अमरकंटक में श्रावणी पर्व का समापन:नर्मदा तट पर पहुंचे 100 से अधिक विप्रजन, किया आत्मशुद्धि अनुष्ठान

अमरकंटक में श्रावणी पर्व का समापन:नर्मदा तट पर पहुंचे 100 से अधिक विप्रजन, किया आत्मशुद्धि अनुष्ठान

अनूपपुर जिले की आध्यात्मिक नगरी अमरकंटक में शुक्रवार को श्रावणी पूर्णिमा और शतभिषा नक्षत्र के पावन योग में श्रावणी पर्व मनाया गया। श्रावण मास की पूर्णाहुति पर यह पर्व पूरे श्रद्धा-भाव एवं वैदिक परंपराओं के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर नगर के पुरोहितों, पंडितों और विप्रजनों ने पतित-पावनी मां नर्मदा के रामघाट एवं उद्गम कुंड में आस्था की डुबकी लगाई। उन्होंने शास्त्रोक्त विधि से उपाकर्म एवं श्रावणी कर्म संपन्न किया। सुबह से ही रामघाट पर धार्मिक अनुष्ठान का माहौल रहा, जहां पुरोहितों ने नर्मदा की पवित्र धारा में स्नान के बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संकल्प लेकर कर्मकांड आरंभ किया। इस आयोजन में लगभग एक सैकड़ा (100) विप्रजनों ने सहभागिता की। अनुष्ठान का संचालन पंडित रवि महाराज द्वारा शास्त्रोक्त विधि से कराया गया। इस दौरान शांति कुटी आश्रम के प्रमुख महामंडलेश्वर स्वामी रामभूषण दास जी महाराज, मृत्युंजय आश्रम के पंडित योगेश दुबे, बिहारी लाल तिवारी और पंडित संदीप उपाध्याय सहित बड़ी संख्या में स्थानीय पुरोहित उपस्थित रहे। रामघाट के साथ-साथ मां नर्मदा के उद्गम स्थल स्थित पवित्र नर्मदा कुंड परिसर में भी धार्मिक अनुष्ठान आयोजित हुआ। नर्मदा मंदिर के पुजारी कामता प्रसाद द्विवेदी (नीलू महाराज) के नेतृत्व में ब्राह्मणों ने पूजा-अर्चना की। उमेश द्विवेदी, राजेश द्विवेदी, कमलेश द्विवेदी, जीतेंद्र द्विवेदी और धर्मेंद्र द्विवेदी सहित अन्य विप्रजनों ने मंत्रोच्चार के साथ परंपरा का निर्वहन किया। सनातन परंपरा में श्रावणी पूर्णिमा का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। यह पर्व गुरु, ऋषि परंपरा, स्वाध्याय, आत्मशुद्धि और वेद-संस्कृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर माना जाता है। प्राचीन काल से ही इस दिन स्वाध्याय व संस्कारों के पुनः स्मरण की परंपरा रही है। अमरकंटक में रामघाट से लेकर उद्गम कुंड तक कल-कल बहती नर्मदा और गूंजते वैदिक मंत्रों ने सनातन संस्कृति की जीवंत विरासत को साकार किया। इस आयोजन के साथ ही श्रावण मास के धार्मिक अनुष्ठानिक क्रम का भी समापन हो गया।

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