जापान ने मीराबाई चानू को पहले ही ओलंपिक रजत पदक दिया था और बुधवार को यहां ‘उगते सूरज की धरती’ ने उन्हें एक और बेशकीमती एशियाई खेलों का वह पदक दिया जिसे पाने के लिए वह 12 साल से कोशिश कर रही थीं जिसने इस स्टार भारतीय भारोत्तोलक पर से दबाव हटा दिया और उन्हें बहुत हल्का महसूस कराया। मीराबाई ने 49 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतकर एशियाई खेलों में पदक के 12 साल के लंबे इंतजार खत्म किया। उन्होंने स्नैच में 88 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 111 किलोग्राम भार के साथ कुल 198 किलोग्राम वजन उठाया।यह 1998 में कर्णम मल्लेश्वरी के रजत पदक के बाद एशियाई खेलों में भारोत्तोलन में भारत का पहला पदक है। मणिपुर की इस खिलाड़ी ने 2021 में तोक्यो ओलंपिक में रजत पदक जीता था (जो 2000 सिडनी ओलंपिक में मल्लेश्वरी के कांस्य पदक से बेहतर था) और पांच साल बाद जापान लौटकर उस बड़े पदक को भी अपने पदकों की कैबिनेट में शामिल कर लिया जो अब तक उनके पास नहीं था। मीराबाई ने पदक जीतने के बाद कहा, ‘‘आखिरकार वो पदक मिल गया जो मैं चाहती थी।मैं पिछले 12 वर्षों से, 2014 के एशियाई खेलों से ही इस पदक के लिए कोशिश कर रही थी। इस पदक के साथ मेरा जीवन पूर्ण हो गया है। अब मैं बहुत हल्का महसूस कर रही हूं क्योंकि अब मुझ पर से दबाव पूरी तरह हट गया है।ये मेरे सपनों के एशियाई खेल हैं। ’’
मीराबाई ने कहा, ‘‘मैंने तोक्यो (ओलंपिक) में रजत पदक जीता था और अब जापान में एशियाड में भी मेरे पास रजत पदक है। जब से मैंने ओलंपिक में कदम रखा, तभी से मेरा सपना एशियाड में पदक जीतने का था।’’
इस 32 साल की भारोत्तोलक ने कहा, ‘‘मैं हमेशा खुद से पूछती कि हर एशियाड के दौरान या इससे पहले मेरे साथ क्या होता है? लेकिन इस बार मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ करने की कोशिश की। मैं पक्के इरादे के साथ आई थी कि चाहे कुछ भी हो जाए, मैं पदक जीतकर ही रहूंगी।’’
उन्होंने कहा कि एशियाई खेलों का पदक ओलंपिक पदक के बराबर है क्योंकि दुनिया के शीर्ष भारोत्तोलक एशिया से ही आते हैं। जब उनसे पूछा गया कि बुधवार को क्या खास है तो उन्होंने कहा, ‘‘सब कुछ खास है। ओलंपिक रिंग्स, हेयरबैंड, नाखून।’’
उन्होंने कहा कि वह अपना सर्वश्रेष्ठ दिए बिना पदक नहीं जीतना चाहती थीं इसलिए उन्होंने क्लीन एंव जर्क में 111 किग्रा का वजन उठाने की कोशिश की जबकि कम वजन उठाने पर भी उन्हें रजत पदक मिल सकता था। मीराबाई ने कहा, ‘‘मैं (क्लीन एंड जर्क में) 110 किग्रा से ज्यादा वजन उठाना चाहती थी। मुझे नहीं पता था कि इंडोनेशियाई खिलाड़ी (कांस्य पदक जीतने वाली) कितना वजन उठाएगी।मुझे पता था कि स्वर्ण पदक मुझे नहीं मिलेगा। लेकिन मैं बस अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना चाहती थी। मैं कम वजन उठाकर पदक नहीं जीतना चाहती थी।
