प्रदेश में भीषण गर्मी और लू के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए शिक्षा विभाग अलर्ट मोड पर आ गया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने बुधवार को सभी सरकारी और गैर-सरकारी स्कूलों के लिए बचाव के विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब स्कूलों में बच्चों को पानी पीने की याद दिलाने के लिए खास ‘वाटरबेल’ बजाई जाएगी। इसके साथ ही स्कूल यूनिफॉर्म और भारी बस्तों को लेकर भी विद्यार्थियों को बड़ी राहत दी गई है।
दिनचर्या और प्रार्थना सभा में बदलाव
धूप में कोई भी खेलकूद प्रशिक्षण, ड्रिल या कैंप नहीं करवाया जाएगा। स्कूलों की प्रार्थना सभा केवल छायादार स्थानों या कक्षाओं में कम समय के लिए ही आयोजित होगी। बच्चों को भारी-भरकम स्कूल बैग से राहत दिलाने के लिए अब केवल अति आवश्यक पाठ्य पुस्तकें ही मंगवाई जाएंगी।
वाटर बेल और हाइड्रेशन पर फोकस
स्कूलों में कम से कम 3 बार वाटर बेल बजेगी, ताकि बच्चे पेयजल और बाथरूम के लिए छोटे-छोटे ब्रेक ले सकें। हर कालांश में शिक्षक बच्चों को अपनी बोतल से पानी पीने की याद दिलाएंगे। ठंडे पानी के लिए वाटर कूलर या मटकों का उपयोग किया जाएगा। इन्हें रोजाना साफ कर स्वच्छ पानी भरना अनिवार्य होगा।
यूनिफॉर्म और जूतों में मिली बड़ी छूट
गर्मी को देखते हुए स्कूल यूनिफॉर्म में गर्दन की टाई पहनने से छूट दी जा सकती है। चमड़े के जूतों की जगह विद्यार्थी कपड़े या कैनवास के जूते पहन सकेंगे। बच्चों को ढीले और सूतीकपड़े पहनने की अनुमति होगी तथा वे अपनी सुविधानुसार आधी या पूरी बाजू की शर्ट पहन सकेंगे।
परिवहन और कक्षाओं की व्यवस्था
खुले साधनों जो सीधे धूप के संपर्क में हों ऐसे बच्चों का परिवहन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। स्कूल बस या वैन में क्षमता से अधिक बच्चे नहीं बैठाए जाएंगे और पीने का पानी व फर्स्ट एड किट अनिवार्य रूप से रखना होगा। कक्षाओं में सभी पंखे चालू होने चाहिए। सीधी धूप रोकने के लिए खिडकियों पर पर्दे, अखबार या ‘खस’ की पट्टियां लगाई जाएंगी। निर्माणाधीन, क्षतिग्रस्त या खुले कमरों में बच्चों को नहीं बिठाया जाएगा।
डाइट और प्राथमिक चिकित्सा
बच्चों को दोपहर में हल्का भोजन लाने की सलाह दी गई है। बासी और जंक फूड खाने से परहेज करना होगा। स्कूलों की फर्स्ट एड किट में ओआरएस, नमक-चीनी का घोल और लू से बचाव की आवश्यक दवाएं रखना अनिवार्य होगा। किसी भी इमरजेंसी के लिए स्कूलों की दीवार पर नजदीकी अस्पताल या डॉक्टर के नंबर बड़े अक्षरों में लिखे जाएंगे। आवासीय विद्यालयों में खेलकूद की गतिविधियां केवल शाम के समय ही आयोजित की जाएंगी । हॉस्टल के डायनिंग हॉल और कमरों में पानी-बिजली की सतत व्यवस्था के साथ ही बच्चों की डाइट में नींबू, छाछ और मौसमी फल शामिल किए जाएंगे।


