कांग्रेस सांसद एंगोचा बिमोल अकोइजाम ने JNU की यौन उत्पीड़न जांच पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने जांच रिपोर्ट नहीं देने और गोपनीयता नियम तोड़ने का आरोप लगाया। अकोइजाम ने कहा कि उन्हें 9 अक्टूबर को आंतरिक समिति की जांच पूरी होने की जानकारी मिली। उसी दिन कुछ घंटों के भीतर वाइस चांसलर ने उन्हें सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी कर दिया। उन्होंने दावा किया कि रिपोर्ट शिकायतकर्ता और जवाब देने वाले पक्ष, दोनों को दी जानी चाहिए थी। दोनों पक्षों को असहमति जताने और अपील करने के लिए 30 दिन मिलते हैं। JNU प्रशासन ने यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के बाद अकोइजाम को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त किया था। अकोइजाम ने आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया है। JNU में 11 छात्राओं ने अकोइजाम पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। अकोइजाम ने इन आरोपों से इनकार किया और इन्हें राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया। अकोइजाम का दावा- जांच पूरी होने का मेल मिला, रिपोर्ट नहीं अकोइजाम ने मंगलवार को कहा कि उन्हें इंटरनल कमेटी (IC) की ओर से ईमेल मिला था। इसमें बताया गया था कि जांच पूरी हो गई है। उन्होंने कहा, “मुझे 9 तारीख को JNU की IC से ईमेल मिला। इसमें कहा गया कि जांच अब बंद हो गई है। उन्हें एक रिपोर्ट देनी थी, जिसमें निष्कर्ष और सिफारिशें शामिल हों।” सांसद ने दावा किया कि रिपोर्ट उन्हें नहीं दी गई। अकोइजाम ने कहा कि रिपोर्ट नहीं मिलने से उनके कानूनी अधिकार प्रभावित हुए। गोपनीयता नियम तोड़ने का आरोप कांग्रेस नेता ने यूनिवर्सिटी प्रशासन पर कानून के तहत गोपनीयता नियम तोड़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उनका नाम समय से पहले लीक किया गया, ताकि लोगों में उनके खिलाफ माहौल बनाया जा सके। सांसद ने मीडिया ट्रायल का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “मीडिया में मुकदमा चलाया गया और देश में, खासकर मुख्य भूमि पर, हर कोई इसे सही मान रहा है।” वीसी पर बयान बदलने का आरोप अकोइजाम ने प्रशासन पर सार्वजनिक तौर पर अलग बात कहने और तथ्यों को गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “अपील की सुनवाई VC को करनी है। लेकिन उन्होंने अगले दो दिनों तक मीडिया हाउसों से बात की और खुले झूठ बोले।” अकोइजाम ने दावा किया कि वाइस चांसलर ने कहा था कि उन्होंने 300 ईमेल लिखे हैं। उन्होंने कहा, “सारे नियम तोड़े गए हैं। हर तरह की चीजें होती रही हैं।” उन्होंने आगे कहा, “हर दिन लोग खुद को सही मानकर मुझ पर उंगली उठा रहे हैं। क्या सिर्फ मुझे नाम देने से मैं वैसा बन जाऊंगा?” BJP की महिला सांसदों ने राष्ट्रपति को ज्ञापन दिया इस बीच, भारतीय जनता पार्टी (BJP) की महिला सांसदों के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति भवन में ज्ञापन देकर कांग्रेस सांसद के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। प्रतिनिधिमंडल में लोकसभा सांसद कमलजीत सहरावत, बांसुरी स्वराज और मालविका देवी शामिल थीं। राज्यसभा सांसद एस. फांगनोन कोन्याक और गीता शाक्य भी प्रतिनिधिमंडल में थीं। वरिष्ठ BJP नेता रेखा शर्मा भी प्रतिनिधिमंडल में शामिल थीं। नेताओं ने उच्च शिक्षा संस्थानों में छात्राओं की सुरक्षा और जवाबदेही तय करने के लिए संवैधानिक हस्तक्षेप की मांग की। 11 छात्राओं ने लगाए थे आरोप, FIR दर्ज JNU प्रशासन ने अकोइजाम के खिलाफ यौन उत्पीड़न से बचाव के ढांचे के तहत कार्रवाई शुरू की थी। अकोइजाम जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ सोशल सिस्टम्स से जुड़े प्रोफेसर थे। यूनिवर्सिटी ने 9 अक्टूबर को उन्हें तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया था। आदेश में कहा गया था कि JNU की इंटरनल कमेटी ने जांच के निष्कर्षों के आधार पर उनके खिलाफ बड़ी सजा की सिफारिश की थी। जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज की। FIR 11 अक्टूबर को वसंत कुंज नॉर्थ पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 75, 75(1)(i), 75(1)(iv) और 79 के तहत केस दर्ज किया। पुलिस ने कहा कि मामले की आगे की जांच चल रही है।
कांग्रेस सांसद अकोइजाम का दावा- मुझे जांच रिपोर्ट नहीं दी:नाम बताकर गोपनीयता भंग की; JNU की 11 छात्राओं ने लगाया है यौन उत्पीड़न का आरोप

