मधेपुरा में रंगकर्मियों ने कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार चंद्रवंशी से आम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र में नाटक एवं रंगमंच विधा को शामिल करने की मांग की है। उन्होंने इस क्षेत्र में प्रशिक्षित युवाओं को प्रशिक्षक के रूप में अवसर देने का भी आग्रह किया। रंगकर्मी सुनीत साना, अमित कुमार अंशु और अमित आनंद सहित अन्य कलाकारों ने मंत्री को एक आवेदन सौंपा। मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार चंद्रवंशी एक कार्यक्रम में शामिल होने मधेपुरा आए थे। इसी दौरान भाजपा नेता डॉ. अमोल राय के आवास पर कलाकारों ने उनसे मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। सभी जिलों में आम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र संचालित रंगकर्मियों ने अपने आवेदन में बताया कि बिहार सरकार द्वारा सभी जिलों में आम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य कला एवं संस्कृति की विभिन्न विधाओं को बढ़ावा देना और युवाओं को प्रशिक्षण व रोजगार के अवसर प्रदान करना है। नाटक-रंगमंच बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत कलाकारों ने बताया कि इन केंद्रों में कला की कई विधाएं शामिल हैं, लेकिन नाटक एवं रंगमंच जैसी महत्वपूर्ण विधा को अब तक जगह नहीं मिली है। उन्होंने जोर दिया कि नाटक और रंगमंच बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग हैं। राज्य में बड़ी संख्या में कलाकार, रंगकर्मी और नाट्य संस्थाएं इस क्षेत्र में सक्रिय हैं। योग्य एवं प्रशिक्षित अभ्यर्थियों को प्रशिक्षक नियुक्त करें इसके अतिरिक्त, विभिन्न विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों से नाट्यशास्त्र, नाटक एवं रंगमंच में डिग्री प्राप्त करने वाले युवा भी अपनी योग्यता के अनुसार अवसरों की तलाश में हैं। रंगकर्मियों ने मांग की कि आम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र में नाटक एवं रंगमंच को आधिकारिक तौर पर शामिल किया जाए। साथ ही, योग्य एवं प्रशिक्षित अभ्यर्थियों को प्रशिक्षक के रूप में नियुक्त करने का प्रावधान भी किया जाए। नाट्यकला के क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे उनका तर्क है कि इससे नाट्यकला के क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे। यह पहल युवाओं में अभिनय, संवाद कौशल, रचनात्मकता, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, अनुशासन, टीम भावना और सामाजिक जागरूकता विकसित करने में भी सहायक होगी। कलाकारों ने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार की इस सकारात्मक पहल से बिहार में नाटक एवं रंगमंच के विकास को नई दिशा मिलेगी और प्रशिक्षित युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खुलेंगे। नाटक में डिग्री पाने वाले अभ्यर्थियों पर विचार वहीं, मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार चंद्रवंशी ने कहा कि बिहार सरकार कला एवं संस्कृति के क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए लगातार नई योजनाओं पर काम कर रही है। नाटक में डिग्री हासिल करने वाले अभ्यर्थियों के लिए रोजगार एवं प्रशिक्षण के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में भी विचार किया जा रहा है। मधेपुरा में रंगकर्मियों ने कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार चंद्रवंशी से आम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र में नाटक एवं रंगमंच विधा को शामिल करने की मांग की है। उन्होंने इस क्षेत्र में प्रशिक्षित युवाओं को प्रशिक्षक के रूप में अवसर देने का भी आग्रह किया। रंगकर्मी सुनीत साना, अमित कुमार अंशु और अमित आनंद सहित अन्य कलाकारों ने मंत्री को एक आवेदन सौंपा। मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार चंद्रवंशी एक कार्यक्रम में शामिल होने मधेपुरा आए थे। इसी दौरान भाजपा नेता डॉ. अमोल राय के आवास पर कलाकारों ने उनसे मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। सभी जिलों में आम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र संचालित रंगकर्मियों ने अपने आवेदन में बताया कि बिहार सरकार द्वारा सभी जिलों में आम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य कला एवं संस्कृति की विभिन्न विधाओं को बढ़ावा देना और युवाओं को प्रशिक्षण व रोजगार के अवसर प्रदान करना है। नाटक-रंगमंच बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत कलाकारों ने बताया कि इन केंद्रों में कला की कई विधाएं शामिल हैं, लेकिन नाटक एवं रंगमंच जैसी महत्वपूर्ण विधा को अब तक जगह नहीं मिली है। उन्होंने जोर दिया कि नाटक और रंगमंच बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग हैं। राज्य में बड़ी संख्या में कलाकार, रंगकर्मी और नाट्य संस्थाएं इस क्षेत्र में सक्रिय हैं। योग्य एवं प्रशिक्षित अभ्यर्थियों को प्रशिक्षक नियुक्त करें इसके अतिरिक्त, विभिन्न विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों से नाट्यशास्त्र, नाटक एवं रंगमंच में डिग्री प्राप्त करने वाले युवा भी अपनी योग्यता के अनुसार अवसरों की तलाश में हैं। रंगकर्मियों ने मांग की कि आम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र में नाटक एवं रंगमंच को आधिकारिक तौर पर शामिल किया जाए। साथ ही, योग्य एवं प्रशिक्षित अभ्यर्थियों को प्रशिक्षक के रूप में नियुक्त करने का प्रावधान भी किया जाए। नाट्यकला के क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे उनका तर्क है कि इससे नाट्यकला के क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे। यह पहल युवाओं में अभिनय, संवाद कौशल, रचनात्मकता, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, अनुशासन, टीम भावना और सामाजिक जागरूकता विकसित करने में भी सहायक होगी। कलाकारों ने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार की इस सकारात्मक पहल से बिहार में नाटक एवं रंगमंच के विकास को नई दिशा मिलेगी और प्रशिक्षित युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खुलेंगे। नाटक में डिग्री पाने वाले अभ्यर्थियों पर विचार वहीं, मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार चंद्रवंशी ने कहा कि बिहार सरकार कला एवं संस्कृति के क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए लगातार नई योजनाओं पर काम कर रही है। नाटक में डिग्री हासिल करने वाले अभ्यर्थियों के लिए रोजगार एवं प्रशिक्षण के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में भी विचार किया जा रहा है।

