ईरान युद्ध से निकलने का रास्ता तलाश रहा अमेरिका! नुकसान की वजह से टॉप जनरल पीछे हटने की बना रहे योजना

ईरान युद्ध से निकलने का रास्ता तलाश रहा अमेरिका! नुकसान की वजह से टॉप जनरल पीछे हटने की बना रहे योजना

ईरान (Iran) और अमेरिका (United States of America) के बीच फिलहाल हमले रुके हुए हैं, लेकिन सीज़फायर के खत्म होने के साथ ही युद्ध भी फिर से शुरू हो गया था। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) साफ कर चुके हैं कि यह युद्ध पहले जैसा नहीं होगा और इसके जल्द ही खत्म होने की उम्मीद जताई है। इसी बीच अमेरिकी सेना के शीर्ष अधिकारी और जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन (Dan Caine) ने इससे बाहर निकलने का रास्ता तलाशने की ज़रूरत जताई है।

युद्ध से पीछे हटने की बना रहे योजना

अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार केन का मानना है कि युद्धको और बढ़ाने के लिए उपलब्ध सैन्य विकल्प से कोई फायदा नहीं होने वाला। सिर्फ हवाई शक्ति के दम पर ट्रंप के घोषित लक्ष्यों को हासिल करना मुश्किल होगा। एक सूत्र के अनुसार केन युद्ध से पीछे हटने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने सीआईए (CIA) चीफ जॉन रैटक्लिफ (John Ratcliffe), विदेश मंत्री मार्को रुबियो (Marco Rubio) और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) समेत ट्रंप प्रशासन के कुछ प्रमुख अधिकारियों के साथ इस पर चर्चा की है।

हथियारों की हो रही है कमी

ट्रंप ने ईरान के खिलाफ प्रस्तावित हमलों को फिलहाल टाल दिया है, लेकिन भविष्य में इन्हें फिर से शुरू करने की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया है। अमेरिका के घटते हथियार भंडार भी इसकी वजह हैं। हालांकि ट्रंप ने कहा है कि अमेरिकी सेना के पास हथियारों की कोई कमी नहीं है और प्रोडक्शन तेज़ी से हो रहा है, लेकिन सच तो यही है कि ईरान के खिलाफ युद्ध की वजह से अब अमेरिकी सेना के हथियार भंडार काफी घर गए हैं। जनरल केन जानते हैं कि अगर ट्रंप ईरान के खिलाफ युद्ध (Iran War) को और बढ़ाते हैं तो अमेरिकी सेना की एडवांस वायु रक्षा प्रणालियों की कमी के कारण वो ईरान की संभावित जवाबी कार्रवाई का सामना करने में मुश्किल का सामना कर सकते हैं।

सरेंडर नहीं करेगा ईरान

ईरान का रुख शुरू से साफ है कि वो सरेंडर नहीं करेगा। हालांकि ईरान ने बातचीत से इनकार नहीं किया है लेकिन यह भी साफ कर दिया है कि फिलहाल दोनों देशों के बीच कोई बातचीत नहीं चल रही है और ट्रंप की धमकियों की वजह से ईरान, अमेरिका से बातचीत नहीं करना चाहता।

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