कटनी के मुडवारा रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को मूलभूत सुविधाओं और सुरक्षा के लिए परेशान होना पड़ रहा है। केंद्र सरकार की अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी यहां रात में प्लेटफार्मों पर बत्ती गुल रहती है। साथ ही, यात्रियों की सुरक्षा के लिए आरपीएफ और जीआरपी के जवान भी नदारद मिलते हैं। शुक्रवार रात मुडवारा स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 4 पर ट्रेन का इंतजार कर रहे यात्रियों में असुरक्षा का माहौल साफ दिखा। जबलपुर-अजमेर दयोदय एक्सप्रेस के यात्री लोकेश सेन ने बताया कि वह एक घंटे से अंधेरे में प्लेटफार्म पर बैठे हैं। यहां न तो पर्याप्त लाइट है और न ही सुरक्षा का कोई इंतजाम। आरपीएफ या जीआरपी का कोई जवान भी नजर नहीं आ रहा है। स्थानीय निवासी पंडित रामानंद ने बताया कि वह अपने परिचित को स्टेशन छोड़ने आए थे। उन्होंने कहा कि पिछले कई दिनों से यहां यही अव्यवस्था है। जिन प्लेटफार्मों पर सबसे ज्यादा भीड़ होती है, वहीं बत्ती गुल रहती है। बीना की ट्रेन पकड़ने पहुंचे यात्री अरुण और संतोष ने भी अपनी परेशानी बताई। उनके साथ छोटे बच्चे, महिलाएं और बच्चियां भी थीं। उन्होंने कहा कि प्लेटफार्म पर अंधेरा और पुलिस की गैरमौजूदगी के कारण चोरी और अन्य आपराधिक घटनाओं का डर बना रहता है। इसके अलावा, प्लेटफार्म पर टीनशेड भी नहीं है, जिससे यात्री खुले आसमान के नीचे बैठे रहते हैं। स्टेशन परिसर में आवारा मवेशियों और कुत्तों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे दुर्घटना का खतरा बना रहता है। क्या कहते हैं जिम्मेदार पूरे मामले पर मुडवारा रेलवे स्टेशन मास्टर रामेश्वर मीना ने बताया कि प्लेटफार्म की बिजली सप्लाई बंद होने के कारणों की जांच कराई जाएगी। स्टेशन परिसर में कई खुले स्थान होने के कारण मवेशी अंदर घुस आते हैं। परिसर को सुरक्षित करने का काम जल्द शुरू होगा।
स्टेशन पर आरपीएफ जवानों की भारी कमी है, जिसके लिए संबंधित उच्च अधिकारियों को पूर्व में ही पत्राचार किया जा चुका है।
करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद यदि यात्रियों को अंधेरे और अनहोनी के डर के बीच सफर करना पड़े, तो यह रेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

