Ujjain Shops stop UPI payments: 15 अक्टूबर से 2 हजार रुपए से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट यूपीआई भुगतान पर एमडीआर लागू होने की सूचना का असर उज्जैन शहर के बाजार में अभी से दिखाई देने लगा है। कई व्यापारियों ने बड़े यूपीआई भुगतान स्वीकार करना बंद कर दिया है। इसका सीधा असर उन ग्राहकों पर पड़ रहा है, जो रोजमर्रा की तरह मोबाइल से भुगतान करने के भरोसे घर से निकल रहे है और कई बार जेब में नकद नहीं रखते। दुकान पर पहुंचने के बाद यूपीआई भुगतान स्वीकार नहीं किए जाने पर ग्राहकों को सामान छोड़े बिना लौटना पड़ रहा है। कुछ ग्राहको को एटीएम जाकर नकद निकालने के बाद दोबारा खरीदारी के लिए आना पड़ रहा है। व्यापारियों का कहना है संख्या में होने वाले भुगतान पर मासिक लागत बढ़ सकती है, इसलिए अभी से ग्राहकों को कैश भुगतान की आदत डालने की कोशिश कर रहे हैं।
अभी से बदला भुगतान का तरीका
शहर के इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़ा, मोबाइल, ऑटोमोबाइल और अन्य बड़े कारोबार से जुड़े कुछ व्यापारियों ने 2 हजार रुपए से अधिक के यूपीआई भुगतान लेना सीमित या बंद करना शुरू कर दिया है। व्यापारियों का तर्क है कि रोज बड़ी संख्या में ऐसे भुगतान होने पर छोटी प्रतिशत दर भी महीने में बड़ी राशि बन सकती है। उनका कहना है कि ग्राहक से अलग शुल्क नहीं लिया जा सकेगा, इसलिए लागत का असर सीधे व्यापार के खर्च लोगों को आदत में लाने के लिए कुछ दुकानों पर कैश भुगतान को प्राथमिकता देने की व्यवस्था अभी से लागू की जा रही है। कुछ व्यापारियों के अनुसार बड़े यूपीआई ट्रांजैक्शन की संख्या अधिक होने पर प्रतिदिन की संभावित लागत 400 से 500 रुपए तक पहुंच सकती है। व्यापारियो का अनुमान है कि महीनेभर में यह राशि एक कर्मचारी के वेतन के बराबर या उससे अधिक खर्च का रूप ले सकती है। हालांकि वास्तविक लागत कारोबार, पात्र ट्रांजैक्शन और लागू शुल्क की शर्तों पर निर्भर करेगी। व्यापारियों का कहना है कि इसी संभावित अतिरिक्त खर्च को देखते हुए वे अभी से बड़े भुगतान में नकद या अन्य माध्यमों को प्राथमिकता देने लगे हैं।
ग्राहक बोले- यूपीआइ रोजमर्रा की जरूरत
ग्राहकों के लिए परेशानी इसलिए बढ़ रही है क्योंकि यूपीआई भुगतान रोजमर्रा की खरीदारी का हिस्सा बन चुका है। कई लोग घर से निकलते समय नकद रखना जरूरी नहीं समझते और मोबाइल से भुगतान करने पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में दुकान पर यूपीआई स्वीकार नहीं होने की जानकारी मिलने पर उन्हें वापस लौटना पड़ता है। कपड़ों की खरीदी करने पहुंचे वीरेंद्र सिंह राणा ने बताया कि छोटी-बड़ी खरीदारी के लिए यूपीआई की आदत बनने के बाद अचानक कैश भुगतान पर लौटना असुविधाजनक है। व्यापारियों की नई व्यवस्था से ग्राहकों को भुगतान का तरीका पहले से पूछना पड़ रहा है।
रोज के बड़े भुगतान से बढ़ेगा खर्च
कपडे के व्यापारी संदीप जैन बताते है की हमारे यहां रोजाना बड़ी राशि के कई यूपीआई भुगतान होते हैं। यदि 2 हजार रुपए से अधिक के हर पात्र भुगतान पर शुल्क लगता है तो महीने का खर्च काफी बढ़ सकता है। व्यापारी के लिए यह अलग से कोई छोटी राशि नहीं है। इसलिए हमने बड़े भुगतान में अभी से कैश को प्राथमिकता देना शुरू किया है। ग्राहक को भी पहले ही बता रहे है कि बड़े भुगतान के लिए नकद लेकर आएं।
अभी से कैश भुगतान की आदत डाल रहे
थोक फल विक्रेता शहजाद लाला बताते है 15 अक्टूबर के बाद अचानक भुगतान का तरीका बदलने से ग्राहक और व्यापारी दोनों को परेशानी होगी। इसलिए हमने अभी से बड़े भुगतान में कैश लेना शुरू किया है। हमारा उद्देश्य ग्राहक को परेशान करना नहीं है, बल्कि संभावित अतिरिक्त लागत से बचना है। धीरे-धीरे ग्राहक भी समझेंगे कि बड़ी खरीदारी के लिए नकद या दूसरा भुगतान रखना जरूरी हो सकता है।
त्योहारी सीजन में नए नियमों से होगी परेशानी
किराना व्यापारी सारांश राठौर ने बताया 15 अक्टूबर से यह व्यवस्था ऐसे समय में लागू हो रही है, जब त्योहारी सीजन में बाजारों में खरीदारी बढ़ जाती है और लोग बड़ी राशि की खरीदारी के लिए निकलते हैं। ऐसे में अचानक यूपीआई भुगतान की स्थिति बदलने पर ग्राहक को परेशानी हो सकती है। इसलिए हम अभी से ग्राहकों को बड़े भुगतान के लिए नकद या अन्य विकल्प रखने की जानकारी दे रहे हैं, ताकि त्योहारी खरीदारी के समय उन्हें एटीएम जाने या बिना खरीदारी लौटने की स्थिति का सामना न करना पड़े।

