कानपुर में प्रिंसिपल बहन ने भाई को दिया 65% लिवर:लिवर सिरोसिस हो गया था, 2 जुलाई को दिल्ली में हुआ ट्रांसप्लांट

कानपुर में प्रिंसिपल बहन ने भाई को दिया 65% लिवर:लिवर सिरोसिस हो गया था, 2 जुलाई को दिल्ली में हुआ ट्रांसप्लांट

भाई-बहन के रिश्ते में प्यार और विश्वास की डोर कितनी मजबूत होती है, इसकी मिसाल कानपुर के विकास नगर की रहने वाली सपना सिंह ने पेश की है। रक्षाबंधन से पहले उन्होंने अपने छोटे भाई शिवेंद्र प्रताप सिंह की जिंदगी बचाने के लिए अपने लिवर का 65 प्रतिशत हिस्सा दान कर दिया। 2 जुलाई 2026 को नई दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बाइलियरी साइंसेज (ILBS) में लिवर ट्रांसप्लांट हुआ। फिलहाल दोनों भाई-बहन स्वस्थ हैं और डॉक्टरों की निगरानी में हैं। शिवेंद्र प्रताप सिंह गेस्ट हाउस संचालित करते हैं, जबकि उनकी बड़ी बहन सपना सिंह एक निजी इंटर कॉलेज में प्रिंसिपल हैं। कुछ साल पहले शिवेंद्र को उल्टी और पीलिया की शिकायत हुई थी। परिवार उन्हें इलाज के लिए लखनऊ के मेदांता अस्पताल ले गया। जांच में लिवर सिरोसिस की पुष्टि हुई। 2020 में ही भाई को लिवर देने का फैसला कर लिया था सपना ने बताया कि भाई की बीमारी के बारे में पता चलने के बाद उन्होंने 2020 में ही अपना लिवर दान करने का फैसला कर लिया था। वह ट्रांसप्लांट के लिए चेन्नई भी गईं, लेकिन जांच के दौरान उनके कोविड संक्रमित होने की पुष्टि हो गई। संक्रमण के चलते उस समय ट्रांसप्लांट नहीं हो सका और उन्हें वापस लौटना पड़ा। इसके बाद भी सपना ने उम्मीद नहीं छोड़ी और भाई के इलाज के लिए प्रयास जारी रखे। पिता की मौत के बाद बिगड़ी शिवेंद्र की हालत वर्ष 2024 में पिता उदय प्रताप सिंह की मौत के बाद शिवेंद्र की तबीयत और खराब होने लगी। वर्ष 2025 में उन्हें मेमोरी लॉस की समस्या भी होने लगी। इसके बाद उन्हें दोबारा मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने परिवार को बताया कि अब उनकी हालत में सुधार के लिए लिवर ट्रांसप्लांट जरूरी है। इसके बाद परिवार ने ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया शुरू की। 2 जुलाई को दिल्ली में हुआ ट्रांसप्लांट एक बार फिर सपना भाई के लिए आगे आईं। जांच और जरूरी प्रक्रियाओं के बाद उन्होंने अपने लिवर का 65 प्रतिशत हिस्सा दान करने का निर्णय लिया। आखिरकार 2 जुलाई 2026 को नई दिल्ली के ILBS में शिवेंद्र का लिवर ट्रांसप्लांट किया गया। दोनों डॉक्टरों की निगरानी में, नियमित फॉलोअप जारी सपना के मुताबिक, फिलहाल वह और उनके भाई दोनों स्वस्थ हैं। डॉक्टरों ने कुछ महीनों तक नियमित निगरानी में रहने की सलाह दी है। दोनों की समय-समय पर जांच हो रही है और डॉक्टरों के फॉलोअप के साथ दवाएं भी चल रही हैं। बोलीं- परिवार से बढ़कर दुनिया में कुछ नहीं सपना कहती हैं कि परिवार से बढ़कर दुनिया में कुछ नहीं होता। भाई को जिंदगी देने का मौका मिला, इससे बड़ी खुशी उनके लिए कुछ नहीं है। वहीं शिवेंद्र भावुक होकर कहते हैं कि उनकी बड़ी बहन ने अपना लिवर देकर उनकी जिंदगी बचाई है। रक्षाबंधन से पहले बहन ने उन्हें ऐसा तोहफा दिया है, जिसकी कीमत किसी चीज से नहीं लगाई जा सकती। राखी के धागे से आगे बढ़कर जिंदगी का हिस्सा दिया इस रक्षाबंधन पर जहां भाई-बहन एक-दूसरे की कलाई पर राखी बांधकर रिश्ते की डोर मजबूत करेंगे, वहीं सपना और शिवेंद्र के लिए यह त्योहार एक ऐसी कहानी बन गया है, जिसमें बहन ने राखी के धागे से आगे बढ़कर भाई को अपनी जिंदगी का हिस्सा दिया है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर और गैस्ट्रो सर्जन डॉ. युक्तेश्वर मिश्रा के मुताबिक, स्वस्थ लिवर में पुनर्विकास की क्षमता होती है और लिवर दान करने के बाद करीब छह से आठ महीने में वह काफी हद तक अपने पुराने आकार में लौट सकता है। हालांकि लिविंग-डोनर ट्रांसप्लांट में डोनर की सुरक्षा के लिए विशेषज्ञों की जांच और नियमित निगरानी जरूरी होती है।

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *