इजराइल में चुनावी फंडिंग पर बवाल: नेतन्याहू बोले- ‘राआमगेट भूकंप’, अरब पार्टियों से गठबंधन न करने की अपील

इजराइल में चुनावी फंडिंग पर बवाल: नेतन्याहू बोले- ‘राआमगेट भूकंप’, अरब पार्टियों से गठबंधन न करने की अपील

Israel Election Controversy: यरूशलम। इजरायल में संसदीय चुनावों के बाद सरकार गठन की प्रक्रिया के बीच विदेशी फंडिंग के आरोपों ने राजनीतिक माहौल में बड़ा भूचाल ला दिया है। इजरायल केंद्रीय चुनाव समिति द्वारा मंगलवार को हुए मतदान में विदेशी वित्तपोषण (फॉरेन फंडिंग) के आरोपों की जांच के आदेश दिए जाने के बाद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे ‘राआमगेट’ करार देते हुए इसे बड़ा राजनीतिक झटका बताया और सभी जायोनी पार्टियों से अरब दलों के साथ गठबंधन नहीं करने की अपील की।

नेतन्याहू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि राआमगेट मामला एक भूकंप है। इजरायल में चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश की गई है। न्यायाधीश सोलबर्ग द्वारा दिए गए बयान- जिसमें अरब दलों के पक्ष में मतदाताओं को रिश्वत देने और विदेशी संस्थाओं के हस्तक्षेप की बात कही गई है बेहद चौंकाने वाले हैं।

नेतन्याहू ने आगे कहा कि यह इजरायली लोकतंत्र पर एक हमला है, जिसका उद्देश्य संसद (नेसेट) पर विदेशी नियंत्रण स्थापित करना और दक्षिणपंथी शासन को हटाना है। उन्होंने कहा कि इन खुलासों के बाद किसी भी यहूदीवादी पार्टी को ‘राअम’ (Ra’am) या ‘जॉइंट लिस्ट’ जैसे अरब समूहों के साथ सहयोग नहीं करना चाहिए। नेतन्याहू ने आंतरिक सुरक्षा एजेंसी ‘शिन बेट’ और पुलिस से इस मामले की तत्काल जांच की मांग की है।

विपक्ष ने चेताया- नई संसद के गठन में देरी न हो

विपक्षी गठबंधन के नेता गादी आइजेनकोट ने चुनाव की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए हर शिकायत की जांच का समर्थन किया। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि राजनीतिक दल इस मामले का इस्तेमाल 26वीं नेसेट (इजराइल की संसद) के गठन में देरी करने के लिए न करें। आइजेनकोट ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया को किसी भी तरह के हस्तक्षेप, राजनीतिक प्रचार या पक्षपात से बचाना जरूरी है, लेकिन जांच के नाम पर नई संसद के शपथ ग्रहण और गठन का समय प्रभावित नहीं होना चाहिए।

सरकार गठन की राह हो सकती है मुश्किल

विदेशी फंडिंग के आरोपों की जांच का असर इजराइल में सरकार गठन की संभावनाओं पर भी पड़ सकता है। अरब पार्टियों के समर्थन से विपक्षी गठबंधन की सरकार बनाने की संभावनाएं इस घटनाक्रम के बाद प्रभावित हो सकती हैं। ऐसे में राष्ट्रपति इसाक हर्जोग के सामने सरकार बनाने के लिए किसी नेता को आमंत्रित करने का फैसला चुनौतीपूर्ण हो सकता है। फिलहाल जांच के नतीजों का इंतजार है। यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो इसका असर इजराइल की चुनावी राजनीति और गठबंधन समीकरणों पर पड़ सकता है। वहीं, आरोप साबित नहीं होने की स्थिति में राजनीतिक दलों के बीच इस मुद्दे को लेकर टकराव जारी रहने की आशंका है।

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