बांका में संबद्ध कॉलेज में करोड़ों का घोटाला और गरीब बच्चों से लिये गये पैसों का बंदरबांट किए जाने का मामला सामने आया है। रजौन प्रखंड अंतर्गत डीएन सिंह भुसिया कॉलेज में 17 सूत्री मांगों को लेकर तृतीय वर्ग कर्मचारी कन्हैया लाल सिंह का अनिश्चितकालीन अनशन बुधवार को सातवें दिन भी जारी रहा। लगातार सात दिनों से भोजन नहीं करने के कारण उनकी तबीयत बिगड़ रही है और उन्हें सलाइन के सहारे रखा गया है।बुधवार को मेडिकल टीम ने अनशन स्थल पर पहुंचकर स्वास्थ्य जांच की। चिकित्सकों ने सलाइन चढ़ाने के साथ दवा दी और लंबे समय तक भूखे रहने से स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई।इसके बावजूद कन्हैया लाल सिंह ने मांगें पूरी होने तक अनशन समाप्त करने से इंकार कर दिया। सीओ, बीडीओ व थानाध्यक्ष अनशन स्थल पर पहुंचे बुधवार को सीओ विश्वजीत कुमार, बीडीओ अंतिमा कुमारी और थानाध्यक्ष महेश कुमार पुलिस बल के साथ अनशन स्थल पर पहुंचे। अधिकारियों ने अनशनकारी से बातचीत कर स्वास्थ्य का हवाला देते हुए आंदोलन समाप्त करने की अपील की।प्रशासन की ओर से संबंधित स्तर पर मांगों को रखने और समाधान का प्रयास करने का भरोसा दिया गया। लेकिन कन्हैया लाल सिंह ने कहा कि पूर्व में तीन बार आश्वासन के बाद अनशन समाप्त कराया गया, लेकिन बाद में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इसलिए इस बार शासी निकाय की बैठक बुलाकर 17 सूत्री मांगों पर ठोस निर्णय होने तक आंदोलन जारी रहेगा। जबरन हटाने पर जहर खाने की चेतावनी कन्हैया लाल सिंह ने प्रशासन के समक्ष कहा कि यदि उन्हें जबरन अनशन स्थल से हटाने का प्रयास किया गया तो वे जहर खाकर आत्महत्या कर लेंगे। इस चेतावनी के बाद कुछ देर तक अनशन स्थल पर गहमागहमी की स्थिति रही। अधिकारियों के समझाने के बावजूद अनशन समाप्त नहीं होने पर प्रशासनिक टीम वापस लौट गई।प्रशासन ने गुरुवार को कॉलेज प्रशासन और अनशनकारी के साथ दोबारा बैठक कर समाधान निकालने की बात कही है। अनशनकारी की 17 सूत्री मांगों में कॉलेज में पूर्व में बिना विज्ञापन की गई कथित बहाली को नियम विरुद्ध बताते हुए उसे रद्द करने की मांग प्रमुख है। उनका आरोप है कि इस मामले में पहले भी आंदोलन हुआ था। लेखा-जोखा में अनियमितता का आरोप तत्कालीन प्राचार्य डॉ. महेंद्र प्रसाद सिंह ने शासी निकाय की बैठक में प्राथमिकता के आधार पर निर्णय लेने का आश्वासन दिया था। आरोप है कि अब तक इस दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं हुई। कन्हैया लाल सिंह ने इंटर नामांकन, प्रायोगिक परीक्षा, बीए नामांकन एवं पंजीयन फार्म सहित विभिन्न मदों से प्राप्त शुल्क के लेखा-जोखा में भी कथित अनियमितता का आरोप लगाया है। उन्होंने इन सभी मामलों की जांच कराने और वित्तीय विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है।
उनका दावा है कि कॉलेज में अनुदान लाने के नाम पर शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों से करीब 20 लाख रुपए लिए गए थे। इस राशि का स्पष्ट हिसाब सामने नहीं आने का आरोप लगाते हुए उन्होंने जांच की मांग की है।
4 करोड़ के एफडी और निर्माण कार्य पर भी सवाल
कॉलेज के करीब चार करोड़ रुपए के फिक्स्ड डिपॉजिट का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग भी अनशनकारी ने की है। खेल मैदान में कल्याण छात्रावास के निर्माण, कॉलेज निधि से संबंधन कराने के नाम पर कथित निकासी, सेमेस्टर परीक्षा शुल्क और बोनाफाइड प्रमाणपत्र के लिए निर्धारित शुल्क से अधिक राशि लेने के आरोपों की भी जांच की मांग की गई है।
