मध्यप्रदेश में स्वामित्व योजना के 50 लाख हितग्राहियों की रजिस्ट्री कराने के लिए रजिस्ट्रीकर्ता बनाए गए पटवारी अब पदीय अधिकारी के तौर पर यह जिम्मेदारी निभाएंगे। जिस भूमिस्वामी के नाम पर रजिस्ट्री होगी, वही क्रेता-विक्रेता के रूप में शामिल होगा। रजिस्ट्री के दौरान यदि पटवारी को लगता है कि भूखंड को लेकर किसी तरह का विवाद है, प्रकरण न्यायालय में लंबित है या जमीन कहीं गिरवी रखी गई है, तो वह रजिस्ट्री रोक सकेगा। राज्य शासन ने पटवारियों के साथ पांच मंत्रियों की कमेटी और अफसरों की बैठक के बाद यह व्यवस्था तय की है। राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव ई. रमेश कुमार ने राज्यपाल के आदेश के आधार पर इसके निर्देश जारी किए हैं। हालांकि 24 सितंबर को जारी आदेश के बाद भी पटवारी रजिस्ट्री कराने के लिए पूरी तरह सहमत नहीं हुए हैं। पटवारियों की ओर से इस मामले में लीगल एडवाइस लेने और सभी पटवारियों की सहमति बनाने का काम सोशल मीडिया ग्रुप के माध्यम से किया जा रहा है। माना जा रहा है कि नए निर्देशों के आधार पर पटवारी सरकार के काम के लिए सहमत हो सकते हैं। पटवारियों के विरोध के बाद पुराने आदेश में किए बदलाव पटवारियों के विरोध के बाद योजना में रजिस्ट्री को लेकर 13 अगस्त 2026 को जारी निर्देशों में बदलाव किया गया है। संशोधित निर्देशों के अनुसार अधिकार अभिलेख के दस्तावेजों की रजिस्ट्री भूखंडवार की जाएगी। एक ही भूखंड में एक से अधिक हितग्राहियों के नाम दर्ज होने की स्थिति में उस भूखंड से संबंधित सभी हितग्राही द्वितीय पक्षकार के रूप में शामिल होंगे। इसके लिए भूमिस्वामी को घोषणा करनी होगी कि भूखंड को लेकर कोई विवाद नहीं है, उसकी पहले कोई रजिस्ट्री नहीं की गई है और उस पर उसका अधिकार वर्तमान में मौजूद है। किसी प्रकार का विवाद, लंबित नामांतरण, उत्तराधिकार प्रकरण, नाम या पहचान में विसंगति, पहले की गई रजिस्ट्री या अन्य गड़बड़ी मिलने पर पटवारी रजिस्ट्री की कार्रवाई नहीं करेगा। ऐसे मामलों का निराकरण मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता के प्रासंगिक प्रावधानों के अनुसार सक्षम प्राधिकारी द्वारा किया जाएगा। पदीय अधिकारी की हैसियत से रजिस्ट्री कराएंगे पटवारी प्रमुख सचिव राजस्व के निर्देश के अनुसार, रजिस्ट्री प्रक्रिया के दौरान संपदा प्रणाली संबंधित भूखंड के मूल्य की प्रारंभिक गणना करेगी। स्टांप और पंजीयन शुल्क की गणना के बाद संपदा प्रणाली में प्रचलित प्रावधान के अनुसार यह खर्च राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। प्रक्रिया पूरी होने के बाद पटवारी राज्य शासन की ओर से अधिकृत निष्पादक अधिकारी के रूप में अपनी पदीय हैसियत से रजिस्ट्री की कार्रवाई करेगा। संबंधित भूमिस्वामी रजिस्ट्री कराने वाला पक्षकार होगा। इन्हें मिले उप पंजीयक के अधिकार निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि पंजीयन अधिकारी स्वत्व संबंधी विवाद का निर्णय करने वाला प्राधिकारी नहीं है। हालांकि पंजीयन अधिनियम, 1908 के तहत पहचान और अन्य निर्धारित वैधानिक आवश्यकताओं की जांच करना उसका दायित्व होगा। रजिस्ट्री के बाद उसका पंजीयन संपदा प्रणाली के माध्यम से संबंधित पंजीयन अधिकारी करेगा। इसके लिए पंजीयन विभाग के उप पंजीयकों के अलावा जिले की तहसील में पदस्थ तहसीलदार, नायब तहसीलदार, प्रभारी तहसीलदार और प्रभारी नायब तहसीलदार को उप पंजीयक के अधिकार दिए गए हैं। इसके अलावा राजस्व निरीक्षक, प्रभारी राजस्व निरीक्षक और सहायक विकास विस्तार अधिकारी, पंचायत समन्वय अधिकारी भी यह कार्रवाई पूरी करेंगे। जिला स्तर पर कलेक्टर प्रभारी, अपर कलेक्टर नोडल अधिकारी योजना के क्रियान्वयन में राजस्व विभाग, वाणिज्यिक कर विभाग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, पंचायत राज एवं ग्रामीण विकास विभाग और जनसंपर्क विभाग की भूमिका तय की गई है। जिला स्तर पर कलेक्टर योजना के प्रभारी होंगे, जबकि अपर कलेक्टर नोडल अधिकारी के रूप में योजना की समीक्षा और समन्वय करेंगे। राजस्व अनुविभागीय अधिकारी अनुविभाग स्तर पर जिम्मेदारी संभालेंगे। इसके अलावा नामांकित जोनल और सेक्टर अधिकारियों के साथ ग्राम पंचायत एवं पंचायत सचिव के बीच समन्वय की जिम्मेदारी भी तय की गई है। योजना से संबंधित शिविर लगाने, निगरानी और समन्वय की जिम्मेदारी अधिकारियों को दी गई है। पटवारी योजना के तहत निष्पादक (रजिस्ट्रीकर्ता) अधिकारी होंगे और ‘सारा’ ऐप के माध्यम से आवेदन तथा संबंधित रजिस्ट्री का शासन की ओर से पदीय हैसियत से निष्पादन करेंगे। तहसीलदार, नायब तहसीलदार, प्रभारी तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक, पंचायत समन्वय अधिकारी और सहायक विकास विस्तार अधिकारी योजना में पंजीयन अधिकारी के तौर पर काम करेंगे। सरकारी खाते से ऑटो डेबिट होगा पंजीयन और स्टांप शुल्क योजना में लगने वाले शुल्क की राशि जिला स्तर पर संचालित सेंट्रलाइज्ड वॉलेट के माध्यम से स्वत: डेबिट होकर पंजीयन कार्यालय को ट्रांसफर हो जाएगी। योजना 17 सितंबर से शुरू हो चुकी है, लेकिन पटवारियों के रजिस्ट्रीकर्ता अधिकारी बनाए जाने के विरोध के कारण इसकी रफ्तार प्रभावित हुई। अब तक करीब 1,000 रजिस्ट्री ही हो पाई हैं। पटवारियों के इस प्रक्रिया में शामिल होने के बाद इसमें तेजी आने की उम्मीद है। हालांकि पटवारी अभी भी इस मामले में लीगल एडवाइस ले रहे हैं और उन्होंने सरकार को अपनी सहमति नहीं दी है।

