(अमनप्रीत सिंह)
नयी दिल्ली, 28 अगस्त भारतीय पहलवानों से जुड़े डोपिंग और ठिकाने की जानकारी देने (वेयरअबाउट्स) से जुड़े कई मामलों के सामने आने के बाद भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) ने सख्त दिशानिर्देश जारी किए हैं। इन मामलों में एशियाई खेलों के लिए चुने गए दो पहलवान और हाल में अंडर-23 राष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक जीतने वाले खिलाड़ी भी शामिल हैं। डब्ल्यूएफआई ने कहा है कि डोपिंग नियमों का पालन करने की जिम्मेदारी खुद खिलाड़ियों की है।यह दिशानिर्देश तब जारी किए गए जब एशियाई खेलों के लिए चुने गए पहलवान मुकुल दहिया (86 किग्रा फ्रीस्टाइल) और दीपांशु (130 किग्रा ग्रीको-रोमन) डोपिंग मामलों के कारण भारतीय टीम से बाहर कर दिए गए। इसके कारण आगामी एशियाई खेलों में भारत इन दोनों भार वर्गों में हिस्सा नहीं ले पाएगा। डब्ल्यूएफआई के एक अधिकारी ने पीटीआई को बताया, ‘‘डब्ल्यूएफआई ने दीपांशु की जगह रोनक दहिया को टीम में शामिल करने की कोशिश की थी, लेकिन महासंघ को बताया गया कि किसी खिलाड़ी की जगह सिर्फ चोट की स्थिति में ही बदली जा सकती है, डोपिंग मामले में नहीं।’’
अधिकारी ने कहा, ‘‘पहलवानों में डोपिंग नियमों को लेकर जानकारी की कमी एक बड़ी समस्या है। इसी वजह से वे ‘व्हेयरअबाउट्स’ नियमों के तहत होने वाली जरूरी डोपिंग जांच में शामिल नहीं हो पाते। इसलिए हमने यह सलाह जारी की है।’’
मुकुल दहिया ने 2026 एशियाई चैंपियनशिप में रजत पदक जीता था। उन्हें राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (नाडा) ने ‘मेफेन्टरमाइन’ नामक प्रतिबंधित उत्तेजक पदार्थ के लिए पॉजिटिव पाए जाने के बाद अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया। उनका नमूना 31 मई को लखनऊ के साइ सेंटर में हुए एशियाई खेलों के चयन ट्रायल के दौरान लिया गया था।उन्होंने 86 किग्रा वर्ग में पहला स्थान हासिल किया था। डब्ल्यूएफआई के नाराज अधिकारी ने कहा, ‘‘मुकुल ने अपनी सफाई में कहा है कि उसने अपने एक पहलवान दोस्त की सलाह पर इंजेक्शन लिया था। लेकिन क्या यह स्वीकार किया जा सकता है?पहलवानों को इस बात की जिम्मेदारी खुद लेनी होगी कि वे क्या खा रहे हैं और अपने शरीर में क्या ले रहे हैं। ’’
