किशनगंज जेल में बंदियों को मिल रहा एम्प्लॉयमेंट ट्रेनिंग:अब तक 150 से अधिक कैदी हुए ट्रेंड, आत्मनिर्भर बनाने की पहल

किशनगंज जेल में बंदियों को मिल रहा एम्प्लॉयमेंट ट्रेनिंग:अब तक 150 से अधिक कैदी हुए ट्रेंड, आत्मनिर्भर बनाने की पहल

किशनगंज में मंडल कारा अब बंदियों को केवल रखने का स्थान नहीं रहा, बल्कि उन्हें नई जिंदगी की राह दिखाने का माध्यम भी बन गया है। जेल प्रशासन बंदियों को विभिन्न रोजगारपरक और कौशल विकास प्रशिक्षण प्रदान कर रहा है, ताकि रिहाई के बाद वे आत्मनिर्भर बन सकें। इसका मुख्य उद्देश्य बंदियों को सम्मानजनक रोजगार से जोड़ना और उन्हें दोबारा अपराध की ओर लौटने से रोकना है। जेल प्रशासन के अनुसार, अब तक लगभग 150 बंदियों को व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इन प्रशिक्षणों में कंप्यूटर संचालन, अगरबत्ती निर्माण, मोमबत्ती निर्माण और बकरी पालन जैसे स्वरोजगार आधारित कौशल शामिल हैं। 628 विचाराधीन और 47 सजायाफ्ता बंदी हैं मंडल कारा में प्रशिक्षण के दौरान बंदियों को तकनीकी जानकारी के साथ-साथ रोजगार शुरू करने और उसे सफलतापूर्वक संचालित करने के व्यावहारिक पहलुओं से भी अवगत कराया जाता है। प्रशिक्षण पूरा करने वाले बंदियों को संबंधित विभाग द्वारा प्रमाण पत्र भी दिया जाता है। यह प्रमाण पत्र उन्हें जेल से रिहा होने के बाद रोजगार प्राप्त करने, अपना व्यवसाय शुरू करने और बैंक ऋण व अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ लेने में सहायक होता है। वर्तमान में मंडल कारा में 628 विचाराधीन और 47 सजायाफ्ता बंदी हैं। कौशल विकास कार्यक्रमों में मुख्य रूप से ऐसे बंदियों को शामिल किया जाता है, जो रिहाई के बाद इन प्रशिक्षणों का उपयोग कर सकें। कौशल विकास और रोजगारपरक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित जेल अधीक्षक धर्मेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि कई बंदी विभिन्न परिस्थितियों के कारण अपराध की दुनिया में आ जाते हैं। ऐसे लोगों को जेल में ही कोई हुनर सिखाने से रिहाई के बाद उनके लिए रोजगार के नए अवसर खुलते हैं। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और वे समाज में सम्मानपूर्वक जीवन जीने के लिए प्रेरित होते हैं। उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार और कारा प्रशासन सुधारात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। इसी सोच के तहत मंडल कारा में समय-समय पर कौशल विकास और रोजगारपरक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। जेल प्रशासन का मानना है कि इन कार्यक्रमों के माध्यम से बंदियों को आत्मनिर्भर बनाकर उन्हें एक नई शुरुआत का अवसर दिया जा सकता है। किशनगंज में मंडल कारा अब बंदियों को केवल रखने का स्थान नहीं रहा, बल्कि उन्हें नई जिंदगी की राह दिखाने का माध्यम भी बन गया है। जेल प्रशासन बंदियों को विभिन्न रोजगारपरक और कौशल विकास प्रशिक्षण प्रदान कर रहा है, ताकि रिहाई के बाद वे आत्मनिर्भर बन सकें। इसका मुख्य उद्देश्य बंदियों को सम्मानजनक रोजगार से जोड़ना और उन्हें दोबारा अपराध की ओर लौटने से रोकना है। जेल प्रशासन के अनुसार, अब तक लगभग 150 बंदियों को व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इन प्रशिक्षणों में कंप्यूटर संचालन, अगरबत्ती निर्माण, मोमबत्ती निर्माण और बकरी पालन जैसे स्वरोजगार आधारित कौशल शामिल हैं। 628 विचाराधीन और 47 सजायाफ्ता बंदी हैं मंडल कारा में प्रशिक्षण के दौरान बंदियों को तकनीकी जानकारी के साथ-साथ रोजगार शुरू करने और उसे सफलतापूर्वक संचालित करने के व्यावहारिक पहलुओं से भी अवगत कराया जाता है। प्रशिक्षण पूरा करने वाले बंदियों को संबंधित विभाग द्वारा प्रमाण पत्र भी दिया जाता है। यह प्रमाण पत्र उन्हें जेल से रिहा होने के बाद रोजगार प्राप्त करने, अपना व्यवसाय शुरू करने और बैंक ऋण व अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ लेने में सहायक होता है। वर्तमान में मंडल कारा में 628 विचाराधीन और 47 सजायाफ्ता बंदी हैं। कौशल विकास कार्यक्रमों में मुख्य रूप से ऐसे बंदियों को शामिल किया जाता है, जो रिहाई के बाद इन प्रशिक्षणों का उपयोग कर सकें। कौशल विकास और रोजगारपरक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित जेल अधीक्षक धर्मेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि कई बंदी विभिन्न परिस्थितियों के कारण अपराध की दुनिया में आ जाते हैं। ऐसे लोगों को जेल में ही कोई हुनर सिखाने से रिहाई के बाद उनके लिए रोजगार के नए अवसर खुलते हैं। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और वे समाज में सम्मानपूर्वक जीवन जीने के लिए प्रेरित होते हैं। उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार और कारा प्रशासन सुधारात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। इसी सोच के तहत मंडल कारा में समय-समय पर कौशल विकास और रोजगारपरक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। जेल प्रशासन का मानना है कि इन कार्यक्रमों के माध्यम से बंदियों को आत्मनिर्भर बनाकर उन्हें एक नई शुरुआत का अवसर दिया जा सकता है।  

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