मथुरा, पांच अक्टूबर उत्तर प्रदेश के वृंदावन में एक व्यवसायी को ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर उससे 30 लाख रुपये की ठगी किए जाने का मामला सामने आया है। एक पुलिस अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। अधिकारी ने पीड़ित व्यवसायी रतन लाल अग्रवाल की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के हवाले से बताया कि 28 सितंबर को उन्हें एक अज्ञात व्यक्ति ने व्हाट्सएप कॉल किया और खुद को एटीएस (आतंकवाद निरोधी दस्ते) का अधिकारी बताया।
शिकायत के मुताबिक, कॉल करने वाले व्यक्ति ने अग्रवाल से कहा कि उनकी पत्नी अपने मोबाइल नंबर का इस्तेमाल धोखाधड़ी के लिए कर रही हैं और एक आपराधिक मामले में इस नंबर के शामिल होने की बात सामने आई है। शिकायत के अनुसार, आरोपी ने मामले को रफा-दफा करने के लिए अग्रवाल से 30 लाख रुपये की मांग की। शिकायत में दावा किया गया है कि आरोपी ने अग्रवाल को तीन दिन तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा और इस दौरान ऑडियो-वीडियो कॉल के जरिये उन पर लगातार नजर रखी गई तथा उन्हें किसी से भी बात करने से मना किया गया।
शिकायत में कहा गया है कि अग्रवाल ने डर के कारण इस घटना की जानकारी अपने परिवार के सदस्यों और दोस्तों तक को नहीं दी। इसमें कहा गया है कि अग्रवाल ने अपने अलग-अलग बैंक खातों से 30 लाख रुपये का इंतजाम किया और एक अक्टूबर को आरटीजीएस के जरिये आरोपी की ओर से बताए गए बैंक खाते में रकम अंतरित कर दी। शिकायत के मुताबिक, जब अग्रवाल के बेटे को इस घटना के बारे में पता चला, तो उसे ठगी का संदेह हुआ और उसने तुरंत ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई।
वृंदावन के क्षेत्राधिकारी संदीप कुमार सिंह ने बताया कि कथित घटना के सिलसिले में तीन अक्टूबर को शिकायत मिली थी और उसी दिन साइबर अपराध थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) (धोखाधड़ी) और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर लिया गया। सिंह ने कहा, “15 लाख रुपये की रकम के अंतरण पर रोक लगा दी गई है। हम जालसाजों का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं।
हम रोकी गई रकम व्यवसायी को वापस दिलाने की व्यवस्था करेंगे।

