महिला अधिकारिता विभाग के तहत ग्राम पंचायतों में कार्यरत साथिनों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। साथिनों ने मानदेय बढ़ाने और राज्य कर्मचारी का दर्जा देने की मांग की है। ज्ञापन में साथिनों ने बताया कि लंबे समय से कार्यरत होने के बावजूद उनका मानदेय बहुत कम है और कार्य समय भी निर्धारित नहीं है। वर्तमान में उन्हें राज्य सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी से भी कम मानदेय मिलता है, जबकि उन्हें अक्सर 10 से 15 घंटे तक काम करना पड़ता है। साथिनों के अनुसार मजदूरों के लिए कार्य समय आठ घंटे तय होता है, लेकिन उनके लिए कोई समय सीमा निर्धारित नहीं है। इसके अतिरिक्त, पंचायत क्षेत्र में बैठकों और काम के लिए कोई स्थायी स्थान भी उपलब्ध नहीं कराया गया है, जिससे उन्हें कार्य करने में कठिनाई होती है। ज्ञापन में प्रमुख मांगों में साथिनों को राज्य कर्मचारी घोषित करना और उनके कार्य समय की सीमा तय करना शामिल है। जब तक उन्हें नियमित नहीं किया जाता, तब तक कम से कम 21 हजार रुपए प्रतिमाह मानदेय देने की मांग की गई है। साथ ही, गर्मी और सर्दी में 10-10 दिन का अवकाश भी मांगा गया है। अन्य मांगों में पंचायत स्तर पर बैठने और कार्य करने के लिए अलग स्थान, बैठकों में आने-जाने का यात्रा भत्ता, जाजम बैठकों और स्टेशनरी के लिए अलग बजट का प्रावधान शामिल है। साथिनों ने महिला पर्यवेक्षक के पदों में 50 प्रतिशत आरक्षण देने की भी मांग की है। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि सेवाकाल पूरा होने के बाद साथिनों को कम से कम 10 लाख रुपए का एकमुश्त भुगतान और पेंशन की सुविधा प्रदान की जाए। साथिनों ने जिला प्रशासन से उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई करने की अपील की। इस अवसर पर छिंद्रपाल कौर, वीरपाल कौर, सोनू रानी, कौशल्या, सुलोचना, सावित्री और सुमन कुमारी सहित कई साथिनें मौजूद थीं।


