जबलपुर मेडिकल कॉलेज के वाटर कूलर में काई:मरीजों को मिल रहा दूषित पानी, पाइपलाइन नाली से गुजरी

जबलपुर मेडिकल कॉलेज के वाटर कूलर में काई:मरीजों को मिल रहा दूषित पानी, पाइपलाइन नाली से गुजरी

इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद, दैनिक भास्कर की टीम ने जबलपुर स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में पीने के पानी की व्यवस्था की पड़ताल की। जांच में सामने आया कि यहां भी पीने के पानी की स्थिति बेहद खराब है। मरीजों और उनके परिजनों के साथ-साथ डॉक्टरों के लिए लगे वाटर कूलर की टंकी में भी काई जमी मिली। डीन कार्यालय के पास लगे वाटर कूलर के आसपास गंदगी का अंबार देखा गया। टंकी के भीतर हरी काई साफ दिखाई दे रही थी, जो साफ-सफाई की गंभीर अनदेखी को दर्शाती है। इसके अतिरिक्त, वाटर कूलर के पास से गुजरने वाली नल की पाइपलाइन एक नाली के बीच से होकर जा रही है, जिससे पानी के दूषित होने का खतरा बना हुआ है। अस्पताल के कई वार्डों में मरीजों को सीधे नल का पानी पीने के लिए दिया जा रहा है। वार्ड नंबर 17 में भर्ती एक मरीज के परिजन सोहनलाल ने बताया कि यहां लगे नल से आने वाला पानी पीने लायक नहीं लगता। पानी का स्वाद खराब होने के कारण वे दूसरे वार्ड के वाटर कूलर से पानी भरकर पीने को मजबूर हैं। इस मामले में मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. नवनीत सक्सेना ने बताया कि पहले टंकियों की सफाई हर छह महीने में मेडिकल कॉलेज पीडब्ल्यूडी द्वारा कराई जाती थी। अब आदेश दिए गए हैं कि सफाई का कार्य हर महीने किया जाएगा। डीन कार्यालय में लगी वाटर कूलर की टंकी के संबंध में उन्होंने कहा कि यह टंकी लगभग दो महीने पहले ही लगाई गई हैं और इसमें जमी काई की जल्द सफाई कराई जाएगी। वार्डों में लगे वाटर कूलर और नलों की स्थिति के बारे में पूछे जाने पर डीन ने अनभिज्ञता जताई और कहा कि वार्ड अधीक्षक ही इस बारे में बेहतर जानकारी दे सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि मेडिकल कॉलेज परिसर में एक वाटर प्लांट लगाने की योजना बनाई जा रही है, जिसके लिए जल्द ही शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा। कॉलेज परिसर में भी गंदगी का अंबार मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी गेट से अंदर प्रवेश करते ही पूरे परिसर में गंदगी फैली नजर आई। बदबू इतनी तेज थी कि सांस लेना भी मुश्किल हो रहा था। वार्डों की खिड़कियों के बाहर दवाइयों के रेपर, इंजेक्शन और इस्तेमाल किए गए ग्लव्स बिखरे पड़े थे, जो खराब वेस्ट मैनेजमेंट की पोल खोल रहे थे। स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील संस्थान में इस तरह की लापरवाही मरीजों की सेहत पर भारी पड़ सकती है। ऐसे में अस्पताल प्रबंधन से अपेक्षा की जा रही है कि वह पीने के साफ पानी की उचित और नियमित व्यवस्था सुनिश्चित करे, ताकि मरीजों और उनके परिजनों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

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