वैज्ञानिकों ने ब्रह्मांड का अब तक का सबसे बड़ा और सबसे विस्तृत 3D नक्शा तैयार किया है। यह काम 5 साल की लगातार मेहनत के बाद पूरा हुआ है। इस नई उपलब्धि से वैज्ञानिकों को ब्रह्मांड की बनावट, उसके फैलाव और रहस्यमयी डार्क एनर्जी को समझने में मदद मिलेगी। यह नक्शा डार्क एनर्जी स्पेक्ट्रोस्कोपिक इंस्ट्रूमेंट नाम की विशेष मशीन की मदद से बनाया गया है। इसमें 5,000 फाइबर-ऑप्टिक ‘आंखें’ लगी हैं, जो हर रात आसमान में अलग-अलग जगहों पर मौजूद रोशनी को देखती थीं। इस सर्वे में 4.7 करोड़ से ज़्यादा आकाशगंगाओं और 2 करोड़ तारों की जानकारी जुटाई गई है।
शुरुआती समय तक झांका
इस नक्शे में इतनी दूर स्थित आकाशगंगाएं भी शामिल हैं, जिनकी रोशनी पृथ्वी तक पहुंचने में 11 अरब साल लगी। यानी वैज्ञानिक लगभग ब्रह्मांड के शुरुआती समय तक झांकने में सफल हुए हैं।
कैसे बना यह नक्शा?
पिछले पांच सालों से हर रात इंस्ट्रूमेंट की 5,000 ‘आंखें’ आसमान के छोटे-छोटे बिंदुओं पर फोकस करती थीं। रोबोटिक सिस्टम हर 20 मिनट में नई जगह पर जाकर रोशनी रिकॉर्ड करता था। मशीन उस रोशनी को अलग-अलग रंगों में बांटकर यह पता लगाती थी कि वह चीज कितनी दूर है, किस दिशा में जा रही है और उसकी रासायनिक बनावट क्या है। इस तरह से यह नक्शा बन पाया।
क्यों खास है यह खोज?
यहखोज दुनिया के 70 संस्थानों के 900 से ज़्यादा वैज्ञानिकों ने मिलकर पूरी की है। इसका मुख्य उद्देश्य डार्क एनर्जी को समझना है। डार्क एनर्जी वो रहस्यमयी शक्ति है, जो ब्रह्मांड का लगभग 70% हिस्सा मानी जाती है और जिसकी वजह से ब्रह्मांड लगातार तेज़ी से फैल रहा है। पहले माना जाता था कि डार्क एनर्जी हमेशा एक जैसी रहती है, लेकिन शुरुआती डेटा से संकेत मिले हैं कि इसमें बदलाव हो सकता है।


