अनूपपुर जिले के जैतहरी वन परिक्षेत्र में दो हाथियों के एक समूह ने सोमवार को द्वाही बांध को क्षतिग्रस्त कर दिया। बांध टूटने से उसमें भरा पानी तेजी से आसपास के खेतों में फैल गया और सोन नदी की ओर बह गया, जिससे किसानों की मेढ़ें बह गईं। ग्राम पंचायत पचौहा के सरपंच राय सिंह ने इस घटना की जानकारी जैतहरी वन परिक्षेत्र के कुसुम्हाई बीट गार्ड कोमल सिंह को दी। उन्होंने राजस्व विभाग को भी सूचित किया है। सरपंच राय सिंह के अनुसार, ये दोनों हाथी पिछले दो दिनों से कुसुम्हाई के जंगल में डेरा डाले हुए थे। सोमवार दोपहर को बांध के नीचे एक बड़े गड्ढे में लगभग एक घंटे तक नहाने के बाद, हाथियों ने बांध की ओर बढ़ना शुरू किया। उनके बांध पर कदम रखते ही मिट्टी धंसने लगी। जैसे ही हाथी बांध की बढ़े गड्ढे के रूप में मिट्टी धड़कती गई, इसके बाद हाथी बांध पार कर जंगल की ओर बढ़े, कुछ ही देर में बांध के निचले हिस्से से पानी का तेजी से रिसाव शुरू हो गया। देखते ही देखते, बांध का लगभग 50-60 फीट हिस्सा पानी के तेज बहाव में बह गया, जिससे बारिश और जंगली क्षेत्र से आने वाला सारा पानी कुछ ही घंटों में खाली हो गया। 50 किसानों को नुकसान सरपंच राय सिंह ने बताया कि यह बांध वन विभाग क्षेत्र में बना है और लगभग 50-60 साल पुराना है। यह बरसाती पानी को रोकने के लिए लगभग 1500 मीटर क्षेत्र में बनाया गया था। उनका अनुमान है कि मरम्मत के अभाव में पुराना हो चुका यह बांध लगातार बारिश के कारण कमजोर हो गया होगा, जिसमें दरारें या सुराख बन गए होंगे। हाथियों के कदम पड़ते ही बांध की मेढ़ की मिट्टी धंस गई और पानी के दबाव से कमजोर हिस्सा टूट गया। बांध टूटने से पानी का बहाव इतना तेज था कि बांध के किनारे स्थित लगभग 40-50 किसानों के खेतों की मेढ़ें बह गईं। इससे किसानों के धान को नुकसान के साथ खेत में पानी ठहराव में परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।फिलहाल हाथियों ने कुसुम्हाई के जंगल रुख किया है, वहीं ग्रामीण फूटे बांध को लेकर चिंतित हैं। नुकसान की अन्य तस्वीरें…

