरण U-DISE+ पोर्टल के ‘ड्रॉप बॉक्स’ में दर्ज किया जाएगा। जिस संस्थान में छात्र वास्तव में अध्ययनरत है, वह विद्यालय या मदरसा छात्र के रिकॉर्ड को अपने U-DISE+ पोर्टल पर ‘इंपोर्ट’ कर सकेगा। शिक्षा विभाग का मानना है कि इस प्रक्रिया से जिले में वास्तविक नामांकन और उपस्थिति का सही आंकड़ा सामने आएगा। रिकॉर्ड की सफाई पूरी होने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि कितने छात्र दोहरे नामांकन की श्रेणी में थे और सरकारी विद्यालयों के रजिस्टरों से कितने नाम हटाए गए। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य शिक्षा संबंधी आंकड़ों को पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना है, ताकि भविष्य की योजनाएं वास्तविक छात्र संख्या के आधार पर तैयार की जा सकें।