टीना शेड निर्माण में करीब डेढ़ करोड़ रुपए कॉलेज की दूसरी मंजिल पर टीना शेड निर्माण में करीब डेढ़ करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। अनशनकारी का कहना है कि निर्माण में निविदा प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। उन्होंने निर्माण की तकनीकी और वित्तीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े खर्च में पारदर्शिता नहीं होने से गड़बड़ी की आशंका है।
इंटर्नशिप के नाम पर 500 रुपए लेने पर सवाल
सत्र 2023-27 के सेमेस्टर पांच के विद्यार्थियों से इंटर्नशिप के नाम पर प्रति छात्र 500 रुपए लिए जाने पर भी सवाल उठाया गया है।अनशनकारी ने संबंधित कंपनी और पूरी प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है। वहीं, शासी निकाय में विश्वविद्यालय प्रतिनिधि के मनोनयन को लेकर भी उन्होंने आपत्ति जताई है। इसके लिए उन्होंने शिक्षा विभाग के 11 मार्च 2023 के आदेश का हवाला देते हुए प्रक्रिया की जांच की मांग की है। पूर्व शासी निकाय सदस्य डॉ. डीपी सिंह की ओर से कॉलेज के ऊपरी तल पर शेड निर्माण के खर्च का विवरण मांगे जाने के बाद कथित तौर पर शासी निकाय समिति को भंग किए जाने के आरोप की भी जांच की मांग की गई है। प्रभारी प्राचार्य पर भी लगाए आरोप
अनशनकारी ने वर्तमान प्रभारी प्राचार्य पर भी वित्तीय अनियमितता के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कॉलेज का प्रभार किसी वरीय शिक्षक को देने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि उनकी मांगें व्यक्तिगत हित से जुड़ी नहीं हैं, बल्कि कॉलेज की प्रशासनिक व्यवस्था, वित्तीय पारदर्शिता और नियमों के पालन से संबंधित हैं। कन्हैया लाल सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय और संबंधित अधिकारियों को कई बार आवेदन दिए गए, लेकिन अब तक जांच टीम कॉलेज नहीं पहुंची। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। उन्होंने 25 मई 2026 के पूर्व के अनशन का हवाला देते हुए कहा कि उस समय भी कार्रवाई का आश्वासन मिला था, लेकिन मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
-गुरुवार की बैठक पर टिकी नजर
प्रशासन की ओर से गुरुवार को अनशनकारी और कॉलेज प्रशासन के साथ बैठक कर मामले का समाधान निकालने की बात कही गई है। अब सभी की नजर इस बैठक पर टिकी है। कन्हैया लाल सिंह ने स्पष्ट किया है कि मांगों पर ठोस निर्णय और लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच शुरू होने तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी भी दी है।
सात दिन से अनशन के बावजूद समाधान नहीं निकलना कॉलेज प्रशासन और आंदोलनकारी के बीच संवाद की कमी को दर्शाता है। 17 सूत्री मांगों में नियुक्ति प्रक्रिया, शुल्क व वित्तीय लेन-देन, निर्माण कार्य और शासी निकाय की कार्यप्रणाली से जुड़े गंभीर आरोप हैं। इन आरोपों की जांच के लिए संबंधित विश्वविद्यालय अथवा सक्षम विभाग की स्वतंत्र जांच जरूरी होगी, ताकि आरोप और वास्तविकता अलग-अलग स्पष्ट हो सकें।
