झालावाड़ एसआरजी और जनाना अस्पताल में इलाज नहीं मिलने से नाराज परिजनों ने गुरुवार को हंगामा कर दिया। परिजन 17 वर्षीय नाबालिग मरीज को ट्रॉली समेत अस्पताल से बाहर निकालकर नेशनल हाईवे पर ले गए। परिजनों का आरोप था कि मरीज को भर्ती कराने के लिए वे एसआरजी और जनाना अस्पताल के बीच चक्कर काटते रहे, लेकिन दोनों जगह से उन्हें स्पष्ट इलाज नहीं मिला। खेत में चुन्नी फंसने से हुई बेहोश रायपुर क्षेत्र के पालखंदा गांव निवासी 17 वर्षीय सविता खेत में काम कर रही थी। इसी दौरान उसकी चुन्नी खेत में फंस गई, जिससे वह बेहोश हो गई। परिजन उसे इलाज के लिए रायपुर अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां से हालत को देखते हुए उसे झालावाड़ रेफर कर दिया गया। दोनों अस्पतालों के बीच घूमते रहे परिजन परिजन सविता को लेकर झालावाड़ के एसआरजी अस्पताल पहुंचे। यहां उसकी उम्र कम होने की बात कहते हुए उसे जनाना अस्पताल भेज दिया गया। परिजनों के अनुसार जनाना अस्पताल पहुंचने पर वहां यह कहते हुए भर्ती करने से मना कर दिया गया कि मरीज की फाइल एसआरजी अस्पताल की है। इससे परिजन नाराज हो गए। ट्रॉली लेकर हाईवे पर पहुंचे लगातार दोनों अस्पतालों के बीच चक्कर लगाने के बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। वे मरीज को ट्रॉली समेत अस्पताल से बाहर लेकर नेशनल हाईवे पर पहुंच गए और हंगामा किया। मामले की सूचना मिलने पर अस्पताल चौकी पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों को समझाकर मरीज को वापस जनाना अस्पताल ले गई। जनाना अस्पताल में शुरू हुआ इलाज पुलिस की मौजूदगी में मरीज को वापस जनाना अस्पताल लाया गया, जहां उसे भर्ती कर इलाज शुरू किया गया। जनाना अस्पताल अधीक्षक डॉ. माधुरी मीणा ने बताया कि मरीज की हालत अब ठीक है और उसे भर्ती कर इलाज दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में हुई गलती की जांच की जाएगी।