दूसरी ओर, डब्ल्यूएफआई के एक सूत्र के अनुसार दीपांशु पर आठ साल का प्रतिबंध लगाया गया है। उनका ‘स्टैनोजोलोल’ जांच के लिए नमूना दोबारा पॉजिटिव आया और इसे डोपिंग नियमों का दूसरा उल्लंघन माना गया।इससे पहले भी दीपांशु को इसी पदार्थ के कारण तीन साल का प्रतिबंध झेलना पड़ा था। पिछले साल उन्होंने दोबारा खेलना शुरू किया और मई में एशियाई खेलों के चयन ट्रायल में जीत हासिल की थी। इन दोनों मामलों के कारण भारत को एशियाई खेलों में कुश्ती के दो स्थान गंवाने पड़े हैं।इससे भारतीय कुश्ती टीम की संख्या 18 से घटकर 16 रह गई है। अब डोपिंग के मामले अंडर-23 स्तर तक भी पहुंच गए हैं। निखिल (55 किग्रा ग्रीको-रोमन) और रोहित कुमार (65 किग्रा फ्रीस्टाइल) ने जुलाई में रोहतक में हुए अंडर-23 राष्ट्रीय चैंपियनशिप में पदक जीते थे।प्रतियोगिता के दौरान लिए गए उनके नमूने प्रतिबंधित पदार्थों के लिए पॉजिटिव पाए गए। इसके बाद दोनों को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया। निलंबन के कारण दोनों खिलाड़ी अंडर-23 विश्व चैंपियनशिप के चयन ट्रायल में हिस्सा नहीं ले सकते।इसके अलावा 2024 के अंडर-23 विश्व चैंपियन चिराग छिक्कारा (57 किग्रा) से भी ‘व्हेयरअबाउट्स’ से जुड़ा मामला सामने आया है। उन्हें तीन बार अपना ठिकाना या उपलब्धता सही तरीके से नहीं बताने के कारण नोटिस दिया गया और दो साल के लिए प्रतिबंधित किया गया है। इन घटनाओं के बाद डब्ल्यूएफआई ने अपनी नयी सलाह में साफ कहा है कि खिलाड़ी यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते कि उन्हें डोपिंग नियमों की जानकारी नहीं थी।खिलाड़ी यह भी नहीं कह सकते कि उन्होंने किसी कोच या सहयोगी स्टाफ पर भरोसा करके प्रतिबंधित पदार्थ लिया या गलती से कोई प्रतिबंधित पदार्थ उनके शरीर में चला गया। डब्ल्यूएफआई ने नाडा के ‘रजिस्टर्ड टेस्टिंग पूल’ (आरटीपी) या किसी अन्य ‘टेस्टिंग पूल’ में शामिल पहलवानों को अपना ‘व्हेयरअबाउट्स’ रिकॉर्ड सही और अपडेट रखने के साथ डोपिंग जांच के लिए उपलब्ध रहने की सलाह दी है। खिलाड़ियों को अपने नाडा/एडीएएमएस अकाउंट नियमित रूप से चेक करने को कहा गया है।उन्हें अपने रहने की जगह, ट्रेनिंग सेंटर, यात्रा की योजना और प्रतियोगिताओं के कार्यक्रम में बदलाव होने पर तुरंत जानकारी अपडेट करनी होगी। डब्ल्यूएफआई ने आरटीपी में शामिल खिलाड़ियों को लागू 60 मिनट की ‘टेस्टिंग’ जरूरत की भी याद दिलाई है। महासंघ ने पहलवानों को दवाइयों, सप्लीमेंट्स और पोषण से जुड़े उत्पादों का इस्तेमाल करते समय बहुत सावधानी बरतने को कहा है।किसी भी पदार्थ को लेने से पहले यह जांचना जरूरी है कि वह प्रतिबंधित तो नहीं है। खिलाड़ियों को अपने इलाज करने वाले डॉक्टरों को यह भी बताना चाहिए कि वे डोपिंग रोधी नियमों के तहत आते हैं। डब्ल्यूएफआई ने यह भी कहा है कि पहलवान केवल किसी साथी पहलवान, कोच, ट्रेनर या जिम के कर्मचारी की सलाह पर दवा या सप्लीमेंट नहीं लें।महासंघ ने कहा कि वह पहलवानों के लिए डोपिंग रोधी शिक्षा और जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित करेगा। डब्ल्यूएफआई ने कहा, ‘‘हमारा उद्देश्य केवल डोपिंग नियमों के उल्लंघन को रोकना नहीं है, बल्कि भारतीय कुश्ती में साफ-सुथरे खेल, सही जानकारी के आधार पर फैसले लेने और हर खिलाड़ी में व्यक्तिगत जिम्मेदारी की भावना पैदा करना है।