लंबे समय तक भूखे रहने से शरीर में ग्लूकोज और ऊर्जा की कमी होने लगती है। इससे कमजोरी, चक्कर, लो ब्लड प्रेशर और पानी-नमक के संतुलन में गड़बड़ी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लंबे अनशन की स्थिति में केवल सलाइन देना पर्याप्त नहीं माना जाता; व्यक्ति की लगातार चिकित्सकीय निगरानी जरूरी होती है। यदि किसी व्यक्ति की तबीयत बिगड़ रही हो तो आंदोलन के साथ-साथ उसकी सुरक्षा और तत्काल चिकित्सा को प्राथमिकता देना आवश्यक है। बांका में संबद्ध कॉलेज में करोड़ों का घोटाला और गरीब बच्चों से लिये गये पैसों का बंदरबांट किए जाने का मामला सामने आया है। रजौन प्रखंड अंतर्गत डीएन सिंह भुसिया कॉलेज में 17 सूत्री मांगों को लेकर तृतीय वर्ग कर्मचारी कन्हैया लाल सिंह का अनिश्चितकालीन अनशन बुधवार को सातवें दिन भी जारी रहा। लगातार सात दिनों से भोजन नहीं करने के कारण उनकी तबीयत बिगड़ रही है और उन्हें सलाइन के सहारे रखा गया है।बुधवार को मेडिकल टीम ने अनशन स्थल पर पहुंचकर स्वास्थ्य जांच की। चिकित्सकों ने सलाइन चढ़ाने के साथ दवा दी और लंबे समय तक भूखे रहने से स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई।इसके बावजूद कन्हैया लाल सिंह ने मांगें पूरी होने तक अनशन समाप्त करने से इंकार कर दिया। सीओ, बीडीओ व थानाध्यक्ष अनशन स्थल पर पहुंचे बुधवार को सीओ विश्वजीत कुमार, बीडीओ अंतिमा कुमारी और थानाध्यक्ष महेश कुमार पुलिस बल के साथ अनशन स्थल पर पहुंचे। अधिकारियों ने अनशनकारी से बातचीत कर स्वास्थ्य का हवाला देते हुए आंदोलन समाप्त करने की अपील की।प्रशासन की ओर से संबंधित स्तर पर मांगों को रखने और समाधान का प्रयास करने का भरोसा दिया गया। लेकिन कन्हैया लाल सिंह ने कहा कि पूर्व में तीन बार आश्वासन के बाद अनशन समाप्त कराया गया, लेकिन बाद में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इसलिए इस बार शासी निकाय की बैठक बुलाकर 17 सूत्री मांगों पर ठोस निर्णय होने तक आंदोलन जारी रहेगा। जबरन हटाने पर जहर खाने की चेतावनी कन्हैया लाल सिंह ने प्रशासन के समक्ष कहा कि यदि उन्हें जबरन अनशन स्थल से हटाने का प्रयास किया गया तो वे जहर खाकर आत्महत्या कर लेंगे। इस चेतावनी के बाद कुछ देर तक अनशन स्थल पर गहमागहमी की स्थिति रही। अधिकारियों के समझाने के बावजूद अनशन समाप्त नहीं होने पर प्रशासनिक टीम वापस लौट गई।प्रशासन ने गुरुवार को कॉलेज प्रशासन और अनशनकारी के साथ दोबारा बैठक कर समाधान निकालने की बात कही है। अनशनकारी की 17 सूत्री मांगों में कॉलेज में पूर्व में बिना विज्ञापन की गई कथित बहाली को नियम विरुद्ध बताते हुए उसे रद्द करने की मांग प्रमुख है। उनका आरोप है कि इस मामले में पहले भी आंदोलन हुआ था। लेखा-जोखा में अनियमितता का आरोप तत्कालीन प्राचार्य डॉ. महेंद्र प्रसाद सिंह ने शासी निकाय की बैठक में प्राथमिकता के आधार पर निर्णय लेने का आश्वासन दिया था। आरोप है कि अब तक इस दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं हुई। कन्हैया लाल सिंह ने इंटर नामांकन, प्रायोगिक परीक्षा, बीए नामांकन एवं पंजीयन फार्म सहित विभिन्न मदों से प्राप्त शुल्क के लेखा-जोखा में भी कथित अनियमितता का आरोप लगाया है। उन्होंने इन सभी मामलों की जांच कराने और वित्तीय विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है।
उनका दावा है कि कॉलेज में अनुदान लाने के नाम पर शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों से करीब 20 लाख रुपए लिए गए थे। इस राशि का स्पष्ट हिसाब सामने नहीं आने का आरोप लगाते हुए उन्होंने जांच की मांग की है।
4 करोड़ के एफडी और निर्माण कार्य पर भी सवाल
कॉलेज के करीब चार करोड़ रुपए के फिक्स्ड डिपॉजिट का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग भी अनशनकारी ने की है। खेल मैदान में कल्याण छात्रावास के निर्माण, कॉलेज निधि से संबंधन कराने के नाम पर कथित निकासी, सेमेस्टर परीक्षा शुल्क और बोनाफाइड प्रमाणपत्र के लिए निर्धारित शुल्क से अधिक राशि लेने के आरोपों की भी जांच की मांग की गई है।
