धमतरी जिले के अछोटा गांव में ग्राम विकास समिति की बैठक के दौरान दो पक्षों में मारपीट हो गई। इसके बाद गांव में तनाव का माहौल बन गया। ग्रामीणों और ग्राम विकास समिति के सदस्य दो गुटों में बंट गए हैं। मारपीट के आरोप के बाद एक पक्ष ने नगरी-सिहावा मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। वहीं, दूसरा पक्ष पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचा और शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि बैठक के दौरान उनके साथ और महिलाओं के साथ भी मारपीट की गई और उनकी साड़ियां तक खींची गईं। शिकायत करने पहुंचे ग्राम विकास समिति के सदस्यों ने बताया कि जिला पंचायत सदस्य मौके पर मौजूद थीं, लेकिन उन्होंने मारपीट रोकने के लिए कुछ नहीं किया। हालांकि, जिला पंचायत सदस्य ने कहा कि वह वहां थीं, पर मारपीट कब हुई, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। पुलिस ने दोनों पक्षों से बातचीत कर मामले का समाधान निकालने और कार्रवाई करने की बात कही है। चक्काजाम के कारण राहगीरों को कई घंटे तक परेशानी का सामना करना पड़ा। बैठक के दौरान मारपीट का आरोप धमतरी के अछोटा गांव में बुधवार को ग्राम विकास समिति की बैठक चल रही थी। ग्रामीणों ने बताया कि बैठक शुरू में सामान्य तरीके से चल रही थी। इसी दौरान कुछ लोग वहां पहुंचे और मारपीट शुरू कर दी। ग्रामीणों का आरोप है कि महिलाओं के साथ भी मारपीट की गई। उनका कहना है कि बैठक में जो निर्णय लिए गए, वे सही थे, लेकिन इसके बाद ग्राम विकास समिति के लोगों को घेरकर उनके साथ हाथापाई की गई। ग्रामीणों ने गांव की जमीन से जुड़े पुराने विवाद का भी जिक्र किया। उनका आरोप है कि पूर्व सरपंच और उपसरपंच ने गांव की जमीन बेची थी। इस मामले को लेकर कोर्ट में भी मामला चला और ग्रामीणों के मुताबिक फैसला उनके पक्ष में आया, लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों ने जिला पंचायत सदस्य पर इस मामले में कार्रवाई रोकने का आरोप लगाया है। समिति अध्यक्ष ने बताया- पहले भी दबाव बनाया गया ग्राम विकास समिति के अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि समिति के पदाधिकारियों पर बार-बार बैठक करने का दबाव बनाया जाता है। उन्होंने बताया कि पहले भी एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के साथ मारपीट का मामला सामने आया था, जिसमें पुलिस कार्रवाई हो चुकी है। समिति इस वजह से गांव में दोबारा बैठक नहीं करना चाहती थी, लेकिन गांव का मामला गांव में ही सुलझाने के लिए लगातार दबाव बनाया गया। समिति अध्यक्ष के मुताबिक, पहले भी जिला पंचायत सदस्य की ओर से रजिस्टर में गांव में अशांति की स्थिति का जिक्र किया गया था और शांति व्यवस्था के लिए बैठक करने की बात कही गई थी। इसके बाद 17 समाज के लोगों की मौजूदगी में बैठक रखी गई। बारिश के कारण बैठक समाज भवन में हुई। समिति का आरोप है कि वहां भी धक्का-मुक्की और मारपीट हुई और भवन के गेट पर ताला लगा दिया गया। समिति के लोगों का कहना है कि वे किसी तरह वहां से बाहर निकले। समिति ने यह भी आरोप लगाया कि उनके पदाधिकारियों के खिलाफ बार-बार एससी-एसटी एक्ट के तहत शिकायतें की जाती हैं। इस संबंध में करीब 20 दिन पहले आजाक थाने में शिकायत किए जाने की बात भी कही गई है। जिला पंचायत सदस्य बोलीं- बैठक में असहमति के बाद समिति के लोग चले गए जिला पंचायत सदस्य मोनिका देवांगन ने कहा कि गांव की व्यवस्था सुधारने के लिए ग्राम विकास समिति और ग्रामीणों ने बैठक बुलाई थी। बैठक में कुछ आवेदन आए थे, जिन पर अभी निर्णय नहीं हुआ था। इसी दौरान कुछ मुद्दों पर ग्रामीणों के बीच सहमति और असहमति की स्थिति बनी और ग्राम विकास समिति के पदाधिकारी बैठक से उठकर चले गए। उन्होंने कहा कि गांव में कुछ मुद्दों को लेकर पहले से ही अशांति की स्थिति रहती है। उनका आरोप है कि ग्रामीण ग्राम विकास समिति के पदाधिकारियों से असंतुष्ट हैं। उन्होंने समिति के पदाधिकारियों से कहा कि अगर वे गांव की व्यवस्था नहीं संभाल पा रहे हैं तो इस्तीफा दे दें। मारपीट के आरोप पर मोनिका देवांगन ने कहा कि वह मौके पर मौजूद थीं, लेकिन उनके सामने किसी तरह की मारपीट नहीं हुई। उन्होंने कहा कि भीड़ की कोई तय स्थिति नहीं होती और ग्राम विकास समिति की ओर से ही लोगों को उकसाने का काम किया गया। उन्होंने कहा कि बैठक की व्यवस्था ग्राम विकास समिति की थी और समिति के पदाधिकारी ही इस बारे में बेहतर बता सकते हैं। पुलिस ने दोनों पक्षों से बात की विवाद के बाद एक पक्ष पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचा, जबकि दूसरे पक्ष ने सड़क पर चक्काजाम कर दिया। पुलिस ने दोनों पक्षों से बातचीत कर मामला शांत कराने और शिकायत के आधार पर कार्रवाई करने की बात कही है। गांव का विवाद अब पुलिस शिकायत और चक्काजाम तक पहुंच गया है, जिससे आम लोगों को भी परेशानी उठानी पड़ी।

