रेप-मर्डर के राज खोलने वाली किट 11 गुना महंगी खरीदी:क्या यही है FSL डायरेक्टर सहित 4 को पद से हटाने की वजह, 9 करोड़ के घोटाले की कहानी

रेप-मर्डर के राज खोलने वाली किट 11 गुना महंगी खरीदी:क्या यही है FSL डायरेक्टर सहित 4 को पद से हटाने की वजह, 9 करोड़ के घोटाले की कहानी

राज्य सरकार ने एक दिन पहले विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) के डायरेक्टर अजय शर्मा समेत 4 अफसरों को पद से हटा दिया। APO के ऑर्डर को लेकर सरकार के आला अधिकारियों ने माना कि इसके पीछे वजह FSL में हुई DNA जांच किट खरीद में गड़बड़ी है, लेकिन ऑफिशियली कोई बोलने को तैयार नहीं है। दरअसल, ये महंगी और कैमिकली सेंसिटिव किट रेप, मर्डर जैसे गंभीर मामलों में मौके से लिए जाने वाले DNA सेंपल की रसायनों (केमिकल) के साथ परीक्षण या जांच में काम आती है। आरोप है कि अन्य राज्यों की तुलना में FSL राजस्थान ने इन किटों को 11 गुना अधिक दामों में खरीदा। कंपनी भी वही, प्रोडक्ट भी वही, फिर भी शिकायतें मिलने पर खरीद नहीं रोकी गई। सूत्रों के अनुसार ये घोटाला करीब 8.71 करोड़ रुपए का है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… मामला 2 साल पहले 22 मई 2024 को एक ई-फाइल के जरिए राज्य सरकार की नजर में आया। उस समय डॉ. रमेश चौधरी को स्टोर प्रभारी का जिम्मा दिया गया था। डॉ. रमेश चौधरी ने अप्रैल-मई, 2023-24 में स्टोर रिकॉर्ड में पाया कि 2023-24 में FSL राजस्थान में एक जैसे DNA जांच किट अन्य राज्यों की तुलना में बहुत ज्यादा कीमत में खरीदे गए। सूत्रों के अनुसार डॉ. चौधरी ने इस वित्तीय गड़बड़ी की जानकारी FSL के डायरेक्टर को पत्रावलियों के जरिए लिखित में बार-बार दी, लेकिन उन्होंने इस पर ध्यान नहीं दिया। FSL डायरेक्टर डॉ. अजय शर्मा, FSL के सिरोलॉजी DNA विभाग के सहायक निदेशक डॉ. आनंद कुमार, सहायक निदेशक डॉ. भावना पूनिया और सिरोलॉजी सेक्शन के सीनियर साइंटिफिक ऑफिसर डॉ. रामकिशन कुमावत पर DNA किट खरीद गड़बड़ी में भूमिका होने के आरोप लग रहे थे। शिकायत के बावजूद नहीं रुकी महंगी खरीद इसके बाद डॉ. चौधरी ने 22 मई 2024 को ई-फाइल के जरिए राज्य सरकार को महंगी खरीद की जानकारी भेज दी। ई-फाइल में राज्य सरकार को बताया गया कि एक ही कंपनी के एक ही प्रोडक्ट को अन्य राज्यों की तुलना में 11 गुना महंगी कीमत पर खरीदा जा रहा है। ऐसा एक नहीं कई बार हुआ। शिकायत में कहा गया कि FSL राजस्थान डायरेक्टर को बार-बार इस खरीद को रोकने और नुकसान की जानकारी दी गई, लेकिन खरीद लगातार होती रही। बार-बार महंगी खरीद के लिए आदेश जारी होते रहे। इसके बाद अतिरिक्त मुख्य गृह सचिव को 9 जून, 2025 को भी एक चिट्ठी लिखी गई। इस चिट्ठी में डॉ. रमेश चौधरी ने कहा कि जब से सरकार में महंगी खरीद की शिकायत की है, तभी से मुझे प्रताड़ित किया जा रहा है। सरकार को भेजी शिकायत को वापस लेने का दबाव भी डाला जा रहा है। मेरी APAR 2024-25 (सालाना परफॉरमेंस रिपोर्ट) में मेरे खिलाफ ‘Disobedient, Arrogant nature, decision making – unsatisfactory etc.’ ये टिप्पणी की गई है। साथ ही, लो ग्रेडिंग दी गई है। सरकार को भेजी शिकायत में महंगी खरीद के खुलासे… खरीद में राजस्थान और अन्य राज्यों की रेट के अंतर को देखा जाए तो ये घोटाला करीब 8.71 करोड़ से अधिक का है। सरकार को भेजी शिकायत में बताया गया कि कौन सी DNA किट यहां कितने में खरीदी गई और दूसरे राज्य कितने में खरीद रहे हैं। आरोप है कि महंगी खरीद की जानकारी होने के बावजूद 25 जून, 2024 को भी DNA जांच रसायन (केमिलकल) किट्स खरीद की वित्तीय स्वीकृति दी गई थी। जैसे, ‘Autosomal STR DNA Amplification 27 Marker, 200 reactions’ नाम की 121 DNA किट खरीदी गई। अन्य राज्यों से कीमत की तुलना की जाए, तो एक ही किट में अंतर 3.20 लाख रुपए का है। वहीं, ‘Y-Chromosomal STR Amplification 27 Marker, 100 reactions’ नाम की 77 DNA किट खरीदी गईं। अन्य राज्यों से कीमत की तुलना की जाए, तो एक ही किट में अंतर 3.50 लाख रुपए का है। FSL के अरिस्टेंट डायरेक्टर डॉ. रमेश चौधरी से बात … (डॉ. चौधरी की शिकायत के बाद महंगी खरीद का मामला सरकार की नजरों में आया था) FSL डायरेक्टर डॉ. अजय शर्मा के तर्क

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