इंदौर क्राइम ब्रांच ने करोड़ों रुपए की जमीन से जुड़े मामले में दो महिलाओं सहित चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। आरोप है कि आरोपियों ने जमीन को रिहायशी कॉलोनी बताकर लोगों से रुपए लिए, लेकिन भुगतान के बाद भी प्लॉट की रजिस्ट्री नहीं कराई और डेवलपमेंट का काम भी नहीं करने दिया। शिकायत के आधार पर क्राइम ब्रांच ने मामले की जांच शुरू की है। क्राइम ब्रांच ने गुरुवार को रोहित सूद, रमेश रिझवानी, पंकज रिझवानी, राजेश रामरखिया, विशाल मित्तल, उनकी पत्नी अंकिता सहित एक दर्जन से ज्यादा लोगों की शिकायत के बाद संजय अग्रवाल, नीना अग्रवाल, रितू अग्रवाल और गुरनाम सिंह धारीवाल के खिलाफ केस दर्ज किया। फर्जी दस्तावेज से जमीन बेचने का आरोप क्राइम ब्रांच के मुताबिक, आरोपियों ने रिहायशी कॉलोनी बताकर जमीन की वास्तविक स्थिति छिपाई। इसके लिए फर्जी और कूटरचित दस्तावेज तैयार कर लोगों से रुपए वसूले गए। आरोप है कि नगर निगम द्वारा मॉर्गेज किए गए प्लॉट भी लोगों को बेच दिए गए। 2014-15 से लिए करोड़ों, अब तक रजिस्ट्री नहीं जांच में सामने आया कि आरोपियों ने वर्ष 2014 और 2015 से लोगों से करोड़ों रुपए लिए, लेकिन इसके बावजूद प्लॉट की रजिस्ट्री नहीं कराई। आरोपियों ने करीब 22 एकड़ जमीन पर अलग-अलग योजनाएं बनाकर प्लॉट अलग-अलग लोगों को बेचने की बात भी सामने आई है। क्राइम ब्रांच के अधिकारियों के मुताबिक, आरोपियों ने अलग-अलग फर्म के माध्यम से लोगों से नकद और आरटीजीएस के जरिए रुपए लिए थे। शिकायतकर्ताओं के बयान दर्ज करने के बाद पुलिस ने कार्रवाई की है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और आरोपों से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।

