आणंद. ऑल बंगाली कल्चरल ट्रस्ट, आणंद द्वारा इस वर्ष पहली बार पारंपरिक दुर्गापूजा का आयोजन किया जा रहा है। इससे पहले लगातार 39 वर्षों तक आणंद बंगाली कल्चरल एसोसिएशन द्वारा दुर्गापूजा का आयोजन किया जा रहा था।
आणंद जिले के बंगाली समाज के लिए दुर्गापूजा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति, परंपराओं और विरासत को जीवंत बनाए रखने का महत्वपूर्ण अवसर भी है। बंगाली समाज के सबसे बड़े त्योहार के रूप में पहचानी जाने वाली दुर्गापूजा षष्ठी से नवमी तक चार से पांच दिनों के दौरान श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाई जाती है।
ट्रस्ट के अध्यक्ष पार्थ चक्रवर्ती ने बताया कि सोमवार सुबह सात बजे संधि पूजा की गई। इसके बाद विशेष पूजा तथा दोपहर में पुष्पांजलि का आयोजन किया गया। वहीं, शाम को संध्या आरती की गई। इन धार्मिक अनुष्ठानों में समाज के लोगों ने श्रद्धापूर्वक भाग लिया।
दुर्गापूजा के दौरान प्रतिदिन सुबह मां दुर्गा की पूजा-अर्चना और शाम को आरती के बाद विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है, जिनमें समाज के सदस्य उत्साहपूर्वक भाग लेते हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से समाज के लोगों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़ने का अवसर मिलता है।
चक्रवर्ती के अनुसार, विशेष रूप से बच्चों को सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने और अपनी कला प्रस्तुत करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, ताकि वे अपनी संस्कृति और परंपराओं को बेहतर ढंग से समझ सकें और उनसे जुड़े रहें। दुर्गापूजा का यह उत्सव बंगाली समाज को अपनी सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को संरक्षित रखने के साथ-साथ उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाने का अवसर प्रदान करता है।
वडोदरा के कीर्ति मंदिर में बंगाली समाज ने की मां दुर्गा की पूजा
वडोदरा. बंगाली समाज की ओर से शहर के कीर्ति मंदिर परिसर में महाष्टमी के अवसर पर मां दुर्गा की प्रतिमा की पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान समाज के लोगों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार मां दुर्गा की आराधना की और परिवार व समाज की सुख-समृद्धि की कामना की। पूजा के अवसर पर श्रद्धालु एकत्रित हुए और भक्तिभाव के साथ मां दुर्गा के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

