अररिया के फारबिसगंज में रविवार को भक्ति, आस्था और उत्साह के रंग में रंगा नजर आ रहा है। शहर की सड़कों पर जगह-जगह फूलों की सजावट, झंडियां और लाइटिंग की गई है। हर तरफ भगवान श्रीराम, माता सीता और बजरंगबली की झांकियां दिखाई दे रही हैं। ऐतिहासिक श्री सांवलिया कुंज ठाकुरवाड़ी से निकलने वाली श्री महावीर झंडा शोभायात्रा को लेकर सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी हुई है। माहौल ऐसा है मानो पूरा शहर किसी बड़े उत्सव के लिए दुल्हन की तरह सज गया हो। रविवार सुबह 7 बजे सुंदरकांड पाठ के साथ आयोजन की शुरुआत हुई। मंदिर परिसर में भक्तों ने सामूहिक रूप से सुंदरकांड का पाठ किया। दोपहर 2 बजे ढोल-नगाड़ों, गाजे-बाजे और रंग-बिरंगी झांकियों के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। आयोजकों के मुताबिक, इस बार बड़ी संख्या में रामभक्तों के इसमें शामिल होने की संभावना है। 114 साल से चली आ रही परंपरा, अब फारबिसगंज की पहचान श्री सांवलिया कुंज ठाकुरवाड़ी की स्थापना वर्ष 1904 में महावीर प्रसाद और भुवनेश्वर प्रसाद ने की थी। यहां से निकलने वाली महावीर झंडा शोभायात्रा की परंपरा करीब 114 वर्ष पुरानी बताई जाती है। आयोजकों के अनुसार, वर्ष 1912 में रामायण परिषद के वार्षिकोत्सव और भगवान श्रीकृष्ण की छठी के अवसर पर इस आयोजन की शुरुआत हुई थी। शुरुआत में यह धार्मिक आयोजन तक सीमित था, लेकिन समय के साथ इसका स्वरूप व्यापक होता गया। आज यह शोभायात्रा सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं रह गई है, बल्कि फारबिसगंज की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान का हिस्सा बन चुकी है। हर साल इसमें श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है। अलग-अलग मोहल्लों और आसपास के इलाकों से लोग इस आयोजन में शामिल होने पहुंचते हैं। सुबह सुंदरकांड, दोपहर में झांकियों के साथ निकलेगी यात्रा सुबह सुंदरकांड पाठ के दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय रहा। श्रद्धालु भजन और जयकारों के बीच पाठ में शामिल हुए। इसके बाद दोपहर 2 बजे शोभायात्रा निकलेगी। शोभायात्रा में रामायण के प्रसंगों पर आधारित झांकियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी। भगवान राम, माता सीता और हनुमान जी से जुड़े प्रसंगों के साथ हनुमान जी की लीलाओं को भी झांकियों के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। स्थानीय कलाकार भी अपनी प्रस्तुतियां देंगे। ढोल-नगाड़ों और भक्ति संगीत के बीच निकलने वाली यात्रा के दौरान शहर की प्रमुख सड़कें श्रद्धालुओं से भरने की संभावना है। फूलों, झंडियों और लाइटिंग से सजाया पूरा शहर शोभायात्रा को लेकर मंदिर से लेकर शहर के प्रमुख मार्गों तक विशेष सजावट की गई है। कहीं फूलों से स्वागत द्वार बनाए गए हैं तो कहीं रंग-बिरंगी झंडियां लगाई गई हैं। रात के लिए जगह-जगह लाइटिंग की व्यवस्था भी की गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि महावीर महोत्सव के दौरान पूरा शहर अलग ही रंग में नजर आता है। व्यापारियों, युवाओं और महिलाओं की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है। एक हजार से ज्यादा पुलिसकर्मी संभालेंगे सुरक्षा बड़ी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। शोभायात्रा के दौरान विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक हजार से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। जुलूस के पूरे रूट, प्रमुख चौक-चौराहों और संवेदनशील स्थानों पर पुलिस की विशेष निगरानी रहेगी। भीड़ नियंत्रण के साथ यातायात व्यवस्था को भी संभालने की तैयारी की गई है। प्रशासन किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त बल और निगरानी व्यवस्था के साथ तैयार है। नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास आयोजन के नेतृत्वकर्ता पंडित अंगद भूषण दूबे हैं। व्यवस्थापक सदस्यों में अंजनी मिश्र, आचार्य अभिषेक दुबे, शिवम दुबे सहित अन्य लोग शामिल हैं। आयोजकों का कहना है कि इस आयोजन का उद्देश्य सिर्फ धार्मिक उत्सव मनाना नहीं है। इसके जरिए रामकथा, महावीर भक्ति और सदियों पुरानी सांस्कृतिक परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास भी किया जा रहा है। शोभायात्रा में शामिल झांकियां और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां इसी उद्देश्य का हिस्सा हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही इस परंपरा ने लोगों को एक साथ जोड़ने का काम किया है। शाम को आरती और प्रसाद वितरण दोपहर में निकलने वाली शोभायात्रा शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए मंदिर परिसर लौटेगी। इसके बाद आरती और प्रसाद वितरण का कार्यक्रम प्रस्तावित है। रविवार को फारबिसगंज में सुबह से शाम तक भक्ति, संगीत और उत्सव का माहौल रहने वाला है। एक सदी से अधिक पुरानी यह परंपरा आज भी उसी उत्साह के साथ आगे बढ़ रही है। यही वजह है कि महावीर झंडा शोभायात्रा अब सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि फारबिसगंज की पहचान और सामुदायिक एकता का प्रतीक बन चुकी