MP News: शहर के पनीर प्रेमियों के लिए ये खबर थोड़ा चौंकाने वाली है। जिसे आप बड़े चाव से पनीर बटर मसाला या पनीर टिक्का समझकर खा रहे हैं, असल में उसमें से पनीर गायब है। होटलों और ढाबों में दूध वाले असली पनीर की जगह एनालॉग और मिलावटी पनीर का मायाजाल बिछा रहे हैं। बाजार में ज्यादातर दूध से बने पनीर की जगह स्क्डि मिल्क पाउडर, फैट, सोयाबीन ऑयल आदि से बना एनालॉग और मिलावटी पनीर धड़ल्ले से बिक रहा है।
आम आदमी दोनों में देखकर कोई अंतर नहीं कर सकता, इसलिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने सख्ती का निर्णय लिया है। इसके मुताबिक होटल, ढाबे अपने यहां अगर दूध से बने पनीर का इस्तेमाल कर पनीर संबंधी डिश बना रहे हैं तो ही मेनू कार्ड में पनीर बटर मसाला, पनीर टिक्का आदि लिखेंगे। असली पनीर नहीं है, तो मेनू कार्ड पर उसे पनीर लिखना अपराध माना जाएगा।
दाम ही बता रहे हैं…
बाजार में बिक रहे पनीर के दाम ही उसकी असलियत बयां कर देते हैं। अगर दाम 200 के आसपास है, तो समझ लीजिए वह पनीर नहीं, अखाद्य रसायनों का मिश्रण है। – नरेंद्र मांडिल, राष्ट्रीय महासचिव, दूध डेयरी व्यवसायी संघ (संपूर्ण भारत)
कोई गड़बड़ी नहीं है…
हमारी टीम समय-समय पर पनीर के सैंपल भी लेती है। एक व्यक्ति को प्रतिदिन कम से कम पांच सैंपल लेना होते हैं। पनीर के सैंपल की रिपोर्ट करीब चार माह में आती है, अभी तक किसी भी मामले में कोई गड़बड़ी नहीं निकली है। – डॉ.सचिन श्रीवास्तव, खाद्य अभिहित अधिकारी
दूध से बने पनीर और एनालॉग में ये अंतर
असली पनीर नरम और दानेदार होता है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण के अनुसार पनीर दो प्रकार से बनता है। एक तो यह कि गाय या भैंस के दूध को गर्म करने के बाद, नींबू या सिरके से फाड़कर बनने वाले छेने से बनाते हैं। कानूनी व नियमों के तहत इसे ही पनीर कहा जाता है। इसके साथ ही पनीर को एसएमपी अर्थात स्क्डि मिल्क पाउडर, फैट, सोयाबीन ऑयल आदि को मिलाकर भी बनाया जाता है। यह भी पनीर जैसा ही दिखता है, लेकिन इसे एनालॉग के नाम से जाना जाता है।
एनालॉग सेहत के लिए नुकसानदायक है क्या ?
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण के नियमानुसार कोई भी लाइसेंस लेकर तय मानक में एनालॉग का उत्पादन कर सकता है। इसमें नियम यह कि एनालॉग को लूज अर्थात पनीर की तरह नहीं बेचा जा सकता है। इसे नियम से पैक कर रैपर पर एनालॉग लिखकर ही बेचना होता है। एफएसएसआइ ने एनालॉग के लिए उसमें मिलाए जाने वाले सभी पदार्थों का मानक भी निर्धारित किया है।
बदलना पड़ेगा मेनू कार्ड
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआइ) ने साफ कर दिया है कि जनता की आंखों में धूल झोंकना बंद करना होगा।
- अगर होटल संचालक एनालॉग का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो उन्हें मेनू में एनालॉग टिक्का या एनालॉग मसाला लिखना होगा।
- एनालॉग को खुला (लूज) बेचना गैरकानूनी है, इसे रैपर पर स्पष्ट जानकारी के साथ ही बेचा जा सकता है।


