सुप्रीम कोर्ट में बाल काटने को लेकर गड़बड़ी के संबंध में एक अनोखा मामला सामने आया है। इस मामले में एक प्रतिष्ठित सैलून को गलत बाल काटने के कारण एक महिला को भारी भरकम का जुर्माना चुकाना पड़ा। हालांकि, इस मामले में महिला ने 5.2 करोड़ के मुआवजे की मांग की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने नकार कर मात्र 25 लाख कर दिया।
क्या है मामला?
पूरे मामले की शुरुआत 12 अप्रैल, 2018 से होती है जब महिला एक फाइव स्टार होटल के सैलून में अपने बाल कटवाने गई। महिला के अनुसार सैलून ने उसके बालों को गलत तरीके से काट कर छोटा कर दिया। सेवा से नाखुश होकर महिला ने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज करवाई। इसके बाद 2021 में आयोग ने ब्यूटी सैलून को सेवा में लापरवाही का दोषी पाया। मुआवजे के रूप में महिला को 2 करोड़ रुपए भुगतान करने का आदेश दिया।
उपभोक्ता आयोग के फैसले से नाखुश सैलून ने सुप्रीम कोर्ट का रूख किया। इसके बाद न्यायालय ने मामले को पुनर्मूल्यांकन के लिए उपभोक्ता आयोग में वापस भेज दिया। उपभोक्ता आयोग ने मामले की पुनः सुनवाई के दौरान महिला ने अपने दावे की राशि 2 करोड़ से बढ़ाकर 5.2 करोड़ कर दी और इसके लिए उसने आयोग के सामने कुछ दस्तावेज भी पेश किए।
पुनर्मूल्यांकन में आयोग ने फैसला सुनाया कि शिकायत दर्ज होने की तारिख से भुगतान होने तक प्रति वर्ष 9% ब्याज के साथ मुआवजे की राशि 2 करोड़ रुपए महिला को भुगतान किए जाए। इस फैसले से नाखुश होकर सैलून ने फिर से सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
महिला की दलील
सुप्रीम कोर्ट में महिला ने कहा कि वह एक उच्च शिक्षित है और उसके पास I.I.M., कलकत्ता से मैनेजमेंट पोस्ट-ग्रेजुएट की डिग्री है, साथ ही मास कम्युनिकेशन में डिप्लोमा भी है। उसने जोर देकर कहा कि उसका आगे एक उज्ज्वल करियर था, जिसे ब्यूटी सैलून ने खराब कर दिया था। महिला ने कहा कि बाल कटवाने की लंबाई और शैली उसके लिए महत्वपूर्ण है और यह उसके पद और फिल्मों में मॉडलिंग के लिए जरूरी है।
महिला ने कहा कि वह पिछले 7 वर्षों से एक जगह से दूसरी जगह भाग रही हैं और अभी भी सेवा में कमी के लिए उन्हें पर्याप्त मुआवजा नहीं दिया गया है। उसने यह भी तर्क दिया कि यह ब्यूटी सैलून की ओर से एक चूक है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि महिला ने हलफनामें में जो भी दस्तावेज प्रस्तुत किए वे सभी फोटोकॉपी के रुप में थे और उन दस्तावेजो को जारी करने वाले किसी भी व्यक्ति को तलब नहीं किया गया था। कोर्ट ने कहा कि कुछ दस्तावेज घटना की तिथि से पहले के है और कुछ बाद के।
इसके बाद कोर्ट ने कहा कि जिस तरह से दस्तावेज प्रस्तुत किए गए है उससे यह प्रमाणित नहीं होता कि किया गया दावा करोड़ों रुपए के हर्जाने के लायक है। आगे सु्प्रीम कोर्ट ने कहा कि हर्जाना केवल शिकायतकर्ता के अनुमानों या सनक और कल्पनाओं पर नहीं दिया जा सकता है।
इसके साथ ही उपभोक्ता आयोग ने खराब बाल काटने के लिए बड़ा मुआवजा देकर गलती की है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सैलून ने पहले से चल रही कानूनी लड़ाई के दौरान ही 25 लाख रुपए जमा कराए थे। इसलिए महिला को वह राशि जारी दी जाए।


