Udaipur Mayor Election 2026: उदयपुर नगर निगम महापौर चुनाव से पहले बाड़ाबंदी के बीच सियासी हलचल तेज हो गई। महापौर की कुर्सी के लिए बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने की कवायद में बीजेपी और कांग्रेस, दोनों ने निर्दलीय पार्षदों से संपर्क साधा। वार्ड-11 से निर्दलीय चुनाव जीतने वाले कमलेश बोराणा शनिवार को फिर बीजेपी में शामिल हो गए।
बता दें कि बोराणा ने बीजेपी के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव जीता था। वहीं, वार्ड-61 की निर्दलीय इंदिरा डांगी, वार्ड-60 से निर्दलीय जीतीं खुशबू मेहता और वार्ड-32 के माकपा पार्षद राजेंद्र वसीटा से भी दोनों दलों की ओर से संपर्क किए जाने की चर्चा है। बाड़ाबंदी में रखे गए पार्षदों को सोमवार को मतदान से पहले एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल पर एक साथ ले जाने की भी योजना है। इसके बाद सभी पार्षदों को मतदान स्थल पर लाया जाएगा। महापौर चुनाव के ठीक पहले यह कदम पार्षदों को एकजुट रखने और मतदान तक साथ रखने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
इंदिरा ने न टिकट मांगा, न कार्यालय खोला, फिर भी जीत गईं
वार्ड-61 की निर्दलीय पार्षद इंदिरा डांगी ने किसी पार्टी से टिकट नहीं मांगा। प्रचार में भी उनका तरीका बाकी प्रत्याशियों से अलग रहा। नामांकन के बाद पति गेहरीलाल डांगी और परिवार के साथ घर-घर संपर्क किया। न बड़ा चुनाव कार्यालय खोला, न सड़कों पर प्रचार का शोर किया और न ही मतदाताओं को पर्चियां बांटीं। इंदिरा के पति वार्ड पंच और सरपंच प्रतिनिधि रह चुके हैं। महापौर चुनाव के समीकरण बदलने के साथ दोनों दलों के पदाधिकारी इंदिरा से संपर्क कर रहे हैं।
खुशबू और वसीटा भी संपर्क में, फैसला बाकी
मादड़ी वार्ड-60 क्षेत्र से निर्दलीय जीतने वाली खुशबू मेहता भी चर्चा के केंद्र में हैं। खुशबू पूर्व निर्दलीय पार्षद कमलेश मेहता की पत्नी हैं। उनसे भी एक दल के पदाधिकारियों ने संपर्क किया है। खुशबू पति और पदाधिकारियों से मंथन कर रही हैं।
वार्ड-32 से माकपा के राजेंद्र वसीटा भी महापौर चुनाव के समीकरण में महत्वपूर्ण हो गए हैं। वसीटा ने बीजेपी के कमलेश सालवी को हराकर जीत दर्ज की है। वे तीसरी बार पार्षद चुने गए हैं। ऐसे में उनका राजनीतिक अनुभव भी दोनों खेमों के संपर्क का कारण बना हुआ है।
दिनभर वोटों की गणित, पार्टी पदाधिकारियों से हुई मुलाकात
बाड़ाबंदी में रखे पार्षदों ने शनिवार का दिन रिसोर्ट में ही बिताया। यहां महापौर चुनाव को लेकर वोटों की गणित पर चर्चा हुई। कौन किस खेमे में है, कितने वोट पक्के हैं और निर्दलीयों के समर्थन से समीकरण किस तरह बदल सकते हैं, इन्हीं मुद्दों पर मंथन चलता रहा। बाड़ाबंदी में पार्षदों से पार्टी के कई पदाधिकारियों ने मुलाकात की। निर्दलीय पार्षदों से संपर्क को लेकर भी रणनीति पर चर्चा हुई। महापौर चुनाव में बहुमत का आंकड़ा हासिल करने के लिए हर वोट को लेकर दोनों खेमे सक्रिय हैं।