है। अररिया के फारबिसगंज में रविवार को भक्ति, आस्था और उत्साह के रंग में रंगा नजर आ रहा है। शहर की सड़कों पर जगह-जगह फूलों की सजावट, झंडियां और लाइटिंग की गई है। हर तरफ भगवान श्रीराम, माता सीता और बजरंगबली की झांकियां दिखाई दे रही हैं। ऐतिहासिक श्री सांवलिया कुंज ठाकुरवाड़ी से निकलने वाली श्री महावीर झंडा शोभायात्रा को लेकर सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी हुई है। माहौल ऐसा है मानो पूरा शहर किसी बड़े उत्सव के लिए दुल्हन की तरह सज गया हो। रविवार सुबह 7 बजे सुंदरकांड पाठ के साथ आयोजन की शुरुआत हुई। मंदिर परिसर में भक्तों ने सामूहिक रूप से सुंदरकांड का पाठ किया। दोपहर 2 बजे ढोल-नगाड़ों, गाजे-बाजे और रंग-बिरंगी झांकियों के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। आयोजकों के मुताबिक, इस बार बड़ी संख्या में रामभक्तों के इसमें शामिल होने की संभावना है। 114 साल से चली आ रही परंपरा, अब फारबिसगंज की पहचान श्री सांवलिया कुंज ठाकुरवाड़ी की स्थापना वर्ष 1904 में महावीर प्रसाद और भुवनेश्वर प्रसाद ने की थी। यहां से निकलने वाली महावीर झंडा शोभायात्रा की परंपरा करीब 114 वर्ष पुरानी बताई जाती है। आयोजकों के अनुसार, वर्ष 1912 में रामायण परिषद के वार्षिकोत्सव और भगवान श्रीकृष्ण की छठी के अवसर पर इस आयोजन की शुरुआत हुई थी। शुरुआत में यह धार्मिक आयोजन तक सीमित था, लेकिन समय के साथ इसका स्वरूप व्यापक होता गया। आज यह शोभायात्रा सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं रह गई है, बल्कि फारबिसगंज की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान का हिस्सा बन चुकी है। हर साल इसमें श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है। अलग-अलग मोहल्लों और आसपास के इलाकों से लोग इस आयोजन में शामिल होने पहुंचते हैं। सुबह सुंदरकांड, दोपहर में झांकियों के साथ निकलेगी यात्रा सुबह सुंदरकांड पाठ के दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय रहा। श्रद्धालु भजन और जयकारों के बीच पाठ में शामिल हुए। इसके बाद दोपहर 2 बजे शोभायात्रा निकलेगी। शोभायात्रा में रामायण के प्रसंगों पर आधारित झांकियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी। भगवान राम, माता सीता और हनुमान जी से जुड़े प्रसंगों के साथ हनुमान जी की लीलाओं को भी झांकियों के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। स्थानीय कलाकार भी अपनी प्रस्तुतियां देंगे। ढोल-नगाड़ों और भक्ति संगीत के बीच निकलने वाली यात्रा के दौरान शहर की प्रमुख सड़कें श्रद्धालुओं से भरने की संभावना है। फूलों, झंडियों और लाइटिंग से सजाया पूरा शहर शोभायात्रा को लेकर मंदिर से लेकर शहर के प्रमुख मार्गों तक विशेष सजावट की गई है। कहीं फूलों से स्वागत द्वार बनाए गए हैं तो कहीं रंग-बिरंगी झंडियां लगाई गई हैं। रात के लिए जगह-जगह लाइटिंग की व्यवस्था भी की गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि महावीर महोत्सव के दौरान पूरा शहर अलग ही रंग में नजर आता है। व्यापारियों, युवाओं और महिलाओं की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है। एक हजार से ज्यादा पुलिसकर्मी संभालेंगे सुरक्षा बड़ी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। शोभायात्रा के दौरान विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक हजार से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। जुलूस के पूरे रूट, प्रमुख चौक-चौराहों और संवेदनशील स्थानों पर पुलिस की विशेष निगरानी रहेगी। भीड़ नियंत्रण के साथ यातायात व्यवस्था को भी संभालने की तैयारी की गई है। प्रशासन किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त बल और निगरानी व्यवस्था के साथ तैयार है। नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास आयोजन के नेतृत्वकर्ता पंडित अंगद भूषण दूबे हैं। व्यवस्थापक सदस्यों में अंजनी मिश्र, आचार्य अभिषेक दुबे, शिवम दुबे सहित अन्य लोग शामिल हैं। आयोजकों का कहना है कि इस आयोजन का उद्देश्य सिर्फ धार्मिक उत्सव मनाना नहीं है। इसके जरिए रामकथा, महावीर भक्ति और सदियों पुरानी सांस्कृतिक परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास भी किया जा रहा है। शोभायात्रा में शामिल झांकियां और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां इसी उद्देश्य का हिस्सा हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही इस परंपरा ने लोगों को एक साथ जोड़ने का काम किया है। शाम को आरती और प्रसाद वितरण दोपहर में निकलने वाली शोभायात्रा शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए मंदिर परिसर लौटेगी। इसके बाद आरती और प्रसाद वितरण का कार्यक्रम प्रस्तावित है। रविवार को फारबिसगंज में सुबह से शाम तक भक्ति, संगीत और उत्सव का माहौल रहने वाला है। एक सदी से अधिक पुरानी यह परंपरा आज भी उसी उत्साह के साथ आगे बढ़ रही है। यही वजह है कि महावीर झंडा शोभायात्रा अब सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि फारबिसगंज की पहचान और सामुदायिक एकता का प्रतीक बन चुकी है।

