हापुड़ के आर्य कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय में अंग्रेजी विभाग एक सात दिवसीय ‘क्रिएटिव राइटिंग’ कार्यशाला चला रहा है। इसके पांचवें दिन छात्राओं को कहानी लेखन की बारीकियां सिखाई गईं। यह कार्यशाला ‘इथोस’ (साहित्यिक और सांस्कृतिक सोसायटी) के तहत 17 से 23 सितंबर 2026 तक आयोजित की जा रही है। 21 सितंबर को कार्यशाला के पहले सत्र में अंग्रेजी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मीनू कश्यप ने छात्राओं को रचनात्मक लेखन में ‘संघर्ष’ की भूमिका समझाई। उन्होंने बताया कि कहानी में संघर्ष घटनाओं को आगे बढ़ाता है और पाठक की रुचि बनाए रखता है। इस सत्र में छात्राओं को आंतरिक और बाहरी संघर्ष के अलग-अलग रूपों को उदाहरणों के साथ समझाया गया। दूसरे सत्र में अंग्रेजी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर और विभागाध्यक्षा डॉ. अलका सिंह ने ‘कथावाचक’ और ‘कथावाचन तकनीक’ पर विस्तार से बात की। उन्होंने छात्राओं को प्रथम पुरुष और तृतीय पुरुष कथावाचक के अलग-अलग दृष्टिकोणों को उदाहरणों से समझाया। कार्यशाला में संवाद, घटनाओं के वर्णन, कहानी को देखने के दृष्टिकोण और घटनाओं को क्रमबद्ध तरीके से प्रस्तुत करने जैसे पहलुओं पर भी चर्चा हुई। इसके बाद छात्राओं ने अलग-अलग कथन शैलियों का इस्तेमाल करते हुए छोटे लेखन अभ्यास किए और अपने असाइनमेंट जमा किए। पूरे सत्र के दौरान छात्राओं ने विषय से जुड़े सवाल पूछकर सक्रिय रूप से भाग लिया। दिए गए रचनात्मक अभ्यासों में भी उन्होंने उत्साह के साथ हिस्सा लिया। महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. साधना तोमर ने छात्राओं की भागीदारी की तारीफ की। उन्होंने कहा कि रचनात्मक लेखन से विद्यार्थियों की कल्पना शक्ति, अभिव्यक्ति क्षमता और संवेदनशीलता बढ़ती है। प्राचार्या ने छात्राओं से ऐसे शैक्षणिक अवसरों का पूरा लाभ उठाने और अपने विचारों को खुलकर व्यक्त करने को कहा। विभागाध्यक्षा डॉ. अलका सिंह ने बताया कि रचनात्मक लेखन सिर्फ भाषा सीखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विचारों, अनुभवों और कल्पनाओं को प्रभावशाली तरीके से सामने रखने की कला भी है। उन्होंने छात्राओं को नियमित पढ़ाई और लेखन के जरिए अपनी रचनात्मक क्षमता को लगातार निखारने के लिए प्रेरित किया।