टीना शेड निर्माण में करीब डेढ़ करोड़ रुपए कॉलेज की दूसरी मंजिल पर टीना शेड निर्माण में करीब डेढ़ करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। अनशनकारी का कहना है कि निर्माण में निविदा प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। उन्होंने निर्माण की तकनीकी और वित्तीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े खर्च में पारदर्शिता नहीं होने से गड़बड़ी की आशंका है।
इंटर्नशिप के नाम पर 500 रुपए लेने पर सवाल
सत्र 2023-27 के सेमेस्टर पांच के विद्यार्थियों से इंटर्नशिप के नाम पर प्रति छात्र 500 रुपए लिए जाने पर भी सवाल उठाया गया है।अनशनकारी ने संबंधित कंपनी और पूरी प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है। वहीं, शासी निकाय में विश्वविद्यालय प्रतिनिधि के मनोनयन को लेकर भी उन्होंने आपत्ति जताई है। इसके लिए उन्होंने शिक्षा विभाग के 11 मार्च 2023 के आदेश का हवाला देते हुए प्रक्रिया की जांच की मांग की है। पूर्व शासी निकाय सदस्य डॉ. डीपी सिंह की ओर से कॉलेज के ऊपरी तल पर शेड निर्माण के खर्च का विवरण मांगे जाने के बाद कथित तौर पर शासी निकाय समिति को भंग किए जाने के आरोप की भी जांच की मांग की गई है। प्रभारी प्राचार्य पर भी लगाए आरोप
अनशनकारी ने वर्तमान प्रभारी प्राचार्य पर भी वित्तीय अनियमितता के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कॉलेज का प्रभार किसी वरीय शिक्षक को देने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि उनकी मांगें व्यक्तिगत हित से जुड़ी नहीं हैं, बल्कि कॉलेज की प्रशासनिक व्यवस्था, वित्तीय पारदर्शिता और नियमों के पालन से संबंधित हैं। कन्हैया लाल सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय और संबंधित अधिकारियों को कई बार आवेदन दिए गए, लेकिन अब तक जांच टीम कॉलेज नहीं पहुंची। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। उन्होंने 25 मई 2026 के पूर्व के अनशन का हवाला देते हुए कहा कि उस समय भी कार्रवाई का आश्वासन मिला था, लेकिन मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
-गुरुवार की बैठक पर टिकी नजर
प्रशासन की ओर से गुरुवार को अनशनकारी और कॉलेज प्रशासन के साथ बैठक कर मामले का समाधान निकालने की बात कही गई है। अब सभी की नजर इस बैठक पर टिकी है। कन्हैया लाल सिंह ने स्पष्ट किया है कि मांगों पर ठोस निर्णय और लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच शुरू होने तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी भी दी है।
सात दिन से अनशन के बावजूद समाधान नहीं निकलना कॉलेज प्रशासन और आंदोलनकारी के बीच संवाद की कमी को दर्शाता है। 17 सूत्री मांगों में नियुक्ति प्रक्रिया, शुल्क व वित्तीय लेन-देन, निर्माण कार्य और शासी निकाय की कार्यप्रणाली से जुड़े गंभीर आरोप हैं। इन आरोपों की जांच के लिए संबंधित विश्वविद्यालय अथवा सक्षम विभाग की स्वतंत्र जांच जरूरी होगी, ताकि आरोप और वास्तविकता अलग-अलग स्पष्ट हो सकें।
लंबे समय तक भूखे रहने से शरीर में ग्लूकोज और ऊर्जा की कमी होने लगती है। इससे कमजोरी, चक्कर, लो ब्लड प्रेशर और पानी-नमक के संतुलन में गड़बड़ी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लंबे अनशन की स्थिति में केवल सलाइन देना पर्याप्त नहीं माना जाता; व्यक्ति की लगातार चिकित्सकीय निगरानी जरूरी होती है। यदि किसी व्यक्ति की तबीयत बिगड़ रही हो तो आंदोलन के साथ-साथ उसकी सुरक्षा और तत्काल चिकित्सा को प्राथमिकता देना आवश्यक है।

