‘TVK ने हमसे संपर्क किया’, तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर IUML अध्यक्ष केएम कादर मोहिदीन का दावा

‘TVK ने हमसे संपर्क किया’, तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर IUML अध्यक्ष केएम कादर मोहिदीन का दावा

TVK Post Poll Alliance: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में सरकार बनाने को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। ऐसे में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के अध्यक्ष केएम कादर मोहिदीन ने कहा कि अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) ने उनसे चुनाव बाद समर्थन को लेकर संपर्क किया है। आपको बता दें कि TVK पार्टी के विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन के बावजूद भी बहुमत से पीछे रह गई है। केएम कादर मोहिदीन ने साफ किया कि अभी इस मामले में फैसला नहीं लिया गया है।

एमके स्टालिन लेंगे फैसला

केएम कादर मोहिदीन ने साफ किया कि उनकी पार्टी DMK गठबंधन का हिस्सा है और आगे की रणनीति मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के फैसले के अनुसार तय की जाएगी। IUML ने इस चुनाव में दो सीटों पर जीत दर्ज की है। वहीं अगर विजय की पार्टी की बात करें तो तो पार्टी ने विधानसभा चुनाव में 108 सीटें जीती हैं। वहीं कांग्रेस के 5 विधायकों का साथ मिलने के बाद गठबंधन के पास कुल 112 सीटें हो गई हैं। लेकिन 234 सदस्यों वाली विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 118 सीटों की जरूरत होती है, यानी अभी भी बहुमत से कुछ सीटें कम हैं।

राज्यपाल ने मांगा समर्थन का पूरा आंकड़ा

तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने गुरुवार को विजय को लोक भवन बुलाया और सरकार बनाने की स्थिति पर बात की। राज्यपाल ने कहा कि अभी तक TVK यह साबित नहीं कर पाई है कि उसके पास बहुमत का पूरा समर्थन है। जानकारी के अनुसार उन्होंने विजय से उन सभी विधायकों की लिस्ट और संख्या मांगी है जो TVK के साथ हैं।

दूसरी ओर कांग्रेस अब खुलकर TVK के समर्थन में दिखाई दे रही है और इसी बीच कुछ नेताओंने आरोप लगाया है कि राज्यपाल भाजपा के दबाव में काम कर रहे हैं और सरकार बनने की प्रक्रिया में देरी की जा रही है।

CPI और VCK पर टिकी नजर

TVK के संयुक्त महासचिव सीटीआर निर्मल कुमार ने चेन्नई में CPI नेताओं से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि CPI और VCK दोनों पार्टियां पहले आपस में चर्चा करेंगी, उसके बाद समर्थन को लेकर फैसला लेंगी। दोनों पार्टियों ने चुनाव में 2-2 सीटें जीती हैं, इसलिए उनका समर्थन सरकार बनाने में जरूरी माना जा रहा है। अब सबकी नजर एमके स्टालिन और बाकी सहयोगी दलों के अगले फैसले पर टिकी है।

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