जापान ने मीराबाई चानू को पहले ही ओलंपिक रजत पदक दिया था और बुधवार को यहां ‘उगते सूरज की धरती’ ने उन्हें एक और बेशकीमती एशियाई खेलों का वह पदक दिया जिसे पाने के लिए वह 12 साल से कोशिश कर रही थीं जिसने इस स्टार भारतीय भारोत्तोलक पर से दबाव हटा दिया और उन्हें बहुत हल्का महसूस कराया। मीराबाई ने 49 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतकर एशियाई खेलों में पदक के 12 साल के लंबे इंतजार खत्म किया। उन्होंने स्नैच में 88 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 111 किलोग्राम भार के साथ कुल 198 किलोग्राम वजन उठाया।
यह 1998 में कर्णम मल्लेश्वरी के रजत पदक के बाद एशियाई खेलों में भारोत्तोलन में भारत का पहला पदक है। मणिपुर की इस खिलाड़ी ने 2021 में तोक्यो ओलंपिक में रजत पदक जीता था (जो 2000 सिडनी ओलंपिक में मल्लेश्वरी के कांस्य पदक से बेहतर था) और पांच साल बाद जापान लौटकर उस बड़े पदक को भी अपने पदकों की कैबिनेट में शामिल कर लिया जो अब तक उनके पास नहीं था। मीराबाई ने पदक जीतने के बाद कहा, ‘‘आखिरकार वो पदक मिल गया जो मैं चाहती थी।
मैं पिछले 12 वर्षों से, 2014 के एशियाई खेलों से ही इस पदक के लिए कोशिश कर रही थी। इस पदक के साथ मेरा जीवन पूर्ण हो गया है। अब मैं बहुत हल्का महसूस कर रही हूं क्योंकि अब मुझ पर से दबाव पूरी तरह हट गया है।
ये मेरे सपनों के एशियाई खेल हैं। ’’
मीराबाई ने कहा, ‘‘मैंने तोक्यो (ओलंपिक) में रजत पदक जीता था और अब जापान में एशियाड में भी मेरे पास रजत पदक है। जब से मैंने ओलंपिक में कदम रखा, तभी से मेरा सपना एशियाड में पदक जीतने का था।
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इस 32 साल की भारोत्तोलक ने कहा, ‘‘मैं हमेशा खुद से पूछती कि हर एशियाड के दौरान या इससे पहले मेरे साथ क्या होता है? लेकिन इस बार मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ करने की कोशिश की। मैं पक्के इरादे के साथ आई थी कि चाहे कुछ भी हो जाए, मैं पदक जीतकर ही रहूंगी।
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उन्होंने कहा कि एशियाई खेलों का पदक ओलंपिक पदक के बराबर है क्योंकि दुनिया के शीर्ष भारोत्तोलक एशिया से ही आते हैं। जब उनसे पूछा गया कि बुधवार को क्या खास है तो उन्होंने कहा, ‘‘सब कुछ खास है। ओलंपिक रिंग्स, हेयरबैंड, नाखून।
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उन्होंने कहा कि वह अपना सर्वश्रेष्ठ दिए बिना पदक नहीं जीतना चाहती थीं इसलिए उन्होंने क्लीन एंव जर्क में 111 किग्रा का वजन उठाने की कोशिश की जबकि कम वजन उठाने पर भी उन्हें रजत पदक मिल सकता था। मीराबाई ने कहा, ‘‘मैं (क्लीन एंड जर्क में) 110 किग्रा से ज्यादा वजन उठाना चाहती थी। मुझे नहीं पता था कि इंडोनेशियाई खिलाड़ी (कांस्य पदक जीतने वाली) कितना वजन उठाएगी।
मुझे पता था कि स्वर्ण पदक मुझे नहीं मिलेगा। लेकिन मैं बस अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना चाहती थी। मैं कम वजन उठाकर पदक नहीं जीतना चाहती थी।
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