‘ये सिर्फ हादसा नहीं बल्कि ये हत्या का मामला है, क्योंकि ये सीधे-सीधे सिस्टम की लापरवाही का नतीजा है।’ दरभंगा शहर के दिग्घी मिश्रटोला के रहने वाले समाजसेवी कुमार आदर्श ने ये बातें दैनिक भास्कर से बातचीत में कही। दरअसल, 29 अप्रैल की रात दिग्घी मिश्रटोला मोड़ के पास एक नाले में गिरने से बाइक सवार 28 साल के अनंत कुमार मिश्रा उर्फ अंशु की मौत हो गई थी। अंशु घर का इकलौता बेटा था। डेढ़ महीने पहले ही उसकी शादी हुई थी। घटना को लेकर अंशु के पिता अशोक कुमार मिश्रा ने नगर निगम पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि जिस नाले में गिरकर अंशु की मौत हुई, वो 7 से 8 फीट गहरा है और हमेशा खुला रहता है। अगर नाले पर स्लैप लगा होता, तो आज मेरा बेटा जिंदा होता। अशोक मिश्रा ने नगर निगम और जिला प्रशासन से मांग की है कि खुले नाले को तत्काल ढंका जाए, ताकि भविष्य में किसी और के साथ ऐसी घटना न हो। स्थानीय लोगों ने भी बताया कि यहां पहले भी कई छोटे-बड़े हादसे हो चुके हैं, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया। उं अब सिलसिलेवार तरीके से जानिए पूरा मामला मृतक अंशु पिछले पांच वर्षों से श्रीराम फाइनेंस में कार्यरत था और हाल ही में उसका प्रमोशन भी हुआ था, जिसे वह मई में ज्वाइन करने वाला था। लेकिन उससे पहले ही यह हादसा हो गया। डेढ़ महीने पहले यानी 9 मार्च 2026 को अंशु की शादी मुजफ्फरपुर जिले के कोहरा गांव के रहने वाले मदन मिश्रा की बेटी 26 साल की पूजा कुमारी से हुई थी। अंशु के पिता अशोक मिश्रा पेशे से इलेक्ट्रिशियन हैं, जबकि मां सविता देवी हाउस वाइफ हैं। अंशु के दादा शशि शेखर मिश्रा कंपाउंडर हैं। अशोक मिश्रा ने बताया कि हादसे से करीब 30 मिनट पहले मैं लखीसराय जाने के लिए घर से निकलकर 200 मीटर दूर चौराहे पर खड़ा था। मेरी भतीजी की शादी थी, शादी में शामिल होने के लिए मुझे जाना था। चौराहे पर पहुंचकर मैं ऑटो या टोटो का इंतजार कर रहा था। करीब 5 मिनट बाद अंशु की मां सविता देवी ने मुझे कॉल कर कहा कि आंधी-तूफान चल रहा है, बारिश हो रही है, अगर स्टेशन जाने के लिए ऑटो नहीं मिलेगा, तो आपकी ट्रेन छूट जाएगी। पत्नी की बात सुनकर मैंने कहा कि ठीक है, अंशु को भेज दो। उन्होंने कहा कि जब तक ममता अंशु को बाइक लेकर मेरे पास भेजती, एक टोटो मिल गया तो मैं उसमें बैठकर स्टेशन के लिए निकल गया। उधर, ममता के कहने पर अंशु बाइक लेकर निकला और घर से करीब 100 मीटर दूर आया, तभी ब्रेकर पर उसकी बाइक असंतुलित हो गई, जिससे अंशु बाइक से नाले में गिर गया। 20 मिनट बाद लोगों ने सड़क किनारे बाइक देखी, डायल 112 को सूचना दी अशोक मिश्रा ने बताया कि चूंकि आंधी चल रही थी, बारिश हो रही थी, इसलिए सड़क पर अंशु के साथ हुए हादसे को कोई नहीं देख पाया था। करीब 20 मिनट बाद जब आंधी, बारिश थमी तो आसपास के लोगों ने खिड़की से देखा कि सड़क किनारे एक बाइक गिरी है। लोगों ने ही डायल 112 को हादसे की सूचना दी। मौके पर पहुंची डायल 112 की टीम अंशु को नाले से निकालकर डीएमसीएच ले गई, जहां डॉक्टरों ने अंशु को मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद कोतवाली थाना पुलिस ने पंचनामा तैयार कर शव परिजनों को सौंप दिया। परिजनों ने पोस्टमार्टम कराए बिना ही अंतिम संस्कार कर दिया। अंशु को मुखाग्नि उसके चचेरे चाचा सौरभ कुमार मिश्रा ने दी है। ‘अब हमारा कौन है, हम बूढ़े हो गए हैं, हमारा सहारा कौन बनेगा’ अशोक कुमार मिश्रा ने बताया कि अंशु उनका इकलौता बेटा था और परिवार का एकमात्र कमाने वाला भी था। अब हमारा कौन है, हम बूढ़े हो गए हैं, हमारा सहारा कौन बनेगा। मृतक अंशु के दादा शशि प्रकाश मिश्रा ने कहा कि मैं हमेशा से लोगों की सेवा करता रहा हूं। प्रशिक्षित कंपाउंडर हूं। आज भी अगर रात के 2 बजे कोई बुलाता है तो मैं उसके घर जाकर इलाज करता हूं, डॉक्टर से बात करता हूं और मरीज का इलाज शुरू करवाता हूं। लेकिन आज मेरे ही पोते की इस तरह मौत हो गई, ये मेरे लिए सबसे बड़ा आघात है। शशि प्रकाश मिश्रा ने बताया कि घटना के वक्त वे घर पर भी नहीं थे। मैं अपने साले के बेटे के अंतिम संस्कार में गया हुआ था। उसी दौरान मेरे पोते के साथ यह दर्दनाक हादसा हो गया। जैसे ही सूचना मिली, मैं तुरंत वहां से गाड़ी रिजर्व कर भागते हुए घर पहुंचा। रोते हुए उन्होंने कहा कि मेरा इकलौता पोता था। उसकी इस तरह मौत हो जाना पूरे परिवार के लिए असहनीय है। ऐसा लग रहा है कि जैसे हमारा पूरा परिवार ही खत्म हो गया। मृतक अंशु की फुआ ने ममता देवी कहा कि अंशु उनके लिए भतीजा नहीं, बल्कि बेटे जैसा था। मेरे दो बच्चे हैं, लेकिन अंशु को मिलाकर मेरे तीन बेटे-बेटी थे। ऐसा लग रहा है जैसे आंधी-तूफान उसे खाने के लिए ही आया था और मेरे भतीजे को हमसे छीनकर ले गया। स्थानीय बोले- करीब 50 साल से खुला हुआ है नाला स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस नाले में गिरकर अंशु की मौत हुई, वह पिछले करीब 50 वर्षों से खुला है। सड़क और नाले के बीच की दूरी 100 मीटर होगी। सड़क के ठीक बगल में होने के बावजूद अब तक उस पर ढक्कन नहीं लगाया गया है। लोगों ने बताया कि इस नाले में अक्सर साइकिल, रिक्शा और बाइक सवार गिरते रहते हैं, लेकिन प्रशासन ने कभी ध्यान नहीं दिया। लोगों ने नगर निगम से मांग की है कि खुले नालों को जल्द से जल्द ढंककर ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जाए। समाजसेवी कुमार आदर्श बोले- बचपन से नाले को खुला देख रहा हूं घटना को लेकर समाजसेवी कुमार आदर्श ने प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग से मांग की है कि पीड़ित परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता दी जाए। उन्होंने जिलाधिकारी से भी हस्तक्षेप कर उचित मुआवजा दिलाने की अपील की है। उन्होंने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि मैं 42 साल का हूं और बचपन से इस नाले को ऐसे ही खुला देख रहा हूं। कई योजनाएं आईं, ‘सात निश्चय’ जैसी बड़ी घोषणाएं हुईं, लेकिन इस नाले को आज तक ढंका नहीं गया। अगर ढक्कन होता, तो आज अंशु जिंदा होता। समाजसेवी ने बताया कि हादसे के बाद अंशु के माता-पिता की हालत बेहद खराब है। उसकी पत्नी, जिसकी शादी महज डेढ़ महीने पहले हुई थी, सदमे में है और बिस्तर से उठ भी नहीं पा रही है। ‘ये सिर्फ हादसा नहीं बल्कि ये हत्या का मामला है, क्योंकि ये सीधे-सीधे सिस्टम की लापरवाही का नतीजा है।’ दरभंगा शहर के दिग्घी मिश्रटोला के रहने वाले समाजसेवी कुमार आदर्श ने ये बातें दैनिक भास्कर से बातचीत में कही। दरअसल, 29 अप्रैल की रात दिग्घी मिश्रटोला मोड़ के पास एक नाले में गिरने से बाइक सवार 28 साल के अनंत कुमार मिश्रा उर्फ अंशु की मौत हो गई थी। अंशु घर का इकलौता बेटा था। डेढ़ महीने पहले ही उसकी शादी हुई थी। घटना को लेकर अंशु के पिता अशोक कुमार मिश्रा ने नगर निगम पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि जिस नाले में गिरकर अंशु की मौत हुई, वो 7 से 8 फीट गहरा है और हमेशा खुला रहता है। अगर नाले पर स्लैप लगा होता, तो आज मेरा बेटा जिंदा होता। अशोक मिश्रा ने नगर निगम और जिला प्रशासन से मांग की है कि खुले नाले को तत्काल ढंका जाए, ताकि भविष्य में किसी और के साथ ऐसी घटना न हो। स्थानीय लोगों ने भी बताया कि यहां पहले भी कई छोटे-बड़े हादसे हो चुके हैं, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया। उं अब सिलसिलेवार तरीके से जानिए पूरा मामला मृतक अंशु पिछले पांच वर्षों से श्रीराम फाइनेंस में कार्यरत था और हाल ही में उसका प्रमोशन भी हुआ था, जिसे वह मई में ज्वाइन करने वाला था। लेकिन उससे पहले ही यह हादसा हो गया। डेढ़ महीने पहले यानी 9 मार्च 2026 को अंशु की शादी मुजफ्फरपुर जिले के कोहरा गांव के रहने वाले मदन मिश्रा की बेटी 26 साल की पूजा कुमारी से हुई थी। अंशु के पिता अशोक मिश्रा पेशे से इलेक्ट्रिशियन हैं, जबकि मां सविता देवी हाउस वाइफ हैं। अंशु के दादा शशि शेखर मिश्रा कंपाउंडर हैं। अशोक मिश्रा ने बताया कि हादसे से करीब 30 मिनट पहले मैं लखीसराय जाने के लिए घर से निकलकर 200 मीटर दूर चौराहे पर खड़ा था। मेरी भतीजी की शादी थी, शादी में शामिल होने के लिए मुझे जाना था। चौराहे पर पहुंचकर मैं ऑटो या टोटो का इंतजार कर रहा था। करीब 5 मिनट बाद अंशु की मां सविता देवी ने मुझे कॉल कर कहा कि आंधी-तूफान चल रहा है, बारिश हो रही है, अगर स्टेशन जाने के लिए ऑटो नहीं मिलेगा, तो आपकी ट्रेन छूट जाएगी। पत्नी की बात सुनकर मैंने कहा कि ठीक है, अंशु को भेज दो। उन्होंने कहा कि जब तक ममता अंशु को बाइक लेकर मेरे पास भेजती, एक टोटो मिल गया तो मैं उसमें बैठकर स्टेशन के लिए निकल गया। उधर, ममता के कहने पर अंशु बाइक लेकर निकला और घर से करीब 100 मीटर दूर आया, तभी ब्रेकर पर उसकी बाइक असंतुलित हो गई, जिससे अंशु बाइक से नाले में गिर गया। 20 मिनट बाद लोगों ने सड़क किनारे बाइक देखी, डायल 112 को सूचना दी अशोक मिश्रा ने बताया कि चूंकि आंधी चल रही थी, बारिश हो रही थी, इसलिए सड़क पर अंशु के साथ हुए हादसे को कोई नहीं देख पाया था। करीब 20 मिनट बाद जब आंधी, बारिश थमी तो आसपास के लोगों ने खिड़की से देखा कि सड़क किनारे एक बाइक गिरी है। लोगों ने ही डायल 112 को हादसे की सूचना दी। मौके पर पहुंची डायल 112 की टीम अंशु को नाले से निकालकर डीएमसीएच ले गई, जहां डॉक्टरों ने अंशु को मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद कोतवाली थाना पुलिस ने पंचनामा तैयार कर शव परिजनों को सौंप दिया। परिजनों ने पोस्टमार्टम कराए बिना ही अंतिम संस्कार कर दिया। अंशु को मुखाग्नि उसके चचेरे चाचा सौरभ कुमार मिश्रा ने दी है। ‘अब हमारा कौन है, हम बूढ़े हो गए हैं, हमारा सहारा कौन बनेगा’ अशोक कुमार मिश्रा ने बताया कि अंशु उनका इकलौता बेटा था और परिवार का एकमात्र कमाने वाला भी था। अब हमारा कौन है, हम बूढ़े हो गए हैं, हमारा सहारा कौन बनेगा। मृतक अंशु के दादा शशि प्रकाश मिश्रा ने कहा कि मैं हमेशा से लोगों की सेवा करता रहा हूं। प्रशिक्षित कंपाउंडर हूं। आज भी अगर रात के 2 बजे कोई बुलाता है तो मैं उसके घर जाकर इलाज करता हूं, डॉक्टर से बात करता हूं और मरीज का इलाज शुरू करवाता हूं। लेकिन आज मेरे ही पोते की इस तरह मौत हो गई, ये मेरे लिए सबसे बड़ा आघात है। शशि प्रकाश मिश्रा ने बताया कि घटना के वक्त वे घर पर भी नहीं थे। मैं अपने साले के बेटे के अंतिम संस्कार में गया हुआ था। उसी दौरान मेरे पोते के साथ यह दर्दनाक हादसा हो गया। जैसे ही सूचना मिली, मैं तुरंत वहां से गाड़ी रिजर्व कर भागते हुए घर पहुंचा। रोते हुए उन्होंने कहा कि मेरा इकलौता पोता था। उसकी इस तरह मौत हो जाना पूरे परिवार के लिए असहनीय है। ऐसा लग रहा है कि जैसे हमारा पूरा परिवार ही खत्म हो गया। मृतक अंशु की फुआ ने ममता देवी कहा कि अंशु उनके लिए भतीजा नहीं, बल्कि बेटे जैसा था। मेरे दो बच्चे हैं, लेकिन अंशु को मिलाकर मेरे तीन बेटे-बेटी थे। ऐसा लग रहा है जैसे आंधी-तूफान उसे खाने के लिए ही आया था और मेरे भतीजे को हमसे छीनकर ले गया। स्थानीय बोले- करीब 50 साल से खुला हुआ है नाला स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस नाले में गिरकर अंशु की मौत हुई, वह पिछले करीब 50 वर्षों से खुला है। सड़क और नाले के बीच की दूरी 100 मीटर होगी। सड़क के ठीक बगल में होने के बावजूद अब तक उस पर ढक्कन नहीं लगाया गया है। लोगों ने बताया कि इस नाले में अक्सर साइकिल, रिक्शा और बाइक सवार गिरते रहते हैं, लेकिन प्रशासन ने कभी ध्यान नहीं दिया। लोगों ने नगर निगम से मांग की है कि खुले नालों को जल्द से जल्द ढंककर ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जाए। समाजसेवी कुमार आदर्श बोले- बचपन से नाले को खुला देख रहा हूं घटना को लेकर समाजसेवी कुमार आदर्श ने प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग से मांग की है कि पीड़ित परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता दी जाए। उन्होंने जिलाधिकारी से भी हस्तक्षेप कर उचित मुआवजा दिलाने की अपील की है। उन्होंने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि मैं 42 साल का हूं और बचपन से इस नाले को ऐसे ही खुला देख रहा हूं। कई योजनाएं आईं, ‘सात निश्चय’ जैसी बड़ी घोषणाएं हुईं, लेकिन इस नाले को आज तक ढंका नहीं गया। अगर ढक्कन होता, तो आज अंशु जिंदा होता। समाजसेवी ने बताया कि हादसे के बाद अंशु के माता-पिता की हालत बेहद खराब है। उसकी पत्नी, जिसकी शादी महज डेढ़ महीने पहले हुई थी, सदमे में है और बिस्तर से उठ भी नहीं पा रही है।


