ईरानी नेवी को मिली कामयाबी, होर्मुज स्ट्रेट में दुश्मन के रिमोट कंट्रोल जहाज को किया तबाह

ईरानी नेवी को मिली कामयाबी, होर्मुज स्ट्रेट में दुश्मन के रिमोट कंट्रोल जहाज को किया तबाह

ईरान (Iran) और अमेरिका (United States of America) में तनाव का असर होर्मुज स्ट्रेट में भी देखने को मिल रहा है। जहाजों की आवाजाही कम हो गई है और जो जहाज ईरान द्वारा अवैध घोषित रास्तों से गुज़रने की कोशिश कर रहे हैं, वो समुद्री बारूदी सुरंगों का शिकार बन रहे हैं। इसी बीच आज ईरानी सेना को एक और कामयाबी मिली है।

दुश्मन के रिमोट कंट्रोल जहाज को किया तबाह

आईआरजीसी – इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC – Islamic Revolutionary Guard Corps) ने जानकारी दी है कि ईरानी नेवी ने होर्मुज स्ट्रेट में दुश्मन के रिमोट कंट्रोल जहाज को तबाह कर दिया है। इसे कहाँ से ऑपरेट किया जा रहा था, फिलहाल इस बारे में डिटेल सामने नहीं आई है।

तीन जहाज बने समुद्री बारूदी सुरंगों का शिकार

ईरान में आज तीन जहाज, जो होर्मुज स्ट्रेट में ईरान द्वारा अवैध घोषित रास्ते से गुज़र रहे थे, समुद्री बारूदी सुरंगों का शिकार बन गए। जहाज समुद्री बारूदी सुरंग से टकरा गए, जिसकी वजह से उनमें धमाका हो गया और फिर आग लग गई। इनमें से एक सुपरटैंकर जहाज 20 लाख बैरल तेल लेकर जा रहा था।

एक ड्रोन को पकड़ा और एक को मार गिराया

इससे पहले गुरुवार को आईआरजीसी ने होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) के पास एक अमेरिकी जासूसी ड्रोन को पकड़ा है। आईआरजीसी की नेवी ने एक बयान में बताया कि उसकी इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर यूनिट के सैनिकों ने होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिम में अमेरिकी सेना के एक जासूसी ड्रोन MQM-170 को सुरक्षित रूप से उतारने में सफलता हासिल की। आईआरजीसी ने अपने बयान में आगे बताया कि अमेरिका के इस जासूसी ड्रोन का मिशन फारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट के तटीय इलाकों में ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम्स की पहचान करना था। आईआरजीसी नेवी के एक्सपर्ट्स ने इस जासूसी ड्रोन से मिली जानकारी के आधार पर यह पता लगाया है कि इस ड्रोन ने फारस की खाड़ी के दक्षिणी किनारे पर स्थित अमेरिका के किसी सहयोगी देश के तट से उड़ान भरी थी। इससे पहले गुरुवार को ही आईआरजीसी ने होर्मुज स्ट्रेट के पूर्व में अपने एयरस्पेस में अमेरिका के एक MQ-1 ड्रोन को मार गिराया। अमेरिकी सेना ने 2018 में ही MQ-1 ड्रोन को सेवानिवृत्त कर दिया था। हालांकि ईरान समेत कुछ देशों में अपनी सैन्य कार्रवाई के लिए अमेरिका अभी भी इस ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है।

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