कौन थीं मंसूरे बागेरजादेह? कट्टरपंथी शासन के केंद्र में रहकर भी गुमनाम रहीं ‘ईरान की आयरन लेडी’ का सफर खत्म

कौन थीं मंसूरे बागेरजादेह? कट्टरपंथी शासन के केंद्र में रहकर भी गुमनाम रहीं ‘ईरान की आयरन लेडी’ का सफर खत्म

Who was Mansoureh Khojasteh Bagherzadeh Biography: ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की पत्नी मंसूरे खोजस्ते बागेरज़ादेह (79 वर्ष) की मौत हो गई। ईरानी राज्य मीडिया प्रेस टीवी ने 2 मार्च 2026 (सोमवार) को घोषणा की कि उन्होंने US-इजरायल के संयुक्त हमलों में लगी गंभीर चोटों के कारण ‘शहादत’ प्राप्त की। वह शनिवार (28 फरवरी 2026) के हमलों के बाद कोमा में थीं, जिसमें उनके पति खामेनेई सहित कई परिवारजन मारे गए थे।

धार्मिक परिवार से ताल्लुक

मंसूरे का जन्म 1947 में मशहद (ईरान का दूसरा सबसे बड़ा शहर) में एक प्रतिष्ठित धार्मिक परिवार में हुआ। उनके पिता मोहम्मद इस्माइल खोजस्ते बागेरज़ादेह क्षेत्र के प्रमुख व्यवसायी थे। उनके भाई हसन खोजस्ते बागेरज़ादेह ईरान के राज्य प्रसारक IRIB के डिप्टी डायरेक्टर रह चुके हैं। 1964 में एक निजी कार्यक्रम में उन्होंने अली खामेनेई से मुलाकात की और 1965 में शादी हुई। शादी का निकाह प्रसिद्ध क्लेरिक मोहम्मद हादी मिलानी ने पढ़ाया।

दंपति के छह बच्चे हैं — चार बेटे और दो बेटियां। मनसूरेह ने सार्वजनिक जीवन में बहुत कम दिखाई दीं और हमेशा कम प्रोफाइल रखा। वह खामेनेई की एकमात्र पत्नी थीं और उनके साथ 60 साल से अधिक समय तक रहीं।

हमले में चोटें और मौत

1 मार्च 2026 की रिपोर्ट्स के अनुसार, US और इजरायल के संयुक्त हमलों (ऑपरेशन का हिस्सा) ने तेहरान के लीडरशिप कंपाउंड को निशाना बनाया, जहां खामेनेई का आवासीय परिसर तबाह हुआ। हमलों में खामेनेई (86) सहित उनके परिवार के पांच अन्य सदस्य मारे गए। मनसूरेह को गंभीर चोटें आईं, जिसके बाद उन्हें कोमा में रखा गया। दो दिन बाद उनकी मौत हो गई। ईरानी मीडिया ने इसे ‘शहादत’ करार दिया और कहा कि यह ‘अमेरिका-इजरायल की जंगी कार्रवाई’ का नतीजा है।

ईरान में शोक और गुस्से की लहर

ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने ‘निर्णायक जवाबी कार्रवाई’ की कसम खाई है। क्षेत्र में तनाव चरम पर है — ईरान ने सऊदी शहरों और अरामको पर जवाबी हमले किए, तेल कीमतें आसमान छू रही हैं। खामेनेई परिवार की मौत ने ईरान में शोक और गुस्से की लहर पैदा की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला रेजीम चेंज की दिशा में बड़ा कदम है, लेकिन इससे नई अस्थिरता और IRGC की मजबूत पकड़ बढ़ सकती है। मंसूरे की मौत ने ईरान के शीर्ष नेतृत्व को और कमजोर किया है, जबकि मिडिल ईस्ट में युद्ध का दायरा फैल रहा है।

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