(अमनप्रीत सिंह)
नयी दिल्ली, 28 अगस्त भारतीय पहलवानों से जुड़े डोपिंग और ठिकाने की जानकारी देने (वेयरअबाउट्स) से जुड़े कई मामलों के सामने आने के बाद भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) ने सख्त दिशानिर्देश जारी किए हैं। इन मामलों में एशियाई खेलों के लिए चुने गए दो पहलवान और हाल में अंडर-23 राष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक जीतने वाले खिलाड़ी भी शामिल हैं। डब्ल्यूएफआई ने कहा है कि डोपिंग नियमों का पालन करने की जिम्मेदारी खुद खिलाड़ियों की है।
यह दिशानिर्देश तब जारी किए गए जब एशियाई खेलों के लिए चुने गए पहलवान मुकुल दहिया (86 किग्रा फ्रीस्टाइल) और दीपांशु (130 किग्रा ग्रीको-रोमन) डोपिंग मामलों के कारण भारतीय टीम से बाहर कर दिए गए। इसके कारण आगामी एशियाई खेलों में भारत इन दोनों भार वर्गों में हिस्सा नहीं ले पाएगा। डब्ल्यूएफआई के एक अधिकारी ने पीटीआई को बताया, ‘‘डब्ल्यूएफआई ने दीपांशु की जगह रोनक दहिया को टीम में शामिल करने की कोशिश की थी, लेकिन महासंघ को बताया गया कि किसी खिलाड़ी की जगह सिर्फ चोट की स्थिति में ही बदली जा सकती है, डोपिंग मामले में नहीं।
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अधिकारी ने कहा, ‘‘पहलवानों में डोपिंग नियमों को लेकर जानकारी की कमी एक बड़ी समस्या है। इसी वजह से वे ‘व्हेयरअबाउट्स’ नियमों के तहत होने वाली जरूरी डोपिंग जांच में शामिल नहीं हो पाते। इसलिए हमने यह सलाह जारी की है।
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मुकुल दहिया ने 2026 एशियाई चैंपियनशिप में रजत पदक जीता था। उन्हें राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (नाडा) ने ‘मेफेन्टरमाइन’ नामक प्रतिबंधित उत्तेजक पदार्थ के लिए पॉजिटिव पाए जाने के बाद अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया। उनका नमूना 31 मई को लखनऊ के साइ सेंटर में हुए एशियाई खेलों के चयन ट्रायल के दौरान लिया गया था।
उन्होंने 86 किग्रा वर्ग में पहला स्थान हासिल किया था। डब्ल्यूएफआई के नाराज अधिकारी ने कहा, ‘‘मुकुल ने अपनी सफाई में कहा है कि उसने अपने एक पहलवान दोस्त की सलाह पर इंजेक्शन लिया था। लेकिन क्या यह स्वीकार किया जा सकता है?
