Dewas News: कलेक्ट्रेट का गेट बंद कर धरने पर बैठे किसान, शाम 6 बजे पहुंचे कलेक्टर

Dewas News: कलेक्ट्रेट का गेट बंद कर धरने पर बैठे किसान, शाम 6 बजे पहुंचे कलेक्टर

Dewas Farmers Protest: मध्यप्रदेश के देवास में बुधवार को भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में देवास जिले के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में किसान अपनी मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। उदयनगर, विजयागंज मंडी, खातेगांव, कन्नौद, बागली और हाटपिपल्या सहित जिले के कोने-कोने से किसान आंदोलन में शामिल हुए। दोपहर 3 बजे तक कोई अधिकारी किसानों से चर्चा करने नहीं पहुंचा तो किसान कलेक्टर कार्यालय के मुख्य गेट पर बैठ गए और धरना शुरू कर दिया। कुछ समय बाद एडीएम शोभाराम सोलंकी किसानों के बीच पहुंचे और उनका मांग पत्र लिया।

शाम करीब 6 बजे धरना स्थल पहुंचे कलेक्टर

शाम करीब 6 बजे कलेक्टर भी धरना स्थल पर पहुंचे, तब किसानों ने अपनी मांगों को लेकर कलेक्टर के सामने विस्तार से चर्चा की। कलेक्टर ने प्रत्येक बिंदु पर चर्चा करते हुए चार प्रमुख मांगों के समाधान का आश्वासन दिया। कलेक्टर ने बताया कि 27 जनवरी को हुई ओलावृष्टि से हुए नुकसान के लिए करीब 20 करोड़ रुपए की राहत राशि मंजूर हो चुकी है, जो एक-दो दिन में किसानों के खातों में वितरित की जाएगी। जिले के 11 गांवों के बंदोबस्त की कार्रवाई करने की बात भी कही गई। वहीं हाटपिपल्या सिंचाई योजना का कार्य शीघ्र शुरू कराने तथा फसल बीमा से संबंधित समस्याओं को प्रदेश स्तर पर उठाकर समाधान कराने की बात कही गई।

किसानों ने रखीं प्रमुख मांगें

आपदा राशि- भारतीय किसान संघ ने प्राकृतिक आपदा से हुई फसल नुकसान की राहत राशि शीघ्र किसानों के खातों में जमा कराने की मांग की। किसानों के अनुसार 27 जनवरी की ओलावृष्टि में जिले के विभिन्न क्षेत्रों में फसलों को भारी नुकसान हुआ था। सर्वे होने के बावजूद कई किसानों को अब तक राहत राशि नहीं मिली है।

बीमा दावों का पुन: निष्पादन- किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में विसंगतियों का मुद्दा भी उठाया। वर्ष 2024 और 2025 के बीमा दावों का पुनः निष्पक्ष आकलन कर वास्तविक नुकसान के आधार पर किसानों को राशि दिलाने तथा फसल कटाई प्रयोग (सीसीई) के आंकड़ों को आधार बनाने की मांग की गई। किसानों ने सैटेलाइट आधारित आकलन में जमीनी वास्तविकता से अंतर होने का आरोप लगाते हुए इसकी समीक्षा की मांग की।

सिंचाई योजनाओं को जल्द पूरा करने की मांग- किसानों ने नर्मदा-कालीसिंध सिंचाई योजना के निर्माण में देरी और कार्य की गुणवत्ता की जांच की मांग की। वहीं हाटपिपल्या सिंचाई योजना का कार्य तीन वर्ष बाद भी शुरू नहीं होने पर इसे तत्काल प्रारंभ कर समय-सीमा में पूरा कराने की मांग रखी।

जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा- किसानों ने जंगली सूअर, नीलगाय (रोजड़ा), हिरण और बंदरों से फसलों को हो रहे नुकसान का मुद्दा उठाते हुए विशेष अभियान चलाने की मांग की। किसानों का कहना है कि जंगली जानवरों के कारण लगातार आर्थिक नुकसान हो रहा है, इसलिए उन्हें पकड़कर सुरक्षित रूप से बड़े जंगलों में छोड़ा जाए।

राजस्व रिकॉर्ड में सुधार और दूध का उचित भाव- किसानों ने जिले के कई गांवों में राजस्व नक्शे, दर्ज रकबे और मौके पर किसानों के कब्जे वाली भूमि में विसंगतियों को दूर करने के लिए विशेष राजस्व शिविर लगाने की मांग की। साथ ही पशुपालन की बढ़ती लागत को देखते हुए दूध का भाव 12 रुपए प्रति फैट निर्धारित करने की मांग भी रखी।

खेतों तक रास्ते और ग्रामीण सड़कों की समस्या- इंदौर-बैतूल फोरलेन एवं बुधनी-इंदौर रेल लाइन निर्माण के कारण बंद हुए किसानों के पारंपरिक रास्तों का सर्वे कर वैकल्पिक एवं स्थायी रास्ते उपलब्ध कराने की मांग की गई। इसके अलावा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और लोक निर्माण विभाग की क्षतिग्रस्त ग्रामीण सड़कों की मरम्मत एवं पुनर्निर्माण कराने तथा अतिक्रमण और जल निकासी की समस्याओं का निराकरण करने की मांग भी रखी गई।

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