जब बुझीं बीआरटीएस की लाइटें, खतरे में शहर की रात की राहें

जब बुझीं बीआरटीएस की लाइटें, खतरे में शहर की रात की राहें

हुब्बल्ली-धारवाड़ का बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (बीआरटीएस) कॉरिडोर शहर की आधुनिक परिवहन व्यवस्था की पहचान माना जाता है। करोड़ों रुपए की लागत से तैयार इस कॉरिडोर से उम्मीद की गई थी कि यह शहर की यातायात व्यवस्था को सुगम, व्यवस्थित और सुरक्षित बनाएगा। लेकिन विडंबना यह है कि आज यही कॉरिडोर रात के समय कई स्थानों पर अंधेरे में डूबा नजर आ रहा है। बड़ी संख्या में स्ट्रीट लाइटें खराब होने से न केवल सड़क की दृश्यता प्रभावित हो रही है, बल्कि राहगीरों और वाहन चालकों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई है।
करीब 18 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर और इसके साथ चलने वाली मिश्रित यातायात लेन पर सैकड़ों स्ट्रीट लाइटें लगाई गई थीं, ताकि रात के समय भी यातायात सुरक्षित बना रहे। लेकिन जब इनमें से कई लाइटें बंद पड़ी हों तो इसका सीधा असर सड़क सुरक्षा पर पडऩा स्वाभाविक है। अंधेरे में वाहन चलाते समय सड़क पर बने स्पीड ब्रेकर या अन्य अवरोध साफ दिखाई नहीं देते। इससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। खासकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह स्थिति और भी खतरनाक बन जाती है। कॉरिडोर के कई हिस्सों में लगातार अंधेरा रहने से पैदल चलने वालों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अंधेरे में सड़क पार करना या फुटपाथ पर चलना जोखिम भरा हो जाता है। शहर की इतनी महत्वपूर्ण सड़क पर यदि पर्याप्त रोशनी नहीं होगी तो यह केवल असुविधा नहीं, बल्कि सुरक्षा से जुड़ा गंभीर प्रश्न है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी बड़ी संख्या में स्ट्रीट लाइटें खराब होने तक व्यवस्था क्यों नहीं जागी। किसी भी बड़े बुनियादी ढांचे का निर्माण जितना महत्वपूर्ण होता है, उससे कहीं अधिक जरूरी उसका नियमित रखरखाव होता है। यदि समय-समय पर निरीक्षण और निगरानी की प्रभावी व्यवस्था हो तो ऐसी स्थिति पैदा ही नहीं होती। दरअसल, किसी भी शहर की पहचान उसकी सुरक्षित और व्यवस्थित सड़कों से होती है। यदि शहर की प्रमुख परिवहन धुरी ही अंधेरे में डूब जाए तो यह केवल तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि व्यवस्था की कमी को भी उजागर करता है। नागरिकों को सुरक्षित और भरोसेमंद यातायात उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। ऐसे में जरूरी है कि बीआरटीएस कॉरिडोर की सभी खराब स्ट्रीट लाइटों को जल्द ठीक किया जाए और नियमित निगरानी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि शहर की सड़कों पर अंधेरा नहीं, बल्कि भरोसे की रोशनी दिखाई दे।

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