सावन के पवित्र महीने में श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। देशभर से आने वाले कांवड़ियों, श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुरक्षा के लिए पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं। इस सुरक्षा व्यवस्था की अहम कड़ी हैं दो प्रशिक्षित स्निफर डॉग गर्थ और वोरा। लैब्राडोर नस्ल का गर्थ और जर्मन शेफर्ड नस्ल की वोरा प्रतिदिन 8-8 घंटे की शिफ्ट में धाम की सुरक्षा में तैनात रहते हैं। खास बात यह है कि ड्यूटी शुरू करने से पहले दोनों गंगा द्वार से बाबा विश्वनाथ को प्रणाम करते हैं, इसके बाद ही सुरक्षा जांच अभियान शुरू करते हैं। सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात लैब्राडोर नस्ल के गर्थ और जर्मन शेफर्ड नस्ल के वोरा प्रतिदिन आठ-आठ घंटे की शिफ्ट में अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं। मंदिर के खुलने से लेकर बंद होने तक दोनों को निर्धारित समय के अनुसार ड्यूटी पर लगाया जाता है। सावन में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में काफी बढ़ जाने के कारण उनकी जिम्मेदारी भी कई गुना बढ़ जाती है। बाबा को प्रणाम कर शुरू होती है ड्यूटी
विश्वनाथ धाम में गर्थ और वोरा की ड्यूटी का सबसे खास पहलू यह है कि वे सुरक्षा जांच शुरू करने से पहले गंगा द्वार से बाबा विश्वनाथ को प्रणाम करते हैं। इसके बाद ही दोनों अपने हैंडलर के साथ निर्धारित क्षेत्र में सुरक्षा जांच के लिए निकलते हैं। धाम में उनकी यह दिनचर्या श्रद्धालुओं और वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों के बीच भी आकर्षण का केंद्र बनी रहती है। आठ वर्षीय गर्थ और नौ वर्षीय वोरा की देखरेख की जिम्मेदारी दो हेड कांस्टेबल हैंडलर और एक सहायक के पास है। दोनों हेड कांस्टेबल पुलिस लाइन से वाहन के जरिए इन्हें विश्वनाथ धाम परिसर तक लेकर आते हैं। ड्यूटी पूरी होने के बाद इन्हें वापस पुलिस लाइन ले जाया जाता है। इनके खानपान, आराम और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों का भी विशेष ध्यान रखा जाता है। गर्थ की सूंघने की क्षमता को मिला दो बार गोल्ड मेडल
एसीपी गौरव कुमार ने कहा – गर्थ की सूंघने की क्षमता असाधारण है। विस्फोटक सामग्री की पहचान के क्षेत्र में उसके शानदार प्रदर्शन के लिए पुलिस महानिदेशक की ओर से उसे दो बार गोल्ड मेडल से सम्मानित किया जा चुका है। गर्थ ने कई मौकों पर अपनी सूंघने की क्षमता के जरिए सुरक्षा टीम को महत्वपूर्ण जानकारी दी है। सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, गर्थ को विस्फोटक सामग्री की पहचान के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया है। उसकी सूंघने की क्षमता इतनी प्रभावी है कि संदिग्ध अथवा लावारिस वस्तु मिलने पर वह अपने व्यवहार के जरिए हैंडलर को संकेत देता है। इसके बाद पुलिस टीम संबंधित स्थान की जांच करती है और आवश्यकता पड़ने पर आगे की सुरक्षा कार्रवाई की जाती है। लावारिस वस्तुओं पर रहती है खास नजर
विश्वनाथ धाम जैसे अत्यंत संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले धार्मिक परिसर में लावारिस वस्तुओं की जांच सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सावन के दौरान जब लाखों श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, तब भीड़ के बीच कोई संदिग्ध वस्तु छूट जाने की आशंका बनी रहती है। ऐसे में स्निफर डॉग सुरक्षा टीम के लिए बेहद उपयोगी साबित होते हैं। गर्थ और वोरा अपने प्रशिक्षण के आधार पर विभिन्न प्रकार की संदिग्ध वस्तुओं को सूंघकर उनकी पहचान में मदद करते हैं। किसी वस्तु या स्थान पर संदेह होने पर वे अपने हैंडलर को संकेत देते हैं। इसके बाद सुरक्षा टीम उस स्थान को घेरकर जांच करती है। इस तरह दोनों डॉग सुरक्षा व्यवस्था की पहली महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करते हैं। कैनेल क्लब से लाए गए, पुलिस ने दी ट्रेनिंग
गर्थ और वोरा को कैनेल क्लब ऑफ इंडिया, चेन्नई की ओर से आयोजित डॉग शो के माध्यम से चयनित कर उत्तर प्रदेश पुलिस ने खरीदा था। इसके बाद दोनों को पुलिस की ओर से आवश्यक प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान इन्हें अलग-अलग परिस्थितियों में संदिग्ध वस्तुओं और विस्फोटक सामग्री की पहचान करने के लिए तैयार किया गया। स्निफर डॉग सामान्य पालतू कुत्तों से अलग होते हैं। इन्हें उनकी प्राकृतिक सूंघने की क्षमता को विशेष प्रशिक्षण के जरिए सुरक्षा कार्यों के लिए विकसित किया जाता है। ऐसे प्रशिक्षित डॉग विस्फोटक, अवैध ड्रग्स, वन्यजीवों के अवशेष और छिपे हुए हथियार जैसी वस्तुओं का पता लगाने में सुरक्षा एजेंसियों की मदद कर सकते हैं। आठ-आठ घंटे की शिफ्ट, सावन में बढ़ी जिम्मेदारी
श्रीकाशी विश्वनाथ धाम की सुरक्षा में गर्थ और वोरा की आठ-आठ घंटे की शिफ्ट निर्धारित है। ड्यूटी के दौरान उनके साथ प्रशिक्षित हैंडलर मौजूद रहते हैं। हैंडलर न केवल उन्हें निर्देशित करते हैं, बल्कि उनके व्यवहार और संकेतों को भी समझते हैं। किसी संदिग्ध वस्तु को लेकर डॉग द्वारा दिए गए संकेत को सही तरीके से समझना सुरक्षा जांच में बेहद महत्वपूर्ण होता है। एसीपी गौरव कमार के अनुसार, धाम की सुरक्षा में गर्थ और वोरा की तैनाती की गई है। दोनों लावारिस या संदिग्ध वस्तुओं को सूंघकर पुलिस टीम को सतर्क करने में मदद करते हैं। सावन में भीड़ बढ़ने के कारण इनकी ड्यूटी और जिम्मेदारी दोनों बढ़ जाती हैं। मिक्स वेज, रोटी और दूध है भोजन
ड्यूटी जितनी महत्वपूर्ण है, उतना ही ध्यान गर्थ और वोरा की डाइट पर भी दिया जाता है। दोनों को बहुत भारी भोजन नहीं दिया जाता। इनके भोजन में मिक्स वेज, रोटी और दूध शामिल है। एक डॉग के भोजन पर प्रतिदिन करीब 400 रुपये खर्च किए जाते हैं। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक उम्र बढ़ने के साथ इनकी डाइट में भी बदलाव किया जाता है। उनकी शारीरिक जरूरत और ड्यूटी की क्षमता को ध्यान में रखते हुए भोजन की मात्रा तय होती है। ड्यूटी के बाद इन्हें पुलिस लाइन स्थित अपने आवास पर आराम दिया जाता है। वहां एक सहायक उनकी देखरेख करता है और उनके खानपान से लेकर अन्य जरूरतों का ध्यान रखता है।