पहलवानों को इस बात की जिम्मेदारी खुद लेनी होगी कि वे क्या खा रहे हैं और अपने शरीर में क्या ले रहे हैं। ’’
दूसरी ओर, डब्ल्यूएफआई के एक सूत्र के अनुसार दीपांशु पर आठ साल का प्रतिबंध लगाया गया है। उनका ‘स्टैनोजोलोल’ जांच के लिए नमूना दोबारा पॉजिटिव आया और इसे डोपिंग नियमों का दूसरा उल्लंघन माना गया।
इससे पहले भी दीपांशु को इसी पदार्थ के कारण तीन साल का प्रतिबंध झेलना पड़ा था। पिछले साल उन्होंने दोबारा खेलना शुरू किया और मई में एशियाई खेलों के चयन ट्रायल में जीत हासिल की थी। इन दोनों मामलों के कारण भारत को एशियाई खेलों में कुश्ती के दो स्थान गंवाने पड़े हैं।
इससे भारतीय कुश्ती टीम की संख्या 18 से घटकर 16 रह गई है। अब डोपिंग के मामले अंडर-23 स्तर तक भी पहुंच गए हैं। निखिल (55 किग्रा ग्रीको-रोमन) और रोहित कुमार (65 किग्रा फ्रीस्टाइल) ने जुलाई में रोहतक में हुए अंडर-23 राष्ट्रीय चैंपियनशिप में पदक जीते थे।
प्रतियोगिता के दौरान लिए गए उनके नमूने प्रतिबंधित पदार्थों के लिए पॉजिटिव पाए गए। इसके बाद दोनों को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया। निलंबन के कारण दोनों खिलाड़ी अंडर-23 विश्व चैंपियनशिप के चयन ट्रायल में हिस्सा नहीं ले सकते।
इसके अलावा 2024 के अंडर-23 विश्व चैंपियन चिराग छिक्कारा (57 किग्रा) से भी ‘व्हेयरअबाउट्स’ से जुड़ा मामला सामने आया है। उन्हें तीन बार अपना ठिकाना या उपलब्धता सही तरीके से नहीं बताने के कारण नोटिस दिया गया और दो साल के लिए प्रतिबंधित किया गया है। इन घटनाओं के बाद डब्ल्यूएफआई ने अपनी नयी सलाह में साफ कहा है कि खिलाड़ी यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते कि उन्हें डोपिंग नियमों की जानकारी नहीं थी।
खिलाड़ी यह भी नहीं कह सकते कि उन्होंने किसी कोच या सहयोगी स्टाफ पर भरोसा करके प्रतिबंधित पदार्थ लिया या गलती से कोई प्रतिबंधित पदार्थ उनके शरीर में चला गया। डब्ल्यूएफआई ने नाडा के ‘रजिस्टर्ड टेस्टिंग पूल’ (आरटीपी) या किसी अन्य ‘टेस्टिंग पूल’ में शामिल पहलवानों को अपना ‘व्हेयरअबाउट्स’ रिकॉर्ड सही और अपडेट रखने के साथ डोपिंग जांच के लिए उपलब्ध रहने की सलाह दी है। खिलाड़ियों को अपने नाडा/एडीएएमएस अकाउंट नियमित रूप से चेक करने को कहा गया है।
उन्हें अपने रहने की जगह, ट्रेनिंग सेंटर, यात्रा की योजना और प्रतियोगिताओं के कार्यक्रम में बदलाव होने पर तुरंत जानकारी अपडेट करनी होगी। डब्ल्यूएफआई ने आरटीपी में शामिल खिलाड़ियों को लागू 60 मिनट की ‘टेस्टिंग’ जरूरत की भी याद दिलाई है। महासंघ ने पहलवानों को दवाइयों, सप्लीमेंट्स और पोषण से जुड़े उत्पादों का इस्तेमाल करते समय बहुत सावधानी बरतने को कहा है।
किसी भी पदार्थ को लेने से पहले यह जांचना जरूरी है कि वह प्रतिबंधित तो नहीं है। खिलाड़ियों को अपने इलाज करने वाले डॉक्टरों को यह भी बताना चाहिए कि वे डोपिंग रोधी नियमों के तहत आते हैं। डब्ल्यूएफआई ने यह भी कहा है कि पहलवान केवल किसी साथी पहलवान, कोच, ट्रेनर या जिम के कर्मचारी की सलाह पर दवा या सप्लीमेंट नहीं लें।
महासंघ ने कहा कि वह पहलवानों के लिए डोपिंग रोधी शिक्षा और जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित करेगा। डब्ल्यूएफआई ने कहा, ‘‘हमारा उद्देश्य केवल डोपिंग नियमों के उल्लंघन को रोकना नहीं है, बल्कि भारतीय कुश्ती में साफ-सुथरे खेल, सही जानकारी के आधार पर फैसले लेने और हर खिलाड़ी में व्यक्तिगत जिम्मेदारी की भावना पैदा करना है।
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