Frank Sign: कुछ लोगों के कान की लोब यानी (Earlobe) पर एक तिरछी लाइन या क्रीज बनी होती है, जिसे आमतौर पर लोग उम्र बढ़ने के साथ होने वाला सामान्य बदलाव मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। कान की लोब पर बनने वाली इस खास तिरछी क्रीज को शरीर की रक्त वाहिकाओं और हृदय से जुड़ी कुछ बीमारियों के साथ जोड़कर देखा जाता है और इसे फ्रैंक साइन कहा जाता है। आइए जानते हैं ये क्यों बनती है और इससे हेल्थ से जुड़ी किन किन बातों का पता चलता है।
क्या है फ्रैंक साइन
कान की लोब पर बनने वाली फ्रैंक साइन आमतौर पर कान के आगे वाले हिस्से यानी ट्रेगस के पास से शुरू होकर बाहरी किनारे की तरफ जाती है। नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन (National Center for Biotechnology Information) के अनुसार, ये क्रीज करीब 45 डिग्री के कोण पर दिखाई दे सकती है। इसकी मौजूदगी उम्र बढ़ने के साथ ज्यादा देखी जाती है।
क्या लोब की क्रीज हार्ट डिजीज का संकेत है?
क्लीवलैंड क्लिनिक जर्नल ऑफ मेडिसिन (Cleveland Clinic Journal of Medicine) के अनुसार, दोनों कानों की लोब पर दिखाई देने वाली इस तरह की तिरछी क्रीज को कोरोनरी आर्टरी डिजीज यानी हृदय की धमनियों से जुड़ी बीमारी के साथ जोड़ा गया है। रिसर्च में फ्रैंक साइन का संबंध कोरोनरी आर्टरी डिजीज की मौजूदगी, उसके फैलाव और गंभीरता से भी देखा गया है।
क्या फ्रैंक साइन का स्ट्रोक से भी है संबंध
नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन (National Center for Biotechnology Information) में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, फ्रैंक साइन को सिर्फ हृदय संबंधी बीमारी ही नहीं, बल्कि रक्त वाहिकाओं से जुड़ी समस्याओं और इस्केमिक स्ट्रोक के साथ भी जोड़ा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, कान की लोब पर बनी ऐसी क्रीज का संबंध लंबे समय से चल रही एथेरोस्क्लेरोसिस यानी धमनियों में प्लाक जमा होने की प्रक्रिया और एंडोथेलियल डिसफंक्शन यानी रक्त वाहिकाओं की अंदरूनी परत के ठीक से काम न करने से भी हो सकता है।
डॉक्टर से कब सलाह लें?
अगर कान की लोब पर ऐसी लकीर दिखाई देती है और साथ में सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी, अचानक बहुत ज्यादा थकान या पहले से हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्या है, तो डॉक्टर से जांच करवाना बेहतर है।

